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जज कैसे बने पूरी जानकारी

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नमस्ते दोस्तों! आज के हमारे इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे है की आप जज कैसे बन सकते है और जज बनने के लिए आपको क्या क्या करना पड़ता है। और उसके लिए आपको कितनी महेनत करनी पड़ती है और जज का क्या कार्य होता है और उनको कितनी वेतन मिलती है आदि के बारे में आपको इस आर्टिकल में बताने जा रहे है। अगर आपको भी एक अच्छा जज बनने की इच्छा है तो आप हमारा यह आर्टिकल जज कैसे बने अंत तक जरुर पढ़े। कोई भी अदालत में एक न्यायाधीश होने का मतलब है क़ानूनी लो प्रणाली के शीर्ष तक पहुचना और उसकी रखवाली करना। किसी भी अदालत में एक न्यायाधीश (Judge) सबसे सम्मानीय व्यक्ति होता है। अगर आप एक ऐसे व्यक्ति में से एक है जिनका सपना न्यायिक सार्वजनिक सेवाओ का हिस्सा बनने का सपना रखते है तो आप यह लेख “Judge”कैसे बने आपके लिए है। इस आर्टिकल में आपको एक अच्छे न्यायाधीश बनने की चरण-दर -चरण प्रक्रिया का हर एक पहलु मिल जायेगा। जैसे की 12वि कक्षा की शुरुआत से लेकर न्यायलय के न्यायाधीश बनने तक की अभी जानकारी इस आर्टिकल में मिलेगी। इस आर्टिकल को आप आगे पढ़े इससे पहेले तो आपको अपने आपसे एक सवाल जरुर पूछना पड़ेगा। क्या आप सच में एक न्यायाधीश बनने की क़ाबलियत रखते है? अगर आपका जवाब हा है तो, आपको इसके के बारे में बहुत ही ज्यादा भावुक (Passionate)होना पड़ेगा। क्योकि जब तक आप न्यायाधीश बनने के अंतिम चरण तक नहीं पहुच जाते तब तक आपको बहुत ही ज्यादा मुश्केलियो का सामना करना पड़ता है। “जज कैसे बने ” के हमारे इस आर्टिकल में आपको ये सभी निम्नलिखित जानकारिया प्राप्त होगी।

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न्यायाधीश बनने के रास्ते को चुनने से पहले आपको इन दो बातो का ध्यान रखना चाहिए।

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1.आपके लिए यह करियर विकल्प तब तक सही करियर विकल्प साबित नहीं होता जब तक आप इसके प्रति समर्पित और लगाव न रखे।

ऐसा क्यू ? एसा ईसलिए की जैसा की आप जानते है की अदालत भारत सरकार का एक हिस्सा होती है, इसलिए न्यायाधीश भी Government of India के अधीन आते है। इसलिए आपको एक जज के रूप में सिलेक्शन करने के लिए भारत सरकार द्वारा एक एग्जाम निर्धारित की जाती है जिसे अपको पास करना पड़ता है। कोर्ट का जज बनने के लिए, जिस भी एग्जाम में आप complete करने जा रहे है वह निश्चित रूप से आसन तो होगा नहीं । लेकिन पास करना भी असंभव नहीं है। एग्जाम की डिटेल जज कैसे बने के इस आर्टिकल में निचे दिया गया है।

2.लक्ष्य तक पहुचने का धैर्य : वेसे तो अदालत के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए आपको लो में अन्य करियर विल्कपो की तुलना में थोडा ज्यादा समय लगता है, लेकिन जो आप उसमे सफल हो गए तो वो आपकी पूरी लाइफ बदल देता है। (बहोत ही इंट्रेस्टिंग होता है कोर्ट का जज बनना)

मतलब के आपको अपना ध्येय प्राप्त करने के लिए थोडा धैर्य रखना पड़ेगा। अदालत के जज और मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त होने के लिए आपको 5 -से -7 साल का टाइम लगता है।

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दोस्तों, मेरा इरादा आपको डराने का या आपके होसले को तोड़ने का बिलकुल नहीं है, लेकिन अगर आप जज बनने के करियर विकल्प का चयन कर रहे है तो आपको इन दो बातो के लिए बहोत ही ज्यादा तैयार रहना होगा,क्योकि आपको आज नहीं तो कल आपको इनका सामना करना पड़ेगा ही। इसलिए मेने आपको सब सच बताया है,जिसके लिए आपको तैयार रहना होगा।

