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काजीरंगा नेशनल पार्क

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नमस्कार दोस्तों आज के इस महत्वपूर्ण आर्टिकल में हम आप से बात करने वाले है काजीरंगा नेशनल पार्क के बारे मे और आपको पता होगा की हमारे भारत देश में कई तरह के और अलग-अलग राज्य में राष्ट्रीय उद्यान उपस्थित है। तो उनमे से ही एक प्रख्यात और हमारे भारत देश का नामचीन उद्यानों में से एक काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान है। जिसके बारे में हम आपसे बात करने वाले है और इस उद्यान की अधिक से अधिक जानकारी आप तक पहोचाने वाले है तो चलिये शरु करते है काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान के बारे में।

काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park)

काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान भारत में आने वाले असम राज्य के गोलाघाट और नागांव जिले में मौजूद एक भारत की कही जाने वाली प्रख्यात जगह मेसे एक है, इस जगह को नेशनल पार्क का नाम दिया गया है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान दुनिया का एक मात्र ऐसा नेशनल पार्क है जो सिर्फ ऐक सिंग वाले गैंडो के लिये प्रसिद्ध है और इस ऐक सिंगी गैंडो की आबादी को देखा जाये तो दुनिया की सबसे अधिक आबादी इस  काजीरंगा नेशनल पार्क में मौजूद है। हमारे भारत देश में जनगणना के अनुसार मार्च 2015 में, काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान में करीबन 2401 गैंडे की गणना हुई थी। आपको यह बात बता दें की इस काजीरंगा नेशनल पार्क को सन. 1985 में विश्व विरासत स्थल के रूप से घोषित किया गया था। इस काजीरंगा नेशनल पार्क को भारत के बाघों का घर भी कहा जाता है।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की संरक्षित और निरंतर जैव विविधता इसे बेहद खास बनाती है, जिसके कारण इस पार्क में कई प्रकार के जीव-जंतु पाए जाते हैं। काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान के जंगल और इसके जल निकाय इस नेशनल पार्क को और भी बेहद खुबसूरत बनाते है। इस काजीरंगा नेशनल पार्क में जल निकाय की रचना इस तरह की है की इसकी खुबसूरती को ज्यादा निखारती है, और जल निकाय का मतलब पृथ्वी की सतह पर जल के एकत्रित स्वरूप को कहते है। यह महासागर, समुद्र या छोटे तालाबों और तालाबो के रूप में हो सकता है। इनमें सतह पर बहते पानी के रूप में स्थित नदियाँ और धाराएँ आदि शामिल है। जिससे यहाँ पर घुमने आने वाले यात्रीयों को एक अलग ही आनंद प्राप्त होता है।

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काजीरंगा नेशनल पार्क का इतिहास (History of Kaziranga National Park)

काजीरंगा नेशनल पार्क के इतिहास के बारे में बताया जाता है की यहाँ पर नजदीक में एक गाव था उस गाव के पास ऐक लड़की रहती थी और उस लड़की का नाम रंगा था। रंगा को एक लड़के से प्यार हो गया था, उस लड़के का नाम काजी था। बादमे काजी और रंगा ने अपने घर वालो को यह बात बतायी पर इस बात से दोनो के घर वाले इसके खिलाफ थे और बादमे दोनो के घर वाले न मानने पर रंगा और काजी भाग गए और जंगल में गायब हो गये बादमे वो दोनों कभी नहीं मिले इसीलिए इस पार्क का नाम तब से उन दोनों के नाम से काजीरंगा रखा गया। काजीरंगा के बारे में एक और कहानी बताई जाती है कि 16वीं शताब्दी के दौरान एक संत-विद्वान श्रीमंत शंकरदेव ने एक निःसंतान दंपति काजी और रंगाई को आशीर्वाद दिया और उन्हें इस स्थान पर एक तालाब बनाने के लिए कहा ताकि उनका नाम हमेशा जाना जाए।

