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सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय

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इस पोस्ट में आपको भारत के एक महानपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन से जुडी सभी बाते और उसका संघर्ष, और पटेल के जीवन से जुडी कई सारी महत्वपूर्ण बाते, भारत की आज़ादी में वल्लभभाई का महत्वपूर्ण योगदान, अंग्रेजो से गुलाम भारत को आजाद करवा ने के लिए वल्लभभाई पटेल ने अपना सारा जीवन समर्पित करने वाले इस महान व्यक्ति को कोन नहीं जानता। वल्लभभाई पटेल स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री और भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। साथ ही स्वतंत्र भारत के उप प्रधानमंत्री के रूप में, वल्लभभाई पटेल ने भारतीय संघ के साथ सैकड़ों रियासतों का विलयन किया था। आपको यह बता दे की उन्होंने अविश्वनीय और कुटनीतिक कौशल (Diplomatic Skills) और नीतिगत अटलता की वजह से वल्लभभाई को लौहपुरुष की संज्ञा भी मिली थी।

वल्लभभाई पटेल का जन्म और आरंभिक जीवन (Birth and early life of Vallabhbhai Patel)

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्तूबर, वर्ष 1875 में गुजरात के नडियाद में एक जमींदार परिवार में हुआ था। वल्लभभाई पटेल के पिता का नाम झवेरभाई पटेल था और उसकी माता का नाम लाडबाई थी। वल्लभभाई अपने पिता और माता के चौथे बेटे थे। वल्लभभाई के पिता एक किसान थे, और वल्लभभाई की माता एक आध्यात्मिक और धर्मपरायण महिला थी। और वल्लभभाई पटेल के तिन बड़े भाई नरसीभाई, विट्टलभाई, और सोमाभाई पटेल और एक बहन भी थी उसका नाम दहिबा पटेल था।

वल्लभभाई पटेल का विवाह 

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बाल विवाह के तहत वल्लभभाई पटेल की शादी भी 16 साल की उम्र में वर्ष 1891 में हुई थी वल्लभभाई पटेल की पत्नी का नाम झावेरबा था। वल्लभभाई पटेल को दो संतान थी एक लड़का और एक लड़की थी उसका नाम दहयाभाई और मणिबेन पटेल नाम था।

पत्नी की मौत की खबर सुनकर कोर्ट में जारी रखी कटहिजम

वल्लभभाई पटेल की पत्नी झावेरबा को कैंसर था और झावेरबा कैन्सर से पीड़ित होने की वजह से उनके साथ ज्यादा दिन तक नहीं रह सकी, झावेरबा वल्लभभाई का साथ छोड़ कर 1909 इस दुनिया से चली गई। जब वल्लभभाई पटेल को झावेरबा की निधन की खबर मिली तो उस वक्त वे अपने किसी कोर्ट की कार्यवाही में व्यस्त थे, और वल्लभभाई पटेल को यह खबर मिली फिर भी फिर भी वह अपनी कार्यवाही जारी राखी बंद नही की और वे अपने उस मुकदमे को जित भी गए, इसके बाद वल्लभभाई ने अपनी पत्नी की निधन की खबर सबको दी, इसके बाद वल्लभभाई पटेल ने अपना पूरा जीवन बच्चो के साथ विधुर व्यतीत किया।

सरदार वल्लभभाई पटेल बायोग्राफी (Sardar Vallabhbhai Patel Biography)

नाम (Name)सरदार वल्लभ भाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel)
जन्म (Birthday)31 अक्टूबर, 1875 नाडियाद, गुजरात (Nadiyaad,Gujraat)
मृत्यु (Death)15 दिसम्बर 1950 (Bombay)
पिता का नाम (Father Name)झावेरभाई पटेल (Jhaverbhai Patel)
माता का नाम (Mother Name)लाड़बाई (Laadbai)
पत्नी का नाम (Wife Name)झावेरबा (Jhaverbaa)
बच्चों के नाम (Children Name)दहयाभाई पटेल (Dahyabhai Patel Son), मणिबेन पटेल (Maniben Patel Daughters)
शिक्षा (Education)एन.के. हाई स्कूल, पेटलाड, इंस ऑफ कोर्ट, लंदन, इंग्लैंड (NK High School, Petlad, Inns of Court, London, England)
पुस्तकें (Books)
  • राष्ट्र के विचार, (Nation’s Thoughts)
  • वल्लभभाई पटेल, (Vallabh Bhai Patel)
  • वल्लभ भाई पटेल के संग्रहित कार्य, (Collected Works of Vallabhbhai Patel)
  • 15 खंड (15 sections)
स्मारक (Memorial)स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity)