इसका मतलब यह बिलकुल भी नहीं है की आप कोर्ट के जज नहीं बन सकेगे। बन सकते है जरुर बन सकते है २००% संभव है की आप एक अदालत के सम्मानीय जज बन सकते है यह तक की आप सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश /chief justice of India(CJI) भी बन सकते है। आपको जिस भी चीज की जरूरियात है वो उपर की दो उल्लिखित बिन्दुओ को ध्यान में रखना और इसको पॉजिटिव तारीके से लेना है।

न्यायपालिका एक बहोत ही अच्छा करियर विकल्प हो सकता है बस आपको कोर्ट के जज बनने तक के समय तक आपको धैर्य रखने की आवश्यकता होती है और इस समय पर आपको खुद को बहोत ही ज्यादा प्रेरित करते रहेना चाहिए।

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क्या अदालत के न्यायाधीश (Judge)और मजिस्ट्रेट (Magistrate) के बिच कोई अंतर है? 

जज और मजिस्ट्रेट शब्द अक्सर एक दुसरे के लिए उपयोग किये जाने वाले शब्द है और इसीलिए यह दोनों एक दुसरे से सबंधित और सामान लगते है। मगर ये कानून की नजर से एक शब्द नहीं है । न्यायपालिका प्रणाली (judiciary system) के अनुसार, यह दोनों में एक बड़ा अंतर है। एक जज एक मजिस्ट्रेट की तुलना में बहोत ही प्रशासनिक ऑफिसर और शक्ति का मालिक होता है ।

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Judge: किसी भी अदालत के जज होने के नाते आपको सभी मामलो में (प्रमुख ,मामूली, सवैधानिक, आपराधिक मामलो आदि ) के मुकदमो को अच्छी तरह सुनना होगा उन सभी मामलो पर अपना निर्णय प्रदान करना होता है।

Magistrate: अदालत में एक मजिस्ट्रेट आम तोर पे तो छोटे मोटे अपराधो के मामलो को सुनता है। एक मजिस्ट्रेट फ़क्त जिला स्तर अधीनस्थ न्यायालयों (District level Courts) में मुकदमो को सुनता है और उन पर अपना निर्णय सुनाते है।

आमतोर पर एक बात यह दोनों पेशो (Judge and Magistrate) में देखि जा सकती है की वह एक न्यायपालिका प्रणाली का का हिस्सा है और दोनों पेशो के पास मामले का निर्णय करने का और पीडितो को न्याय दिलाने के अधिकार और जिम्मेदारी होती है। और यही हमारे छोटे से मस्तिष्क में भ्रम पैदा करने का यही कारण है। और इसीलिए हमें यह दोनों एक की व्यक्तित्व प्रतीत होते है।

न्यायाधीश बनने के लिए प्राथमिक शिक्षा क्या है?

किसी भी राज्य के अदालत में न्यायधीश बनने के लिए सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की आपके पास क़ानूनी डिग्री, LLB (Bachelor of laws) होनी बहोत ही जरुरी है। इसका मतलब यह है की आपको जज बनने से पहले एक लोयर बनना पड़ता है।

पहले के समय में एक लोयर बनने ले लिए आप सभी के पास सिर्फ एक ही सरल इंस्टिट्यूट पाठ्यक्रम विकल्प BA LLB का था। मगर आज के समय में विद्यार्थीओ के पास LLB करने के लिए बहोत ही सारे पाठ्यक्रम मौजूद है, जिनको LLB integrated Program के नाम से भी जाना जाता है। आप लोग उनमे से कोई भी LLB प्रोग्राम को चुन सकते है।

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जज बनने ले लिए आपको LLB की डिग्री प्राप्त करनि पडती है उसके लिए आपके पास दो विकल्प है, इस का मतलब यह है की एक लोयर बनने के लिए आपके पास दो अलग अलग रास्ते होते है। एसलिए आप इन दोनों में से कोई भी एक रास्ते का चयन कर सकते है, अपनी वर्तमान योग्यता के आधार पर।

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क्या मुझे अदालत के न्यायधीश और मजिस्ट्रेट बनने लिए कानून में LLB (Master Of Laws) और PhD करना पड़ेगा?

