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पोखरण परमाणु परीक्षण का इतिहास

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भारत देश की आज़ादी के बाद लगातार हमारे देश का यह प्रयास रहा है, की भारत देश सैन्य दल की द्रष्टि से एक महान शक्तिशाली देश के रूप में विकासशील देश हो जाए। भारत देश सैन्य दल की द्रष्टि में देखा जाये तो कई देशों पासके परमाणु शक्ति के दौरान समृद्ध हो जाने के बाद भी भारत ने कई वर्षो तक निशस्त्रीकरण (बेहथियारबंदी) की दिशा में आपना उल्लेखनीय प्रयास किया हैं। परंतु आप लोग तो जानते ही है, की भारत देश के प्रति आक्रामक भाव रखने वाले दो पडोशी देश जो पाकिस्तान और चीन हैं, पाकिस्तान और चीन के ईसी परमाणु परीक्षण को देखते हुए भारत ने भी परमाणु परीक्षण की दिशा में अपने प्रयास की शरुआत कर दी थी। हमारे भारत देश का गौरव, आत्मसम्मान और वैभवशाली विरासत (उत्तराधिकार) की रक्षा, और हमारे देशवासियों की सुरक्षा के लिए भाव जागृत करने तथा लगातार प्रगति की दिशा में सबसे आगे रहने के ईसी उदेश्य से किये गए कई प्रयास और उस प्रयास के फलस्वरूप आज हमारा भारत देश विश्व की छठ वीं परमाणु शक्ति बनाकर एक शक्तिशाली देश के रूप में प्रफुल्लित होंके सामने आया हैं। दुनिया में सबसे पहेले से हीं इंग्लेंड, चीन, रूस, अमेरिका और फ़्रांस यह 5 बहु मूल्य देश थे।

भारत परमाणु परीक्षण पर सरकार की निति (Government Policy on Nuclear Testing)

भारत देश में वर्ष 1998 के साल में भाजपा और उसके सहकार योगी दलों की सरकार बनी। चीन देश ने वर्ष 1964 के साल में परमाणु परीक्षण किया था और यह परीक्षण करने बाद भाजपा सरकार ने देश को परमाणु शक्ति हासिल करने के लिए पक्षधर (वह जो किसी पक्ष या किसी सिद्धांत आदि का समर्थन या पोषण करे) की थी। ईसी दौरान राज्यसभा में हमारे भारत देश के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई ने एक बात बोली थी की “परमाणु बम का जवाब परमाणु बम हीं है उससे कम कुछ भी नहीं“।

भाजपा सरकार ने अपनी विचारधारा के अनुसार केंद्र में खुदकी सत्ता मिलने के बाद हीं तुरंत भारत में परमाणु परीक्षण के लक्ष्य हेतु दृढ़-संकल्प लिया था और बादमें 18 अप्रैल 1998 के तहत देश के दो वैज्ञानिक श्री आर चिंदबरम और डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम साहेब ने पोखरण में परमाणु परीक्षण करने की अनुमति हासिल कर ली थी।

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भारत का परमाणु पोखरण विस्फोट सिलसिला (India’s Nuclear Pokhran Blast Series)

भारत देश के राजस्थान राज्य में 11 मई 1998 के वर्ष में दोपहर तिन बजकर 45 मिनिट पर पोखरण के प्रयोग से जलताहुआ रेगिस्तान में एक के बाद एक ऐसे तिन विस्फोटों से पूरा रेगिस्तान कांप उठा था। यह तीनो विस्फोटों की क्षमता 55 किलों टन थी और टी.एन.टी विस्फोट के बराबर हीं थी। इस परमाणु शक्ति के ओपरेशन का नाम ‘ऑपरेशन शक्ति’ रखा गया था। इस बहुमूल्य ओपरेशन ‘शक्ति’ से भारत देश के परमाणु परीक्षण की सफलता के बाद हमारे भारत देश के तब के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सब को यह गर्व से कहा था की भारत देश परमाणु शक्ति समृद्धि भरा राष्ट्र बन गया हैं।

हमारे देश के परमाणु उर्जा के अध्यक्ष श्री आर चिंदबरम और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान के प्रमुख अब्दुल कलाम को सभी ने विशेष रूप से बधाई दी थी। क्योकिं हम आपको बता दे की यह दोनों महान पुरुष के लिए हमारा भारत देश एक इतिहासक सफलता प्राप्त कर पाया है।