वल्लभभाई पटेल की शिक्षा और वकालत की शरुआत (The beginning of education and advocacy of Vallabhbhai Patel)

वल्लभभाई पटेल ने अपनी शिक्षा एक गुजरती माध्यम से की थी, इसके बाद वल्लभभाई पटेल ने अपनी शिक्षा को अंग्रेजी माध्यम स्कूल में एडमिशन ले लिया था। वल्लभभाई को अपनी स्कूल की शिक्षा को पूर्ण करने में बहुत टाइम लगा था। वर्ष 1897 में वल्लभभाई की उम्र 22 साल की थी और 22 साल में अपनी 10 वीं की परीक्षा को पास की। पटेल के परिवार की हालत खासी ठीक नहीं थी और उसी वजह से उन्होंने कॉलेज ना जाकर बल्कि घर पर ही रह कर अपनी आगे की पढाई उधार की पुस्तक लेकर अपनी पढाई को पूर्ण किया, इसके साथ साथ ही वल्लभभाई पटेल ने जिल्ला अधिकारी की परीक्षा की तैयारी भी अपने घर पर रह कर ही प्राप्त की थी, और वहीँ वल्लभभाई पटेल पढने में होशियार थे की इस परीक्षा में उन्होंने सबसे अधिक अंक प्राप्त किये थे।

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इस सबके बाद वल्लभभाई पटेल को लॉ की डिग्री हासिल करनी थी तो वह लॉ की डिग्री हासिल करने इंग्लेंड चले गए। वल्लभभाई को कॉलेज जाने का किसी भी तरह का अनुभव नहीं था। वल्लभभाई पटेल साल 1910 में इंग्लेंड लॉ की डिग्री हासिल करने गये थे। पटेल बुद्धि के इतने तेज थे की, उन्होंने 36 महीने की लॉ की डिग्री को 30 महीने में ही पूरा कर लिया, और इसी तरह वल्लभभाई पटेल ने साल 1913 में इंस ऑफ कोर्ट से अपनी लॉ की पढाई को सम्पूर्ण हासिल कर लिया, ईसी दौरान उन्होंने सर्विधक अंक पाकर अपने कॉलेज में सबसे टॉप करलिया। इस सभी को प्राप्त करने के बाद वह भारत वापिस लोट आए और गुजरात के गोधरा में वल्लभभाई ने अपने लॉ की प्रेक्टिस की शरुआत की।

ईसी तरह वल्लभभाई की क़ानून में कुशल चालाकी को देख कर ब्रिटिश सरकार ने वल्लभभाई को कई बड़े पदों पर नियुक्ति (Appointment) देने की पेशकश भी की थी, लेकिन हमारे भारत के लोह्पुरुष ने ब्रिटिश सरकार का एक भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, क्योकि वल्लभभाई पटेल को ब्रिटिश कानूनों को बिलकुल पसंद नहीं करते थे और इस ब्रिटिश सरकार के कानूनों से वह सख्त विरोधी थे, इसीलिए वल्लभभाई ने अंग्रेजो के साथ काम करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

गाँधीवादी विचारो से प्रभावित हुए वल्लभभाई पटेल (Vallabhbhai Patel was influenced by Gandhian ideas)

इसके बाद वल्लभभाई पटेल अहमदाबाद में एक सफल बेरिस्टर के तौर पर वह काम करने लगे, साथ ही साथ पटेल वल्लभभाई गुजरात के क्लब के मेंबर भी बन गए, और इस दौरान वल्लभभाई ने महत्मा गाँधीजी के एक पीरियड में हिस्सा लिया, जिसके बाद वल्लभभाई गाँधीजी के विचारो से बहुत प्रभावित हुए और इसके बाद वल्लभभाई पटेल ने करिश्माई नेता गाँधीजी के कट्टर अनुयायी बनने का एक फैसला लिया, और इसके बाद वल्लभभाई गाँधीवादी के सिधान्तो पर चलने लगे और फिर धीरे धीरे से वह राजनीति का एक अमूल्य हिस्सा बनते गए।