नहीं! आपको अदालत में जज और मजिस्ट्रेट बनने के लिए मास्टर और PhD डिग्री की जरूरत नहीं होती है। अगर आपको अलग अलग प्रकार के कानून में अपना नोलेज बढ़ाना है तो आपको यह जरुर करना चाहिए। लेकिन आम तोर पर माने तो किसी भी जिला या राज्य स्तरीय न्यायिक सेवा एग्जाम (judicial service examination) में निर्वाचित होने के लिए कोई भी masters और PhD की जरूरियात नहीं होती है।

Judicial Service Examination क्या है?

अगर आप LLB की पढाई समाप्त करने के बाद बिना किसी पूर्व अनुभव के जज की कुर्सी पर बेठना चाहते है तो आपको न्यायिक सेवा एग्जाम में लड़ना पड़ेगा जैसे की हर एक न्यायिक सेवा उम्मीदवार करता है। किसी भी जिला स्तर पर जज बनने के लिए इससे बढ़िया और कोई भी विकल्प नहीं है।

एक फ्रेशेर होने के नाते, न्यायिक सेवा एग्जाम (judicial service exam) जिला या अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Court)के जज बनने का एकमात्र रास्ता है।

Judicial Service Exam राज्य लोक सेवा आयोग (State Public Service Commission)के नियमो की तराह आयोजित की जाती है।

किसीभी जिला स्तरीय कोर्ट में जज और मजिस्ट्रेट की खाली कुर्सी को पूरा करने के लिए हर एक राज्य की अपनी न्यायिक एग्जाम होती है।

जैसे की आप अभी न्यू है ,और शायद मुकदमेबाजी पर न्यायिक सेवओ में आपको अभी तक कोई पुर्व अनुभव नहीं है। इसीलिए आपको निम्न स्तर की न्यायपालिका, यानि जिला स्तर के कोर्ट से जज (District Court Judge)के रूप में अपना करियर शुरू करना पड़ेगा।

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निम्न अदालत में भी बहोत ही सारी अलग अलग तरह की जज की पोस्टिंग होती है। तो फिर आइए  “जज कैसे बने ” के इस आर्टिकल में जाने के आपको न्यायिक सेवा एग्जाम पास कने के बाद एक निम्न स्तर की कोर्ट में आपको क्या पदनाम मिलेगा?

इन सबसे पहले, आपको भारत न्यायिक प्रणाली के पदानुक्रम ( Hierarchy of India Judicial system) को जानना बहोत ही जरुरी होगा।

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भारतीय न्यायिक प्रणाली का ढांचा

भारतीय न्यायपालिका प्रणाली कुल तीन -स्तरीय सरंचना (three-tier structure)में काम करती है, जिसमे सर्वोच्च न्यायलय (राष्ट्रिय स्तर पर ),उच्च न्यायालय (राज्य स्तर पर) और अधीनस्थ न्यायालय ( जिला स्तर पर ) शामिल है। पद अनुसार सबसे उच्च स्थान पर मौजूद कोर्ट को निचे स्थित कोर्ट की तुलना में बहोर ही ज्यादा सवैधानिक शक्तिया ओर अधिकार मिलते है। उच्च जज निम्न स्तर की कोर्ट को सुपरवाइज़ करता है। “जज कैसे बने ” के इस आर्टिकल का मुख्य उदेश्य यह है की आप न्यायपालिका में किसी पूर्व अनुभव के बिना कोर्ट का जज कैसे बना जाये के बारे में पूरी जानकारी देना है । और बिना किसी अनुभव के, आप उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में नहीं जा सकते है, इसलिए हमारा मात्र एक ही विकल्प है अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Court),जिन में आप अपने लो की डिग्री कम्पलीट करने बाद एक जज बन सकते है। अगर आप उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के जज बनना चाहते है या फिर आगे जा के बनना चाहते है तो, आपको हमारा यह आर्टिकल को जरुर पढ़ना चाहिए। तो फिर चलिए जानते है इन जिला स्तरीय अदालत के कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओ को और अधीनस्थ न्यायालयों के भीतर पदानुक्रम के ढांचे के बारे में।

भारतीय Subordinate court / District Court का ढांचा

एक जिला स्तर पर जज पर निचे की कोर्ट को अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate court) के रूप में भी जाना जाता है, जो राज्य के उच्च जज के रूप में नियत्रिंत है। चूँकि अधीनस्थ न्यायालय भारतीय न्यायिक प्रणाली के तीन-स्तरीय संरचना पदानुक्रम के सबसे निचले स्तर पर आते है, इसलिए इस को लोअर कोर्ट (Lower court) भी कहा जाता है।

