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मौर्य साम्राज्य के पूर्व विदेशी आक्रमण

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दोस्तों भारत पर कई सारे साम्राज्य ने अपना शासन स्थापित किया था। आज के इस आर्टिकल में हम ऐसे ही एक साम्राज्य के बारे में बात करेंगे।  मौर्य साम्राज्य भारत के इतिहास का शक्तिशाली और बड़ा साम्राज्य रहा है। मौर्य साम्राज्य ने अपनी ताकत से भारत के इतिहास में अपना नाम अमर किया है। आज के इस आर्टिकल में हम मौर्य साम्राज्य के पूर्व विदेशी आक्रमण के बारे मे जानकारी प्राप्त करेंगे।

भारतीय उपमहाद्वीप पर दो मुख्य विदेशी आक्रमण हुए थे हैं। पहला आक्रमण 518 ईसा पूर्व में हुआ था। इस आक्रमण को ईरानी आक्रमण के नाम से जाना जाता है। दुसरा आक्रमण 326 ईसा पुर्व में हुआ था। जिसे मकदुनियाई आक्रमण के नाम से जाना जाता है। इन दोनों आक्रमण की वजह से ईरानी व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिला था। ईरानी लिखको ने खरोष्टी लीपी का प्रारंभ किया, जिसे बाद में अशोक ने अपने शिलालेखों में इस्तेमाल किया था। खरोष्ठी लिपि में अरबी की तरह दांये से लेकर बांये तरफ लिखा जाता है।

ईरानी आक्रमण

मगध के साम्राज्य में भारत के पूर्वी विस्तार के छोटे छोटे गणराज्य और रियासतों को शामिल कर लिया गया। परंतु उत्तर और पश्चिम भारत के विस्तार को विदेशी आक्रमण से बचाने के लिए कोई भी साम्राज्य मजबूत नहीं था। भारत का उत्तर पश्चिम क्षेत्र धनवान भी था और इस क्षेत्र मे हिंदू कुश के माध्यम से सरलता से प्रवेश किया जा सकता था।

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अर्कमेनियन शासक डारियस प्रथम ने 518 ईसा पुर्व में भारत के उत्तर पश्चिम विस्तार पर आक्रमण किया था। इस क्षेत्र की राजनीति एकता के अभाव के कारण उन्होंने पंजाब पर भी आक्रमण कर दिया।

ईरानी आक्रमण के प्रभाव

  • ईरानी आक्रमण की वजह से इंडो ईरानी व्यापार और वाणिज्य मे
  • विकास हुआ था।
  • ईरानियों के द्वारा भारत में एक नई लेखन लिपि का प्रारंभ किया गया था। जिसे खरोष्ठी के नाम से जाना जाता था।
  • मकदुनियाई का आक्रमण:
  • सिकंदर 20 साल की उम्र में मैसेडोनिया के सिंहासन पर बैठा था। सिकंदर ने विश्व विजेता बनने का सपना देखा था। उसने 326 ईसा पूर्व मैं भारत पर आक्रमण करने से पहले अन्य कई सारे क्षेत्र पर अपना कब्जा जमा लिया था। अम्भी जो तक्षशिला के शासक थे और अभीसार ने उसके सामने आत्मसमर्पण कर लिया था। परंतु पंजाब के शासक ने आत्मसमर्पण करने से इंकार कर दिया था।
  • सिकंदर और पोरस की सेना के बीच में झेलम नदी के निकट के विस्तार में युद्ध हुआ था। इस युद्ध को हेडास्पेस युद्ध कहा जाता है। इस युद्ध में सिकंदर विजयी बना था। हालांकि सिकंदर की यह जीत भारत में उसकी अंतिम बड़ी जीत साबित हुई। क्योंकि उसकी सेना ने आगे जाकर युद्ध करने के लिए मना कर दिया था। सिकंदर की सेना उसके अभियान के साथ जाने से काफी थक गई थी। और वे सब अपने घर लौटना चाहते थे।
  • अपना शासन स्थापित किए हुए विस्तार के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्था करने के बाद सिकंदर 325 ईसा पूर्व में वापस लौट गया। सिकंदर की मृत्यु 33 वर्ष की आयु में बेबीलोन में हुई थी।

मकदुनियाई आक्रमण के प्रभाव

  • इस आक्रमण के बाद से भारत में राजनीतिक एकता की जरूरत का अंदाजा मिल गया था जिसकी वजह से चंद्रगुप्त मौर्य और उसके साम्राज्य में राजनीतिक एकता का उदय हुआ। उन्होंने अपने शासन के दौरान भारत को एकजुट करने का प्रयास किया था।
  • इस आक्रमण के फल स्वरुप भारत में इंडो बैक्टेरियन और इंडो पर्थिनयन राज्य स्थापित किए गए। जिसके कारण भारत में वास्तुकला, सिक्कों और खगोल विज्ञान को उत्तेजना मिली।
Last Final Word

यह थी मौर्य साम्राज्य के पूर्व विदेशी आक्रमण के बारे में जानकारी। हम उम्मीद करते हैं कि हमारी जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि आपके मन में कोई सवाल हो गया हो तो हमें कमेंट के माध्यम से अवश्य बताइए।

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