वल्लभभाई पटेल का पॉलिटिकल करियर  (Political Career of Vallabhbhai Patel)

स्वतंत्रता संग्राम में सरदार पटेल की भूमिका : इंडिया की आजादी के महान अभिनेता महात्मा गाँधी के प्रभापूर्वक विचारो से प्रेरित होकर सरदार वल्लभभाई पटेल ने कई छुआछुत, जातिवाद, महिला ओ के खिलाफ हो रहे बेरखी अत्याचारों के खिलाफ जोश से अपनी आवाज उठाई और कई महिला को सामाजिक बुराई को दूर करने के लिए काफिः प्रयास भी किए। इसके साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल ने गाँधी वादी विचारधारा को अपनाते हुए इंडिया के आज़ाद आंदोलन में भाग लेने का निर्णय लिया।

खेडा संघर्ष में सरदार पटेल की भूमिका : गांधीजी के इस शक्तिशाली और महत्वपूर्ण विचार से प्रसन्न हुए सरदार वल्लभभाई पटेल ने वर्ष 1917 में खेडा आन्दोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को निभाया, लेकिन उस दौरान गुजरात का खेडा विस्तार बुरी तरह से खंगर की चपेट में था, ऐसे में खेडूत अंग्रेजो द्वारा लगाए गए कर देने में सब समर्थ नहीं थे, ऐसे में किसान अंग्रेजों द्धारा लगाए गए कर देने में समर्थ नहीं थे, जिसके चलते किसानों ने ब्रिटिश सरकार से कर में राहत देने की मांग की थी। लेकिन जब किसानों के इस प्रस्ताव को अंग्रेजों द्धारा अस्वीकार कर दिया गया तो सरदार वल्लभभाई पटेल ने बड़े स्तर पर ‘नो टैक्स कैंपेन’ का नेतृत्व किया, और किसानों को अंग्रेजों को कर नहीं देने के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं इस संघर्ष के बाद ब्रिटिश सरकार को वल्लभभाई पटेल की दृढ़ता के आगे झुकने के लिए मजबूर होना पड़ा था, और किसानों को कर में राहत देनी पड़ी थी। वहीं स्वतंत्रता आंदोलन में वल्लभभाई पटेल ने यह सबसे पहली सफलता थी।

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सरदार पटेल ने असहयोग आंदोलन समेत गांधीजी के सभी आंदोलन में दिया समर्थन : सरदार पटेल गांधीजी के विचारो से इतने प्रभावित थे की वर्ष 1920 में असहयोग आंदोलन में सरदार पटेल ने स्वदेशी वस्तुओ को अपनाया और विदेशी वस्तुओ को जैसे कपडे की होली जलाई। इसके अलावा सरदार वल्लभभाई पटेल ने गांधी जी के शांती पूर्वक तरीके से किए गए देशीव्यापी आंदोलन जैसे स्वराज आन्दोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, दांडी यात्रा समेत सभी आंदोलन में गाँधीजी को सहयोग दिया।

कैसे मिली ‘सरदार’ की उपाधि (How did he get the title of ‘Sardar’?)

अपनी भाषण शक्ति से प्रभावित  करने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल जी ने वर्ष 1928 में साइमन कमीशन के खिलाफ छेड़े गए बारडोली सत्याग्रह के दौरान लोगों को अपने इस महान विचारो से काफी प्रभावित किया, जिसके चलते लोगो अंग्रेज सरकार द्वारा बनाए गए कर वेरे को न देने में राजी हो गए ब्रिटिश सरकार को इस निर्णय से हारना पड़ा था। वहीँ इस आंदोलन का सशक्त नेतृत्व करने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल लोगो के बिच एक मशहूर व्यक्ति बन गए और बारडोली के सभी लोगो ने उन्हें सरदार का बिरुद देने पर राजी हो गए और उस ब्रिटिश सरकार को हारना पड़ा था। तो ईसी तरह वल्लभभाई पटेल को सरदार उनके नाम के आगे जुड़ने लगा।

