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सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योग किन्हें कहा जाता है?

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MSME अधिनियम- 2016 के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग को बनाया गया है। हाल में हुए कोविड-19 की वजह से देश में काफी आर्थिक नुकसान हुआ है और उस नुकसान को कम करने के लिए इस दिशा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बड़ा एलान किया, उन्होंने कहा की इस सेक्टर के लिए 3 लाख करोड़ रूपये तक के लोन की गारंटी सरकार देगी। इसके कारण देश में 45 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को काफी फायदा हो सकता है। अब इस आर्टिकल को पूरा पढ़ते है और जानते है की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग किन्हें कहा जाता है?

पिछले पांच दशको में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बेहद और गतिशील क्षेत्र के रूप में उभरा है। बड़े उद्योगों की तुलना में अपेक्षाकृत कम पूँजी से बड़े रोजगार के अवसर प्राप्त कराने में MSME महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और साथ ही राष्ट्रिय आवक और धन की ज्यादा समान वितरण सुनिश्चित करता और क्षेत्रीय असंतुलन को कम करता जिससे ग्रामीण और पिछड़े विस्तारो के औद्योगिकरण में मदद मिलती है। MSMEs बड़े उद्योगों के रूप में सहायक इकाइयों के पूरक है और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए यह क्षेत्र काफी योगदान देता है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास बिल-2005 जो 12 मई, 2005 को संसद में प्रस्तुत किया गया था, उसको राष्ट्रपति द्वारा अनुमति मील गई और एसे एक अधिनियम बन गया। भारत सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम 2006 अधिनियमित किया गया।

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दोस्तों! चलिए अब आगे पढ़ते है इस आर्टिकल को और जानते है की इस अधिनियम के अनुसार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम किन्हें कहा जायेगा?

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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम- 2006 की नई परिभाषा (New Definition of Micro, Small and Medium Enterprises Development Act- 2006)

भारत सरकार के द्वारा अधिनियमित किया गया अधियम 2006 के अनुसार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा उन उद्योगों में ‘प्लांट एवं मशीनरी’ में निवेश के अनुसार निर्धारित होती थी। लेकिन 7 अप्रैल, 2018 से नई परिभाषा लागु है जिसे प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमिटी की बैठक में अंतिम रूप दिया गया था। यह परिवर्तन हो जाने के बाद अब ‘प्लांट और मशीनरी’ में निवेश की जगह ‘टर्नओवर’ के आधार पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) वर्गीकरण किया जायेगा।

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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम की पुरानी परिभाषा,2018 (Old Definition of Micro, Small and Medium Enterprises, 2018)

सूक्ष्मलघु और मध्यम उद्यम की  पुरानी परिभाषा,2018

 

                                     विनिर्माण क्षेत्र     
 सूक्ष्म उद्योग सालाना टर्न ओवर रु. 5 करोड़ से कम
 लघु उद्योग सालाना टर्न ओवर रु. 5 करोड़ से 75 करोड़ के बीच
 मध्यम उद्योग सालाना टर्न ओवर रु. 75 करोड़ से 250 करोड़ के बीच
   सेवा क्षेत्र
 सूक्ष्म उद्योग सालाना टर्न ओवर रु. 5 करोड़ से कम
 लघु उद्योग सालाना टर्न ओवर रु. 5 करोड़ से 75 करोड़ के बीच
 मध्यम उद्योग सालाना टर्न ओवर रु. 75 करोड़ से 250 करोड़ के बीच

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सरकार द्वारा इसकी नई परिभाषा इस प्रकार दी गयी है:- 2020 (Its New Definition has been given by the Government as Follows:- 2020)

वर्गीकरण सूक्ष्म उद्योगलघु उद्योगमाध्यम उद्योग
विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रनिवेश 1 करोड़ से कम &

टर्नओवर 5 करोड़ से कम

निवेश 10 करोड़ से कम &

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टर्नओवर  50 करोड़ से कम

निवेश 20 करोड़ से कम &

टर्नओवर  100 करोड़ से कम

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान इस प्रकार है।

  • वर्तमान में भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) के सेक्टर की लगभग 36.1 मिलियन इकाइयाँ लगी हुई है।
  • हाल में भारत में 120 मिलियन लोगो को रोजगार MSMEs से दिलाया गया है।
  • भारत के कुल निर्यात में लगभग 45% के करीब योगदान MSMEs देता है।
  • MSMEs भारत के विनिर्माण-सकल घरेलु उत्पाद में 6.11% का और सेवा क्षेत्र से मिलने वाली GDP में 25% का योगदान देता है।
  • इस सेक्टर ने निरंतर 10% से ज्यादा की वार्षिक वृद्धि दर को बनाये रखा है।
  • MSMEs का देश के सकल घरेलु उत्पाद में लगभग 8% का योगदान है।
  • ग्रामीण क्षेत्रो में भी MSMEs की बहुत सी इकाइयाँ मौजूद है, इसीलिए गावों के लोगो का शहेरो में जाना रुका हुआ है।

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Last Final Word

हमें उम्मीद है की हमारा यह आर्टिकल “सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग किन्हें कहा जाता है?” आपको पढने और समजने में अच्छा लगा हो। साथ में आपको सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम की नई और पुरानी परिभाषा के बारे में जानकारी दी है। अगर आपको इस आर्टिकल से जुड़ा कोई प्रश्न हो या कोई बात समज में नहीं आई हो तो कमेंट में जरुर लिखे।

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