1 जून 1905 को 232 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को काजीरंगा प्रस्तावित आरक्षित वन बनाया गया था। इस जगह को 1908 में आरक्षित वन घोषित किया गया था। 1916 में इसका नाम बदलकर काजीरंगा गेम रिजर्व कर दिया गया। बाद में वर्ष 1950 में इस पार्क को काजीरंगा वन्यजीव अभयारण्य बना दिया गया। 1968 में असम राष्ट्रीय उद्यान अधिनियम पारित किया गया और काजीरंगा को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। 11 फरवरी 1974 को इस पार्क को भारत सरकार से आधिकारिक मान्यता मिली। बता दें कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का नाम यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल है।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाये जाने वाले जानवर (Animals found in Kaziranga National Park)

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एक सींग वाले गैंडे, जंगली पानी में रहने वाली भैंसे (जंगली जल भैंस) और पूर्वी दलदली हिरण दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले होने के लिए प्रसिद्ध है। इस राष्ट्रीय उद्यान में कुल मिलाकर 35 स्तनपायी प्रजातियाँ पाई जाती है, लेकिन उनमें से 15 अब खतरे में हैं। इसके अलावा काजीरंगा में पाए जाने वाले अन्य जानवरों में हाथी, गौर, सांभर, जंगली सूअर, बंगाल लोमड़ी, सुनहरा सियार, सुस्त भालू, भारतीय मोंटजैक, भारतीय ग्रे नेबुला, छोटा भारतीय नेबुला शामिल हैं। इसके साथ ही एक सींग वाला गैंडा, जंगली जल भैंस, दलदली हिरण, एशियाई हाथी और शाही बंगाल टाइगर सबसे अधिक पाए जाते है। काजीरंगा में प्रति 5 वर्ग किमी में बाघ पाये जाते है। इसके अलावा पार्क में 118 जंगली बिल्लियों की आबादी है।

काजीरंगा में पाए जाने वाले पक्षियों की बात करें तो इनमें सफेद अग्रभाग वाला हंस, फेरुगिनस डक, नंगे पोचार्ड डक, ब्लैक नेकेड स्टॉर्क, एशियन ओपनबिल कॉर्क, बेलीथ्स किंगफिशर, व्हाइट-बेल्ड बगुला, डालमेटियन पेलिकन, स्पॉटेड- नाम शामिल हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान में गिद्धों की तीन प्रजातियाँ पाई जाती हैं। जिनके नाम भारतीय गिद्ध (भारतीय गिद्ध), दुबले पतले गिद्ध (सिलेंडर बिल्ड गिद्ध), भारतीय सफेद गिद्ध है।

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काजीरंगा नेशनल पार्क में हाथी सफारी (Elephant Safari in Kaziranga National Park)

अगर आपको हाथी पे सवारी करने का शोख है तो आप काजीरंगा नेशनल पार्क में हाथी की सवारी कर सकते है, तो काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों में हाथी की सवारी आपको यहां पाए जाने वाले गैंडों और अन्य वन्यजीवों का आकर्षक नजारा देगी। काजीरंगा में हाथी सफारी का आयोजन वन विभाग द्वारा दिन में दो बार (सुबह और शाम) किया जाता है। जिसमें चार पर्यटकों और एक हाथी चालक को हाथी सफारी में बैठने की अनुमति है। इस सफारी शुल्क में सवारी शुल्क और प्रवेश शुल्क दोनों शामिल है।

काजीरंगा में हाथी सफारी का समय

काजीरंगा में हाथी सफारी सुबह 05:30 बजे से 07:30 बजे तक या दोपहर 3:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक की जा सकती है।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले वनस्पति (Flora found in Kaziranga National Park)