निगम के अध्यक्ष से लेकर देश के पहले गृहमंत्री बनने का सफ़र (The First Home Minister of India)

सरदार वल्लभभाई पटेल की ख्याति लगातार बढ़ती ही जा रही थी, यही वजह है कि उन्होंने अहमदाबाद में हुए निगम के चुनावों में लगातार जीत हासिल की, आपको बता दें कि साल 1922, 1924 और 1927 में वे अहमदाबाद के निगम के अध्यक्ष के तौर पर चुने गए। वहीं साल 1931 में वल्लभभाई पटेल कांग्रेस के 36 वें अहमदाबाद अधिवेशन की स्वागत समिति के अध्यक्ष बनाए गए और वे गुजरात प्रदेश की कांग्रेस समिति के पहले अध्यक्ष के रुप में नियक्त हुए, जिसके बाद साल 1945 तक वे गुजरात के कांग्रेस के अध्यक्ष रहें। हालांकि इस दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

भारत की आजादी के बाद वे भारत के गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री बने। वैसे सरदार वल्लभभाई पटेल की ख्याति इतनी फैल गई थी कि वे प्रधानमंत्री पद के प्रथम दावेदार थे, लेकिन गांधी जी की वजह से उन्होंने खुद को इस दौड़ से दूर रखा और जवाहरलाल नहेरु को देश का प्रथम प्रथानमंत्री बनाया गया।

सरदार वल्लभभाई पटेल ने देसी रिसायतो को एकीकृत करने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका 

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स्वतंत्र इंडिया के गृहमंत्री बनने के बाद सरदार सबसे पहले भारत के अलग-अलग इलाक़ा के राजाओं को अपनी राजनीतिक पूर्वदृष्टि और बुद्दिमत्ता का उपयोग कर संगठित किया और भारतीय संघ के  565 रियासतों के राजाओं को यह याद दिलाया कि उनका अलग राज्य का सपना देखना मुमकिन नहीं है। जिसके बाद, भारत में विलय होने के लिए सभी राज्य तो राजी हो गए लेकिन  हैदराबाद के निजाम जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर के नवाबों ने भारत में अपने रियासतों के विलय से मना कर दिया था। जिसके बाद वल्लभभाई पटेल ने अपनी तीक्ष्णता और बुद्धिमानी के जोर पर सेना का उपयोग कर इन तीन स्टेट के राजाओं को अपनी रिायसतों को भारत में विघटन करने के लिए राजी कर लिया। इसी तरह सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारतीय संघ को बिना किसी लड़ाई-झगड़े के शांतिपूर्ण तरीके से एकीकृत किया, वहीं इस महान काम के लिए उन्हें लौहपुरुष की उपाधि दी गई।

सरदार पटेल और भारत का विभाजन (Sardar Patel and the Partition of India)

मुस्लिम लोगो के नेता मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में बढ़ते अलगाववादी आंदोलन ने स्वतंत्रता से ठीक पहले हिन्दू-मुस्लिम दंगों को हिंसात्मक रुप दिया था। जिस पर सरदार पटेल का मानना था कि स्वतंत्रता के बाद इस तरह के हिंसात्मक और संप्रदायिक दंगे। केन्द्र सरकार की कार्यक्षमता को कमजोर बना देगी जो कि लोकतांत्रिक राष्ट्र को मजबूत करने के लिए हानिकारक साबित होगा, इस मुश्केली का उपाय के लिए उन्होंने दिसंबर 1946 में एक सिविल वर्कर वी.पी मेनन के साथ वर्क किया और फिर विभाजन परिषद पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

सरदार वल्लभभाई पटेल की मृत्यु : साल 1950 में सरदार वल्लभभाई पटेल के स्वास्थ्य काफी खराब होने लगी, वहीं 2 नवंबर साल 1950 में उनकी तबीयत और इतनी बिगड़ गई कि वे बिस्तर से भी नहीं उठ पाते थे, इसके बाद 15 दिसंबर साल 1950 में हार्ट सरदार वल्लभभाई पटेल को अटैक आया जिसके चलके इस महान आत्मा का निधन हो गया।

