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प्राइवेट और पब्लिक लिमिटेड कंपनी में क्या अंतर होता है?

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दोस्तों,आप ने देखा होगा विश्व में कई कंपनीया है, उस कंपनीओ में कई कंपनी पब्लिक लिमिटेड या प्राइवेट लिमिटेड होगी। आप के भीतर यह प्रश्न हो रहा होगा की पब्लिक और प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में अंतर क्या होगा? आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़े क्युकी हम इस आर्टिकल बताने वाले है की प्राइवेट और पब्लिक लिमिटेड कंपनी में क्या अंतर होता है?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की परिभाषा (Definition of private limited company)

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी एक सयुक्त स्टॉक कंपनी है, जो भारतीय कंपनी 2013 के अधिनियम या किसी अन्य पिछले अधिनियम के तहत स्थापित की गई होगी।

प्राइवेट कंपनी के सदस्यों की न्यूनतम संख्या एक से ज्यादा होनी चाहिए और अधिकतम संख्या 200 तय की गई है। यह एक एसा संघ होता है जो लोग अपनी इच्छा से बनाना पसंद करते है। इस में लोग आते है जिनकी न्यूनतम पैड-उप पूंजी रु. 1,00,000 तक की होती है।

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प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां अपने शेयर किसी को भी बेच नहीं सकती है। जिन कंपनियो में यह सारे गुण देखने मिलते है उसके नाम के आखिर में प्राइवेट लिमिटेड लगाना होता है।

पब्लिक लिमिटेड कंपनी की परिभाषा (Definition of public limited company)

कोई भी पब्लिक लिमिटेड कंपनी सरकार के आदेशो से चलती है, इस में सरकार और शेयरधारको की मलिकी होती है। इस कंपनी की शुरुआत करने के लिए कम से कम 7 सदस्यों की जरूरत होती है। इसमें वो लोग ही आते है जिनकी न्यूनतम पैड-उप पूंजी रु. 5,00,000 तक की होती है। इस प्रकार की कंपनी को अपने शेयर बेचने के लिए कोई रोक नहीं होती। कंपनी के नाम के साथ “पब्लिक लिमिटेड” या “लिमिटेड” लगा सकती है। इस की एक महत्वपूर्ण बात यह है की एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी ही एक लिमिटेड कंपनी होती है।

प्राइवेट और पब्लिक लिमिटेड कम्पनी में क्या अंतर है? (What is the difference between Private Limited and Public Limited Company)

  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में एक से अधिक सदस्यों का होना आवश्यक होता है और पब्लिक लिमिटेड कंपनी के लिए 6 से अधिक सदस्यों का होना आवश्यक होता है।
  • प्राइवेट लिमिटेड के लिए न्यूनतम पैड-उप पूंजी रु. 1 लाख है और पब्लिक लिमिटेड के न्यूनतम पैड-उप पूंजी रु. 5 लाख तक होनी चाहिए।
  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी अपने शेयर बेच सकती नहीं है लेकिन पब्लिक लिमिटेड कंपनी अपने शेयर बेच सकती है।
  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कर्मचारियों की संख्या 200 नहीं होनी चाहिए जबकि पब्लिक लिमिटेड कंपनी में इसकी कोई सीमा तय नहीं की गई है।
  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी एक एसी कंपनी है जो स्टॉक एक्सचेंज में सूचिबद्ध नहीं रहती है जिसके कारण इनका मालिकाना हक़ इसके मालिकों के पास रहता है जबकि पब्लिक लिमिटेड कंपनी एक एसी कंपनी होती है जो की एक मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सुचिबुद्ध रहती है और ये सार्वजनिक रूप से अपना बिजनेस चलाती है।
  • प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड की अपेक्षा छोटी कंपनी होती है और उसके नाणाकिय स्त्रोत भी बहुत कम है।
  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को कम से कम दो निर्देशक रखने जरूरी होते है और पब्लिक लिमिटेड कंपनी को कम से कम तिन निर्देशक रखने जरूरी होते है।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी के किसी भी मामले में सदस्यों की एक जनरल मीटिंग बुलाना जरूरी होता है और वही प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में एसी कोई मीटिंग की आवश्यकता नहीं होती है।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी के लिए प्रोस्पेक्टस को जारी करना या उस पर बयान देना अनिवार्य होता है, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मामले में एसा प्रावधान नहीं होता है।
  • कोई भी पब्लिक लिमिटेड कंपनी से मिलने वाला लाभ सरकार और उस कंपनी के शेयर धारको को मिलता है, जबकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से प्राप्त होने वाला लाभ उस कंपनी के निजी लोगों को मिलता है।
Last Final Word

प्राइवे और पब्लिक लिमिटेड कंपनी में क्याअंतर होता है? यह आर्टिकल के माध्यम से हमने बताया की प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड कंपनी क्या है? और इनमें अंतर क्या है? अगर आपको इस आर्टिकल से जुड़ा कोई भी प्रश्न हो, आप हमें कमेंट बॉक्स में बता सकते है।

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