राजस्व न्यायालय ( Revenue Court)

जैसा की इसके नाम से ही पता चल रहा है की, जिला स्तर में यह अधीनस्थ कोर्ट, राजस्व से संबधित है। राजस्व न्यायालय एक जिले में उत्पन्न होने वाली रेवेन्यू ( सरकारी नियमो और विनियमो के अनुसार) रेवेन्यू के रिकॉर्ड की गणना और संग्रह करने के लिए जवाबदार होता है।

दीवानी अदालत (Civil Court)

यह अधीनस्थ कोर्ट शादी, तलाक, भूमि, संपति, नागरिक मामलो और उन सभी मामलो को सुनती है जिसमे कोई आपराधिक अपराध न हो।

सत्र अदालत (Session Court / Criminal Court)

देश के जिला सत्र कोर्ट में आपराधिक मामलो जैसे की हत्या, डकैती , और किसी भी तरह के अन्य आपराधिक गतिविधियों को सुनता है।न्यातिक सेवाओ के उम्मीदवार के रूप में आपके लिए मुख्य कोर्ट है ; जैसे की सिविल और सत्र न्यायालय, क्योकि यह दो अदालते है जहा आप न्यायिक सेवा एग्जाम को पास करने के बाद नियुक्ति होगे।

Judicial Service Examination उतीर्ण करने के बाद आपको कौन की पोस्टिंग मिलेगी

सिविल कोर्ट में न्यायाधीश के पद के नाम

  • District and sessions Judge/ District Judge (Chief Judge/ मुख्य न्यायाधीश )
  • Additional District and Sessions Judge/ Additional District Judge
  • Sub Judge

हम ने एक ही पद के नाम में जिला और सत्र न्यायाधीश को बताया है क्योकि कई बार आपने देखा होगा की एक ही न्यायाधीश नागरिक मामले और अपराधिक मामले सुनता है इसी कारण से जिला अदालत में जिला न्यायाधीश और सत्र न्यायाधीश को साथ में नियुक्त करते है।

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सत्र कोर्ट में न्यायाधीश के पद के नाम

  • Session Judge (chief Judge)
  • Additional Session Judge
  • Chief Judicial Magistrate/ Judicial Magistrate First Class (JMFC)
  • Additional Chief Judicial Magistrate
  • Metropolitan Magistrate
  • Judicial Magistrate Second Class (JMSC)

न्यायिक सेवा एग्जाम पास करने के बाद ही आपको इस प्रकार के पद के नाम मिलते है : जिला न्यायाधीश और सत्र न्यायाधीश की पोस्ट को छोड़ ने के बाद।

एज जिला और सत्र न्यायाधीश एक अधीनस्थ न्यायालय में उच्च न्यायाधीश (जिला न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश ) होता है। इसलिए अगर आप जिला स्तर के न्यायपालिका के उच्च स्थान तक पहुचना चाहते है, तो आपको न्यायपालिका में कुछ वर्षो तक का अच्छी तराह काम करने का अनुभव होना चाहिए।

जिला और सत्र न्यायाशीध कैसे बने ( District and session Judge-Chief Judge in District Court)

अधीनस्थ न्यायालय में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के लिए आपको कुछ जरुरी मापदंडो को पूरा करना पड़ेगा।

जिला और सत्र न्यायाधीश बनने के लिए योग्यता मापदंड निम्नलिखित है :

  • जिला और सत्र न्यायाधीश बनने के लिए कम से कम आवेदक ७ वर्षो के लिए एक वकील रह चूका हो और किसी भी भारतीय कोर्ट में वकालत करता हुआ होना चाहिए।
  • आवेदक किसी भी राज्य या केंद्र सर्कार की सेवा में कभी भी नहीं होना चाहिए, यानि की आवेदक के पास कोई भी सरकारी नौकरी नहीं होनी चाहिए।
  • उच्च कोर्ट के जज ( HC Judge)के नजरो में एक प्रतिष्ठित वकील होना चाहिए।
  • यह जिला स्तर की अदालत में सबसे शीर्ष स्थान पर पहुचने का दूसरा तरीका है, जोकि आप एक अच्छे वकील बनकर कुछ सालो में ही प्राप्त कर सकते है।

अधिनस्थ / जिला न्यायालय में न्यायाधिशो की नियुक्ति कौन करता है?