आपको यह बात बता दे की काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी की बाढ़ से घिरा हुआ एक विस्तार है, जिसकी वजह से यहाँ पर पाए जाने वाले पौधो, जानवरों और पशु पक्षियों को बहुत मदद मिलती है। काजीरंगा में पाई जाने वाली वनस्पतियों की समृद्ध विविधता हर साल यहां आने वाले मुसाफारों को आकर्षित करती है और उन्हें एक अलग ही मन की शांति प्रदान करती है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में तीन मुख्य प्रकार की वनस्पति पाई जाती है, जिसमें कई प्रकार की घास शामिल है। यहां बड़ी घास के अलावा छोटी घास, उष्ण कटिबंधीय आर्द्र और सदाबहार वन पाए जाते है। यहां पाए जाने वाले जलीय वनस्पतियां जैसे कमल, जलकुंभी, जल लिली आदि यहां के वातावरण को बेहद अनोखा और खूबसूरत बनाते है। वर्ष 1986 में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार यहां 41% लंबी हाथी घास, 29% खुले जंगल, 11% छोटी घास, 8% नदियां और अन्य जल स्रोत, 6% रेत और 4% स्वैम्पलैंड पाए गए है।

काजीरंगा नेशनल पार्क में सफारी (Safari in Kaziranga National Park)

जब कोई भी मुसाफ़री करने की सोच रहा है और उसको काजीरंगा स्थल पर जाना होता है तो वह मुसाफरको दो तरह की सफरी हाथी सफारी और जिप सफारी की सुविधा मिलती है। इन दोनों सफारी की मदद से आप काजीरंगा नेशनल पार्क का मजा ले सकते है जैसे जंगल के आकर्षक नज़ारे को निहारना और वहा के जिव जंतु और प्राणियों को देख सकते है।

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काजीरंगा नेशनल पार्क में जिप की सफारी

काजीरंगा नेशनल पार्क में सफारी टूर यहां पर आने वाले यात्रियों के लिए मुख्य आकर्षण बना हुआ है। यहां आने वाले सभी पर्यटक इस पार्क में जीप पर सफारी करना पसंद करते है। हम आपसे बता दें कि काजीरंगा नेशनल पार्क में दुनिया की सभी लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए संरक्षित वातावरण बनाया गया है। जहां आप कुछ लुप्तप्राय जानवरों, पक्षियों और स्तनधारियों को भी देख ना चाहे तो आप उसे देख सकते है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में आप जीप सफारी या आधुनिक एसयूवी सफारी से यात्रा कर सकते है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एक जीप सफारी में आप यहां पाए जाने वाले भारतीय गैंडे, जंगली भैंस, भारतीय हाथी, काला भालू, सांभर, मकाक, सुस्त भालू, जंगली सूअर, भारतीय तेंदुआ और कई अन्य प्रकार के जानवरों को देख पाएंगे। कांजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में कई तरह के प्रवासी पक्षी भी पाए जाते है, जो यहां के नजारे को और भी आकर्षक बनाते है। यह स्थान पक्षी और प्रकृति प्रेमी पर्यटकों के मन को रोमांच से भर देता है।

जिप सफारी से काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान की मुसाफ़री करने का समय (Time to travel to Kaziranga National Park by Zip Safari)

अगर कोई भी मुसाफर को काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान में जिप सफारी का आनंद लेना है तो आप सब को यह जानकारी देदे की उसका एक फिक्स समय तै किया हुआ है जो आप उसी समय पर काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान की सफारी कर सकते है। तो आपको बता दे की इसका समय मोर्निग (सुबह) 07:00AM बजे से 09:30AM बजे तक या फिर दोपहर में 1:30PM बजे से 3:30PM तक ही है। आपको सुबह के 2.5 घंटे और दोपहर के 2 घंटे तक का समय ही दिया जाता है।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का सैर करने का सबसे अच्छा समय

अगर आप लोगो को कुदरत का अच्छा नजारा देख ना हो और अगर आप काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान की मुसाफ़री करने का प्लान बना रहे है, तो आपको यह बता दे की काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान पर घुमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से अप्रैल के महीने का है आपको इस महीने में कुदरत का एक अलग ही नजारा देख ने को मिलेंगा। असम राज्य में मानसून आने पर और मानसून से पहले यह पर भारी मात्र में बारिश होती है और जिसके चलते ब्रह्मपुत्र नदी अपने उफान पर होती है और इसी वहज से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाढ़ आ जाती है जिसकी वजह से वहा के निचले इलाकों में और मैदानों में पानी भर जाता है। ज्यादा बारिश होने की वजह से और बरसात आने से पहले काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान के जानवर एक क्षेत्र से दुसरे क्षेत्र में अपने बचाव के लिए भाग जाते है। इसलिए आपको अगर यात्रा करनी हो तो आपके लिए नवंबर से अप्रैल तक का समय मुसाफ़री के लिए बेहद सुखद और कुदरत का अनोखा नजारा देख ने लायक रहेगा।

