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कुषाण वंश के महान राजा कनिष्क

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इस आर्टिकल में हम कुषाण वंश के महान राजा कनिष्क के बारे में जानेंगे। कनिष्क को भारत का एक महान सम्राट माना गया है जिसे भारत में बौद्ध धर्म के विस्तार के लिए तथा अपने साम्राज्य को चीन की सीमाओं तक बढ़ाने के लिए जाना जाता है। किस आर्टिकल में कनिष्ठ के बारे में तथा कुषाण वंश के साम्राज्य के बारे में जानकारी दी गई है। कृपया इस आर्टिकल को पूरा पढ़े ताकि आपको इस विषय पर पूरी जानकारी मिल सके।

महान राजा कनिष्क को कनिष्क प्रथम के नाम से भी जाना जाता है। कनिष्क कुषाण वंश का राजा था जिसे कनिष्क महान के नाम से भी जाना जाता है। कनिष्क का साम्राज्य बैक्त्रिया से लेकर आज के पटना तक फैला हुआ था। उसके साम्राज्य की राजधानी गांधार थी। कनिष्क के राज्य में से होकर ही सिल्क मार्ग निकलता था। कुषाण वंश के सभी शासकों में गणेश गाना एक महान शासक की तरह लिया जाता है। वह आध्यात्मिक राजनीतिक तथा सैन्य की दृष्टि में श्रेष्ठ माना गया है।

कुषाण भारत के मूलनिवासी नहीं थे परंतु इतिहास में उन्होंने भारत पर भी राज किया था। उनका राज्य भारत के साथ-साथ चीन तक भी फैला हुआ था। कुषाण राजवंश ने चीन की पश्चिम की तरफ आए हुए रेशम मार्ग पर भी अपना कब्जा किया हुआ था।

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महान राजा कनिष्क को भारत और एशिया के इतिहास में कला प्रेमी, धार्मिक प्रवृत्तियों में रुचि रखने वाला तथा साहित्य प्रेमी राजा के रूप में जाना जाता है।

कुषाण वंश

  • कुषाण मूल भारत के निवासी नहीं थे । भारत में कुषाण चीन से आए थे। भारत में कुषाण साम्राज्य की स्थापना कुजुल कड़फिसस या कडफिसस ने की थी। कड़फिसस ने लगभग 15 से 65 ईसवी तक शासन किया था।
  • कुषाण दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में पश्चिमी में निवास करते थे। कुषाण असल में मध्य एशिया में रहने वाली यू-ची जाति की एक शाखा थी। कुषाण भी यवन, शक, और पहलव की तरह मौर्य काल के बाद भारत में आने वाली प्रमुख विदेशी जातियों में से एक थी।
  • इसी कुषाण वंश में लगभग 78 ईसवी के करीबन कनिष्क ने साम्राज्य संभाला और कुषाण वंश का पहला शक्तिशाली शासक बना। कनिष्क के शासन काल के दरमियान कुषाण वंश के साम्राज्य का काफी विस्तार हुआ।
  • कुषाण वंश ने उतर हिंदुस्तान में शकों और पहलवो को हराकर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की थी। कुषणो ने अपना साम्राज्य मध्य एशिया तथा भारत के उत्तरी भाग में फैलाया था।