देश के किसीभी राज्य में राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य जज के मसलह के बाद जिला और सत्र न्यायाधीश की नियुक्ति की जाती है।

उस राज्य के लोक सेवा आयोग ( State public service commission)और उच्च न्यायालय के सलाह के बाद राज्य के राज्यपाल द्वारा जिला कोर्ट (जिला और सत्र न्यायाधीश को छोड़कर )में अन्य न्यायाधिशो की नियुक्ति की जाती है।

न्यायालय न्यायाधीश /मजिस्ट्रेट के पास कौन से गुण और कौशल होने चाहिए ? (Skills Set)

जैसा की आप जानते है की जज अदालत में सबसे सम्मानीय और सम्मानित व्यक्ति है। मगर क्या आप जानते है की जज की कोलिटीस और काबलियत ने उन्हें अन्य कानून के ऑफिसरो से बहुत ही अलग बताया है?

में आपको बता दू की कोर्ट की उच्च कुर्शी पर बेठना या फिर उस मुकाम हो प्राप्त करना कोई आसन काम नहीं है। इस लिए जज बनने के लिए आपको अपने अंदर कुछ गुण और क़ाबलियत को विकसित करना बहोत ही जरुरी है और कोर्ट की उस उच्च पोस्ट को हासिल करने के लिए और उस कुर्शी पर बेठने के लिए आपको इसके लायक बनना पड़ता है।

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न्यायाधीश के पास ये 6 प्रमुख कौशल और योग्यता होनी ही चाहिए :

जिम्मेदारी (रेस्पोंसिबिलिटी) : एक जज को ये जरुर पता होना चाहिए की सविंधान में उल्लिखित कानूनों का पालन करके वो क्या कर रहे है। आप चाहे कोर्ट की जिस भी कुर्शी पर बेठे हो पर ये आपकी जिमीदारी होती है की आप उसकी विनम्रता और गरिमा को बनाए रखे। अगर कोर्ट में यदि जज की भ्रष्टाचारी है ( यानि अगर जज ही न्यायपालिका प्रणाली में प्राप्त स्थिति की रेस्पोंसिबिलिटी को नहीं जानता है) तो नागरिक/ लोग /जनता अपना न्याय पाने के लिए कहा जाएगी। इसलिए जज और मजिस्ट्रेट के लिए ये जानना हकीकत में बहोत ही महत्वपूर्ण है की वो किन किन चीजो के लिए जिम्मेदार है और उसको अच्छी तराह समजे।

न्याय की समज: जज बनने के लिए आपको न्याय की समज होनी चाहिए। जहा तक न्याय का सवाल है, जज सविंधान में क़ानूनी कानूनों को विश्लेषण करने के बाद और साक्ष्य (evidence) के आधार पर निर्णय लेते है। माननीय कोर्ट के जज के द्वारा कोई भावनात्मक निर्णय नहीं दिया जा सकता है। जज में अभियोजक द्वारा प्रदान किए गए साक्ष्य के अधार पर एक जज मामले को आगे बढ़ता है।

विश्लेषणात्मक (Analytical): एक जज होने के नाते , आपके पास विश्लेषण स्किल होना बहोत ही जरुरी है। क्युकी एक अदालत के न्यायाधीश होने के नाते आपको एक ही दिन में बहुत सारे दस्तावेजो को जाँच करनी होती है। किसीभी कोर्ट में एक सक्रीय जज के रूप में, आप वकील पक्ष द्वारा प्रस्तुत होने वाले सबुत और दस्तावेज की जाँच करते है।

और एक जज के रूप में , कुछ समय में आपको जमा किये हुए सबूतों को परखना होता है, क्योंकि आपको एक ही दिन में बहोत सारे केसेस की सुनवाई करनी पड़ती है। आम तोर पे तो इस काम के लिए एक लो क्लर्क होता है जो की जज को इस काम में हेल्प करता है।

धैर्य (Patience): धैर्य क्यों? मान लीजिए की आपको एक जज होने के नाते दिन भर पुरे समय एक ही चीज के बारे में सुनना पड़े जैसे आरोप प्रत्यारोप की बाते तो आपको उसके लिए धैर्य रखना पड़ता है। निश्चित रूप से, जज की कुर्शी पर बैठना और सक्रीय रूप से और धैर्यपूर्वक सब तर्कों को सुनना कोई आसन बात नहीं है। कोई भी केस में अपना फैसला सुनाने से पहेले जज को सभी बातो को धैर्यपूर्वक सुनना पड़ता है और फिर उस पर अपना फैसला सुनाना होता है, और इन सभी बातो को ध्यान से रखते हुए एक जज के लिए धैर्य रखना बहोत ही जरुरी माना जाता है।