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काजीरंगा नेशनल पार्क में रेस्टोरंट और भोजन

काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान में सबसे सुविधाजनक आपके लिए विकल्प रिसोर्ट्स, लोज और होटल है और आपको पता नहीं होगा की यह सब में मुसाफारों की जरूरियात का विशेष रूप से ध्यान रखते है। इसके अलावा आप के लिए स्थानीय ढाबों के संदर्भ में काजीरंगा नेशनल पार्क में आपके लिए सिमित विकल्प है।आपको के लिए काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान में विशिष्ट भारतीय भोजनसूचि की लोकप्रिय का अनोखा आनंद ले सकते है। आप विभिन्न प्रकार की स्थानीय असमिया तैयारियों में शामिल हो सकते है जिसमें लक्सा, खार, टेंगा के साथ-साथ कुछ अन्य मछली व्यंजन और चावल के व्यंजन भी शामिल है।

काजीरंगा नेशनल पार्क तक कैसे पहुचें (How to reach Kaziranga National Park)

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में हर साल दुनिया भर से बड़ी संख्या में मुसफारो मुसाफ़री करने आते है, यहां आने वाला हर मुसाफर इस जगह को देखने के बाद हमेशा याद रखता है। अगर आप भी काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा करने की योजना बना रहे है, तो आप परिवहन के सभी साधनों से यहां पहुंच सकते है।

काजीरंगा नेशनल पार्क हवाई जहाज से कैसे पहुंचे

काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान तक पहोचने के लिए जोरहाट शहर वहासे सब से नजदीकी शहर है और इसकी दुरी इस पार्क से 96 Km है। इसके बाद काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान तक पहोचने का रास्ता गुवाहटी से है और इसकी दुरी 225 km है।

काजीरंगा नेशनल पार्क रेल मार्ग से कैसे पहुंचे

रेल से यात्रा करने वाले मुसफारो के लिए, काजीरंगा से नजदीकी रेलवे स्टेशन फुरकिंग है, जो 80 किमी की दूरी पर स्थित है। यह रेलवे स्टेशन देश के सभी प्रमुख और मुख्य शहरों से रेल लाइन द्वारा जुड़ा हुआ है। इसके अलावा काजीरंगा के पास गुवाहाटी रेलवे स्टेशन भी मौजूद है आप इस मार्ग से भी रेल द्वारा मुसाफ़री कर सकते है।

काजीरंगा नेशनल पार्क तक सड़क मार्ग द्वारा कैसे पहुंचे

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काजीरंगा राष्ट्रिय उद्यान का देश से मुख्य शहरों से 37no. के नेशनल हाइवे जुड़ा हुआ है, आप इस मार्ग की मदद से बहुत ही अच्छी तरह से मुसाफ़री कर सकते है। इस मार्ग पर कई प्राइवेट और सरकारी बसे भी चलती है। जिसकी मदद से आप लोग अच्छी तरह से काजीरंगा नेशनल पार्क तक पहुँच सकते है।

Last Final Word:

तो दोस्तों यह थी काजीरंगा नेशनल पार्क की सब तरह की माहिती आप तक पहुँच गई होगी। हमें उम्मीद है कि आपको काजीरंगा नेशनल पार्क की जानकारी पसंद आयी होगा और आपको काजीरंगा नेशनल पार्क के बारे में पूरी जानकारी मिली होगी, अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई है, तो आप इस लेख को अपने दोस्तों के साथ भी साझा कर सकते है।

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