महान राजा कनिष्क का साम्राज्य

  • कनिष्क के शासनकाल में कुषाण साम्राज्य ने व्यापार तथा वाणिज्य में काफी विकास किया था। कनिष्क के शासन काल के दौरान कुषाण साम्राज्य प्रगति के मार्ग पर चल रहा था। और इसका मुख्य कारण कुषाण वंश का रेशम मार्ग पर कब्जा होना था। पूर्व से पश्चिम की तरफ होने वाला है ज्यादातर व्यापार इसी मार्ग से होता था तथा यह मार्ग कनिष्क के साम्राज्य से होकर ही गुजरता था। चीन से आने वाले लगभग सभी व्यापारी इसी रेशम मार्ग से होकर ही गुजरते थे।
  • कुषाण साम्राज्य हिंदुस्तान के उत्तर उत्तर में काफी आगे तक फैला हुआ था। उनका कब्जा तजाकिस्तान और चीन की तरफ आने वाले हिंदुकुश पहाड़ियों तक था। तथा उन्होंने पूर्व में पामीर तक अपना साम्राज्य फैलाया था। यही से गुजरने वाला मार्ग चीन को पश्चिम की ओर जोड़ता था। इस कारणवश चीन से आने वाले लगभग सभी व्यापारी काफिले इसी मार्ग से होकर गुजरते थे, इस वजह से यह क्षेत्र व्यापारिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण था।
  • कई ऐतिहासिक दस्तावेजों दस्तावेजों से मालूम पड़ता है कनिष्का साम्राज्य भारत के पश्चिम में बंगाल तक तथा नेपाल तक फैला हुआ था।
  • कल्हण की रचना राजतरंगिणी सही है मालूम पड़ता है कि कनिष्क ने अपने साम्राज्य को उत्तर पश्चिम हिंदुस्तान में अरब सागर से लेकर सिंध तथा आज के गाने स्थान तथा पाकिस्तान तक विस्तृत किया था।
  • कनिष्क उत्तर भारत के अलावा चीन के कुछ क्षेत्रों को जीतने वाला प्रथम सम्राट था।
  • कहा जाता है कि कनिष्क चीन के शासक की पुत्री से विवाह करना चाहता था। इसके लिए उसने चीन के सम्राट के सामने विवाह का प्रस्ताव भी रखा था परंतु चीन के सम्राट विवाह प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इस कारणवश कनिष्क ने क्रोधित होकर चीन पर आक्रमण कर दिया था। इस आक्रमण में कनिष्क को हार का सामना करना पड़ा था परंतु कनिष्क ने चीन पर दूसरी बार आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में ले लिया था।
  • चीन पर आक्रमण कर कर उसे अपने कब्जे में लेने के बावजूद कनिष्क वहां ज्यादा समय तक अपना साम्राज्य स्थापित नहीं कर सका था।

महान राजा कनिष्क और बौद्ध धर्म

  • बौद्ध धर्म में कनिष्क को बहुत ही महत्व दिया जाता है। कनिष्क ने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार और संरक्षण के लिए बहुत कार्य किया था। कनिष्क बौद्ध धर्म में विश्वास रखने के साथ-साथ बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का पालन तथा प्रोत्साहन भी करता था।
  • कनिष्क ने अपने राज्य काल में भगवान बुद्ध के 32 भौतिक चिन्हों पर आधारित चित्र बनवाए थे।
  • कनिष्क का बौद्ध वास्तु कला में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा था। इस क्षेत्र में उस का सबसे बड़ा योगदान आज के पेशावर न्याय पुरुषपूरा में बनवाया गया कनिष्क स्तूप हे।
  • कनिष्क ने अपने राज्य काल में भगवान बुद्ध की प्रतिमा वाले सिक्के भी बनवाए थे जो आज के समय में बहुत ही दुर्लभ माने जाते हैं।
  • कनिष्क के द्वारा बनाए गए सिक्कों में बई ओर सूर्य देव खड़े हे जिसमें उनके बाएं हाथ में बंद है तथा कमर पर तलवार लटकी हुई देखने को मिलती है। इन सिक्कों में सूर्य देव ईरानी वेशभूषा में पाए जाते हैं जिसमें उन्होंने लंबा कोर्ट पहना हुआ है तथा उनकी लंबी दाढ़ी है और उनके कंधों से ज्वाला निकलती हुई दिखाई गई है। इन सिक्कों में उन्हें बलि देते हुए दिखाया जाता है।
Last Final Word

तो यह थी कुषाण वंश के महान राजा कनिष्क के बारे में जानकारी तथा उसने कैसे कुषाण वंश के साम्राज्य का विस्तार किया था और भारत में बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया था। हमें आशा है कि इस आर्टिकल में दी गई जानकारी आपकी इस विषय में जानकारी को बढ़ाएगी। अगर आपको इस आर्टिकल से संबंधित कोई भी सवाल या परेशानी है तो हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।

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