English: भारत में जितनी भी न्यायिक प्रक्रियाए होती है वह सब अंगेजी भाषा में होती है। भारतीय अदालतो की फॉर्मल लैंग्वेज अंग्रेजी है, इसीलिए अगर जो आप एक जज बनना चाहते है या फिर एक जज बनने जा रहे है तो आपको अंग्रेजी भाषा आनी बहोत ही जरुरी है।

Good listening and communication skills: ये कौशल ज्यादातर समय, कार्यवाही के दौरान जज और मजिस्ट्रेट के द्वारा उपयोग में लिया जाता है। अब आपके मन में यह सवाल होगा की आखिर सुनना इतना ज्यादा महत्वपूर्ण कौशल कैसे है। तो बता दू की जब तक आप सही या अच्छी तराह से सुनेगे नहीं तब तक आप किसी भी सब्जेक्ट पर अपना निर्णय नहीं ले पायेगे।

कोर्ट में, आपको एक जज के रूप में अभियोजक और अन्य मामले से रिलेटेड सभी तथ्यों के हर एक वर्ड पर आपको अच्छी तराह ध्यान देना होगा। क्योकि कोइ भी अपने एक ही शब्द को बार बार दोहराता नहीं है। इसीलिए यह बहोत ही ज्यादा जरुरी है की आप भी अब अपनी सुनने की और बातचीत करने के कौशल को विकसित करे।

तो यह कुछ गुणवता और कौशल है जिन्हें आपको अपने अन्दर लाना पड़ता है अगर जो आप एक अच्छे जज और मजिस्ट्रेट बनना चाहते है, तो आपको इन सभी की आवश्यकता होगी। न्याय की पोस्ट पाने के लिए आपको निश्चित रूप से “Judge कैसे बने “इस आर्टिकल में लिखे उपर्युक्त गुणों को प्राप्त करने की आवश्यकता है।

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Judge कैसे बने ? न्यायिक मजिस्ट्रेट / Judicial Magistrate [ Only 2 steps ] बिना किसी अनुभव के

Step 1: Bachelor of Law (LLB)

एज जज बनने के लिए सबसे पहेले तो आपको लोयर बनना पड़ेगा (कोर्ट में केस लड़ने वाला नहीं), आपको इसके आगे के चरणों का पालन करने के लिए केवल Law graduation की डिग्री की जरूरत होती है। किसी भी क़ानूनी और कानून से रिलेटेड सेवाओ के लिए आपके पास कानून में स्नातक की डिग्री होना बहोत ही जरुरी है।

कानून की डिग्री (LLB) प्राप्त कने के बाद, और इस के बाद आप के पास अलग अलग दो मार्ग है जैसा की मेने इस आर्टिकल में पहेले बताया है।

  • Judicial service Exam की तैयारी करके
  • एक वकील बनकर कुछ सालो तक कोर्ट में वकालत का अनुभव लेने के बाद

किसी भी अदालत के जज बनने के ध्येय को हासिल करने के दो अलग अलग रास्ते है, आप उन में से कोई भी मार्ग को चुन सकते है अपनी पढाई के आधार पर।

Step 2: Judicial Service Exam

एक अच्छे जज बनने के लिए आपको न्यायिक सेवा एग्जाम के लिए तैयारी करनी पड़ेगी, और जज के रूप में अपनी करियर यात्रा को शुरु करने का यही एकमात्र तरीका है जिससे आप बहोत ही कम समय में अपने ध्येय तक पहुच सकते है। न्यायिक सेवा एग्जाम के योग्य होने के लिए आपको कोई भी पूर्व अनुभव की जरूरियात नहीं है।

अब आपको केवल “जज कैसे बने ” के इन दो उपरोक्त चरणों को पूरा करना होगा। अगर सफलतापूर्वक आप इन दो चरणों को पूरा कर लेते है तो आप भारतीय न्यायिक प्रणाली का हिस्सा बन सकते है, एक जज के रूप में।

एक जज का न्यायालय में क्या कम होता है? ( Judge Job Description)