सरदार वल्लभभाई पटेल को सम्मान : साल 1991 में मरणोपरांत उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। वहीं उनके जन्मदिन 31 अक्टूबर को साल 2014 में राष्ट्रीय एकता दिवस के रुप में घोषित कर दिया गया। इसके अलावा भारत सरकार के द्धारा 31 ऑक्टूबर 1965 को, सरदार पटेल के स्मारक के रुप में डाक टिकट को भी जारी किया गया। यही नहीं उनके नाम पर कई शिक्षण संस्थान, हॉस्पिटल और हवाईअड्डा का नाम रखा गया।

  • सरदार वल्लभभाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, वासद
  • स्मारक सरदार पटेल मेमोरियल ट्रस्ट
  • सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय स्मारक, अहमदाबाद
  • सरदार सरोवर बांध, गुजरात
  • सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अहमदाबाद
  • सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम, अहमदाबाद
  • सरदार वल्लभभाई पटेल खेती और तकनीकी विश्वविद्यालय , मेरठ
  • सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान सूरत
  • सरदार पटेल विश्वविद्यालय, गुजरात
  • सरदार पटेल विद्यालय

सरदार वल्लभभाई पटेल के विचार और वचन 

  • “आपकी वांछनीयता आपके मार्ग मे अवरोध है, इसलिये अपनी आँखों को क्रोध से लाल होने दिजिये और अन्याय का सामना खुदके मजबूत हाथो के साथ कीजीये।”
  • “जीवन मे सबकुछ एक दिन मे नही हो जाता है।”
  • “अविश्वास भय का कारण होता है।”
  • “कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ती सदैव आशावान रहता है।”
  • “दुश्मन का लोहा भलेही गर्म हो जाये, पर हथौडा तो ठंडा रखकर ही काम दे सकता है।”
  • “सुख और दुख मन के कारण ही पैदा होते है और वे मात्र कागज के गोले है।”
  • “लद्धड़पन छोडिये और आप बेकार मत बैठीए क्योंकी हर समय काम करनेवाला व्यक्ति अपनी इंद्रियो को आसानी से वश मे कर लेता है।”
  • “गरीबो की सेवा करना ही ईश्वर की सेवा है।”
  • “स्वतंत्रता प्राप्ती करलेने के बाद भी यदि अगर अधीनीकरण की दुर्गंध आती रहे, तो स्वतंत्रता की सुगंध नही फैल सकती।”
  • “व्यक्ति को अपना अपमान सहने की कला को आना चाहिये।”
  • “शक्ती के कमी मे विश्वास निष्प्रयोजन है। विश्वास और शक्ती, दोनो किसी महान कार्य को करने के लिये अनिवार्य है।”
  • “संस्कृती समझ बुझकर शांती पे रची गई है। यदि मरना होगा, तो वे अपने पापो से मरेंगे।जो काम प्रेम और शांती से होता है,वह वैर भाव से नही होता है।”
  • “अधिकार मनुष्य को तब तक अंधा बनाये रखेंगे, जब तक मनुष्य उस अधिकार को प्राप्त करने हेतू बहुमूल्यता ना चुका दे।”
  • “इस भारत की मिट्टी मे कुछ अनूठा है, जो कई मुश्केलियो के बावजुद हमेशा महान आत्माओ का निवास रहा है।”
  • “जब सब लोग एक हो जाते है,तब उसके सामने निर्दय से निर्दय शासन भी नही टिक सकता है इस कारण से जात-पात तथा ऊँच-नीच के भेदभाव को भुलाकर सब लोग एक हो जाये।”

एक नजर में सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी (Biography of Sardar Vallabhbhai Patel at a Glance)