11 मई 1998 के तरह जो परमाणु परीक्षण विस्फोट किया था उसके विरोध में कई देशो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे रोक ने की कठिन से कठिन प्रतिक्रिया की थी और अनेक राष्ट्रों ने तो भारत पर पूर्व प्रतिबंध लगाने की धामिया भी देने लगे थे। भारत देश ने इन सभी धमकियों को नजर अंदाज करते हुए उनके तुरंत दो दिन बाद हीं 13 मई 1998 में राजस्थान के पोखरण विस्तार में हीं दो परमाणु विस्फोट का एक्सपेरिमेंट कर डालें। भारत ने इन दो हीं परीक्षणों के साथ, हमारे देश ने भूमिगत परमाणु परीक्षणों की निर्धारित श्रृंखला को पूरा किया।

इस तरह दुनिया भर में सारे विरोध और संभावित प्रतिबंधों का जोखिम उठाने के बावजूद हमारे देश भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षणों की एक श्रृंखला पूरी की और देश के परमाणु कार्यक्रम की दिशा में ऐतिहासिक सफलता हासिल की। पहले परमाणु परीक्षण के चौबीस साल बाद, भारत ने छठे परमाणु संपन्न देश का दर्जा प्राप्त किया।

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पाकिस्तान द्वारा परमाणु विस्फोट (Nuclear Blast by Pakistan)

हमारे इस परमाणु परीक्षण के करीबन दो सप्ताह के तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने 28 मई और 30 मई 1998 को क्रम के दौरान पांच और एक परमाणु परीक्षण कर डालें थे।

परमाणु विस्फोट संबंधी अंतर्राष्ट्रीय एवं भारतीय प्रतिक्रिया (International and Indian Response to Nuclear Explosion)

भारत द्वारा परमाणु परीक्षण करने के तुरंत बाद विश्व समुदाय (world community) ने सख्त से सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त (reacted) करते हुए उसका विरोध जोरो शोरो से प्रदर्शित किया था। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत के इस कदम पर गहरा गुस्सा जाहिर किया और भारत के खिलाफ कड़ा से कड़ा आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि भारत को भविष्य में और अधिक से अधिक परमाणु परीक्षण और किसी भी तरह की शर्त नहीं होनी चाहिए और सी.टी.बी.टी. की भरती होनी चाहिए। जर्मनी, जापान, हॉलैंड, नॉर्वे और डेनमार्क ने भी अपनी वित्तीय सहायता बंद कर दी थी। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने भी भविष्य में किसी भी तरह की सहायता देने से बिलकुल इनकार कर दिया। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड की सरकारों ने भारत से अपने राजदूतों को बुलाया। इन सबके विपरीत ब्रिटेन और फ्रांस ने भारत के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया था। इजरायल ने भारत के परमाणु परीक्षण की निंदा नहीं की और कहा कि सभी देश को सी.टी.बी.टी. (परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि) हैं।
अंतर्राष्ट्रीय आलोचना और निंदा के विपरीत, भारतीय जनता ने परमाणु परीक्षण पर खुशी व्यक्त की और भारत सरकार के इस प्रयास की हर राजनीतिक दल ने इसकी सराहना (मूल्यांकन करना) की।

परमाणु परीक्षण बाद लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध (US Sanctions Imposed After Nuclear Test)

अमेरिका द्वारा भारत के खिलाफ 2.5 अरब डॉलर के प्रतिबंध लगाए गए थे। साथ ही पुराने सौदों के तहत खरीदे गए उपकरणों की आपूर्ति और सैन्य सामग्री की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई थी. शिक्षा और सामान्य उपयोग की प्रौद्योगिकी के निर्यात के क्षेत्र में भी कई प्रतिबंध लगाए गए थे।

परमाणु विस्फोटी संबंधी भारत सरकार का दृष्टिकोण (Government of India’s view on Nuclear Explosives)

दुनिया के अलग-अलग देशों की प्रतिक्रियाओं और प्रतिबंधों से विचलित हुए बिना, भारत में परमाणु परीक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों को देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से उपयुक्त और आवश्यक घोषित किया गया था। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने विभिन्न देशों की सरकारों को पत्र लिखकर उनका सहयोग प्राप्त करने का प्रयास किया। उनके अनुसार यह प्रशिक्षण शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया गया था।

भारत की सीमा से लगे चीन-पाकिस्तान दोनों ही भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण हैं। इन देशों से खुद को सुरक्षित रखने और किसी भी परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के दबाव से मुक्त रखने के लिए भारत का परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र होना आवश्यक है। भारतीय जनता को भय से मुक्त करने और देश को सुरक्षित वातावरण में आगे बढ़ाने तथा देश में स्वाभिमान, आत्म-विश्वास और स्वाभिमान की भावना जगाने का यह एक सही प्रयास था।

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परमाणु हथियारों का विनाश असम्भव (Nuclear Weapons Impossible to Destroy)

आज दुनिया में करीब 60,000 परमाणु हथियार हैं, जिन्हें नष्ट होने में कम से कम 20 से 25 साल लगेंगे। निरस्त्रीकरण (बेहथियारबंदी) के परिणामस्वरूप (the resulting) केवल 10,000 परमाणु हथियार नष्ट किए जा सके। इससे साफ है कि परमाणु हथियारों का खतरा बना रहेगा। इसलिए भारत ने अपनी आत्मरक्षा के लिए यह प्रयास किया है।

अमेरिका और चीन जैसे देशो के पास हाइड्रोजन विस्फोटक बम प्राप्त हो गए तो इन देशो ने एक जूठ होकर दुनिया भर में अपनी दादागिरी को बढ़ावा देना शुरू कर दिया था और दुसरे सभी देशों के द्वारा शरु किये गये परमाणु कार्यक्रमों का विरुद्ध करना शुरू कर दिया था।

चीन ने भारत पर भव्यता दिखानी शुरू कर दी, और जिससे भारत पर भी हाइड्रोजन बम बनाने का दबाव किया गया था। इसके बाद भारत ने गुप्त मिशन के तहत परमाणु बम बनाना शुरू किया और 11 मई 1998 को अटल विहारी वाजपेयी की सरकार में हाइड्रोजन बम का सफल परीक्षण किया। भारत सरकार ने इस टेस्ट के बारे में किसी देश को पता भी नहीं चलने दिया और जैसे ही टेस्ट हुआ तो पूरी की पूरी दुनिया में कोहराम (हंगामा) मच गया।

उस समय भारत की भी उसी तरह टीका-टिप्पणी हो रही थी जिस तरह आज के दौर में उत्तर कोरिया की टीका-टिप्पणी हो रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भारत पर तमाम तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जिसका खामियाजा अटल बिहारी वाजपेयी को उठाना पड़ा और भारत के आर्थिक विकास को बहुत नुकसान हुआ, लेकिन इसका फायदा यह हुआ कि चीन ने हमें भव्यता दिखाना बंद कर दिया। आज भारत चीन से तेज गति से विकास कर रहा है।

भारत के अलावा, पाकिस्तान और इज़राइल भी हाइड्रोजन बम होने का दावा करते हैं, लेकिन इज़राइल ने आज तक किसी भी परमाणु बम का परीक्षण नहीं किया है, और पाकिस्तान के परीक्षण में वह बढ़त नहीं थी जो एक हाइड्रोजन बम में होनी चाहिए।

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Last Final Word:

हाल ही में 1998 के परमाणु परीक्षण पर एक फिल्म भी बनी है, ‘परमाणु द स्टोरी ऑफ पोखरण‘। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पोखरण-2 के महत्व को दर्शाता है। इस परमाणु विस्फोट ने भारत को दुनिया में एक परमाणु संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थापित कर दिया। महान वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने कहा था कि ‘सपने वो नहीं होते जो सोते समय देखे जाते हैं, बल्कि सपने वो होते हैं, जो इंसान को सोने नहीं देते‘। डॉ. कलाम के नेतृत्व में भारत ने अपना दूसरा परमाणु परीक्षण किया। अपने वैज्ञानिकों की दक्षता और कड़ी मेहनत के कारण आज भारत की गिनती परमाणु शक्ति संपन्न देशों की जाती है। और आपको बता दें की, भारत की परमाणु शक्ति किसी देश के लिए खतरा नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए है, जिसका इस्तेमाल शायद ही कभी किया जाता है। लेकिन परमाणु बम बनाकर भारत ने यह जरूर साबित किया है, कि वह किसी भी देश से कम नहीं है।

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