  • 1913 में लंडन से बेरीस्टरकी डिग्री संपादन करके सरदार पटेल भारत वापिस आये।
  • 1916 में लखनऊ (Lakhnau) में राष्ट्रिय कोंग्रेस के बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल ने गुजरात का प्रतिनिधित्व किया।
  • 1917 में सरदार पटेल  गुजरात के अहमदाबाद में नगरपालिका में चुनकर आये।
  • 1917 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने खेडा सत्याग्रह में हिस्सा लिया, साराबंदी आन्दोलन किया, सभी टेक्स वापिस लिए और सरकार को जुकना पड़ा, 1918 में खेडूतो ने विजयोत्सव मनाया और उस समय गाँधी जी को बुलाके वल्लभभाई पटेल को मानपात्र दिया गया।
  • 1919 को वल्लभभाई पटेल ने रौलेट एक्ट के विरोध अहमदाबाद में बहोत बड़ा मोर्चा निकला।
  • 1920 में गाँधी जी ने असहकार आन्दोलन शुरू किया, इस असहकार आंदोलन में वल्लभभाई पटेल ने अपना पूरा जीवन देश के नाम अर्पण कर दिया, और पटेल को महीनेकी हजारो रुपिए मिलने वाली वकिली जॉब को वल्लभभाई ने छोड़ दिया।
  •  1921 में गुजरात स्थानिय कोंग्रेस कमिटी के अध्यक्ष स्थान में वल्लभभाई पटेल को चुना गया।
  • 19 23 में अंग्रेज सरकार ने तिरंगा पर बंदी का कानून किया फिर अलग-अलग जगह से हजारो की मात्रा में सत्याग्रही नागपुर में जमा हुए, साड़ेतिन महीने पूरी जोशो शोर् के साथ उन्होंने लड़ाई शुरू हुई, अंग्रेज सरकार ने इस लड़ाई को रोकने के लिए सभी तरह की नामुमकिन कोशिश की।
  • 1928 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने नेतृत्व में खेडुतो के लिए साराबंदी आंदोलन शुरू किया।
  • 1931 में कराची में हुई राष्ट्रीय कोंग्रेस के सेशन के अध्यक्ष स्थान पर सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
  • 1942 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लेने की वजह से जेल जाना पड़ा।
  • 1946 को स्थापित हुए मध्यवर्ती अभिनय मंत्री मंडल में वल्लभभाई पटेल गृहमंत्री थे, पटेल घटना समिति के सदस्य भी थे।
  • 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, आजाद भारत के बाद पहले मंत्रिमंडल में सरदार वल्लभभाई पटेल उपपंतप्रधान (Deputy Vice President) का स्थान मिला।
  • सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद लगभग 600 संसथान का भारत में विलिकरण किया था, हैदराबाद संस्थान भी वल्लभभाई की पुलिस एक्शन की वजह से 17 सितंबर 1948 को भारत में विलीन हुवा।

सरदार वल्लभभाई पटेल पर आधारित फिल्मे (Sardar Vallabhbhai Patel Film)

वर्ष 1993 में, सरदार वल्लभभाई पटेल की बायोपिक फिल्म ‘सरदार’ आई थी, जिसके केतन मेहता ने डायरेक्ट किया था, इस फिल्मे अभनेता परेश रावल ने सरदार पटेल का पात्र निभाया था।

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity)

लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के स्मृतिपत्र के रूप में दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ति स्टेचू ऑफ यूनिटी बनाई गई। इस मूर्ति की ऊंचाई करीबन 182 मीटर है। इस मुर्तिको साल 2013 में सरदार पटेल की जयंती पर भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा रखी गई थी। नरेन्द्र मोदी द्वारा ही साल 2018 में दुनिया की सबसे बड़ी और ऊँची सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति का उद्घाटन भी किया गया था। तो इस तरह सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, भारत के लिए ऐसे महान वीर पुत्र का जन्म लेना गौरव पूर्ण है।

Last Final Word:

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दोस्तों हमने आपको सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय और सरदार वल्लभभाई पटेल का प्रारंभिक जीवन, सरदार वल्लभभाई पटेल के सबंध, और उनकी मृत्यु का कारण एवं उनकी जीवन शैली बारे में इस आर्टिकल के जरिये बताया। हम यह आशा करते है की सरदार वल्लभभाई पटेल से जुडी सारी जानकारी से आप वाकिफ हो चुके होंगे।

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