कोर्ट में जज के ये सबसे आम कर्तव्यो में से है, शायद आप इन में से कुछ कर्तव्यो को पहेले से ही जानते होगे।

  • किसीभी मामले की प्रक्रिया और परीक्षणों के समय, एक जज को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता होती है की मामले में पुछे जाने वाले सवाल मानी और उपरोक्त हो। अगर एसा नहीं होता तो सवाल करने वाली पार्टी को ऑब्जेक्ट करे,जैसा की आपने कई फिल्मों में देखा होगा की जज हमेशा ओर्डर ऑर्डर करते है।
  • कोर्ट में उच्च स्थान प्राप्त करने के रूप में (जज की हैसियत से ) वो कोर्ट में सभी क़ानूनी और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।
  • कोर्ट के जज के रूप में, आपको ये सुनिश्चित करना पड़ता है की सभी मुद्वे कानून प्रक्रिया अंडर में हो। trial और hearing अच्छी तरह से आयोजित होनी चाहिए।
  • जज सुनिश्चित करते है की केस सुनवाई के टाइम पर मामले से जुड़े सभी मुद्वे सामिल होने चाहिए।
  • जज को बिना किसी निश्पकता के साथ निर्णय करना पड़ता है।
  • मुकदमेबाजी की प्रक्रिया के टाइम पर प्रदान किए गए साक्ष्य (evidence) की प्रामाणिकता को जांच करना भी एक जज का कम होता है।
  • एक अदालत में एक जज एक साम्राज्य के रूप में कार्य करता है जो दोनों पक्षों (आरोपी और पीड़ित ) पर एक सामान ध्यान देता है और यह सुनिश्चित करता है की दोनों पक्षों के पास सामान अवसर हो।

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क्या जज बनना एक सही करियर विकल्प है?

जैसा की आप जानते है की भारत की जनसँख्या बहोत ही ज्यादा है। और इस टाइम में कई केसेस (लाखो में ) पेंडिंग पड़े है , और कई मामलो को तो आज तक खोला ही नहीं गया है। एस लिए भारत को निश्चित रूप से बहुत से काबिल जजों की आवश्यकता है जिसके पास कानून और न्याय की अच्छी समज हो ताकि भारत जैसे देश में र कोई भी पेंडिंग केसेस न हो और उन सभी लंबित मामलो को भी जल्द से जल्द सोल्व कर सके।

हकीकत में देखा जाये तो एक जज बनना वाकई में एक कठिन कार्य है, आपको अपने जज बनने के लक्ष्य को पाने के लिए बहोत ही ज्यादा महेनत करनी पड़ती है। और न्यायिक सेवा एग्जाम में सीटो / पदों भी बहोत कम होती है।

इस प्रकार अगर आप एक जज बनना चाहते है तो न्यायिक सेवा एग्जाम में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार रहेना पड़ेगा। हाला की जज बनना थोडा कठिन है मगर इस का अंतिम परिणाम बहोत ही अद्भुत होता है। किसी भी देश या समज में एक जज बहोत ही सम्मानीय व्यक्ति होता है।

क्युकी न्यायिक सेवाए भारत सरकार का एक बहोत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है; इसका मतलब है की जज बनने के साथ आपको अच्छी सेलेरी के साथ-साथ बहुत सारी सुविधाए भी प्राप्त होगी,और जिसको पाना बहोत ही कठिन है।

फ्यूचर में, आपको उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में भी नियुक्त किया जा सकता है।

Judge की Salary जिला स्तर पर

भारत में जिला स्तर पर एक जज की सेलेरी 25,000 / per month से लेकर 65,000 / Per month तक ली तय की गयी है और साथ में कही सारी सुविधाए भी मिलती है।

हर राज्य में एक जज की महीने की सेलेरो दुसरे राज्य से अलग हो सकती है।

जैसा की अब आपको पता है की न्यायालय भारत सरकार के अंतगर्त आता है इसलिए सैलेरी भी भारत सरकार द्वारा तय की जाती है,जो हर नए central pay commission आने के बाद बढ़ सकती है।

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Last Final Word :

दोस्तों, हम उम्मीद करते है की जज कैसे बने की पूरी जानकारी के बारे में इस आर्टिकल के जरिये आपको पता चल गया होगा जैसे क्या अदालत के न्यायाधीश (Judge)और मजिस्ट्रेट (Magistrate) के बिच कोई अंतर है?, न्यायाधीश बनने के लिए प्राथमिक शिक्षा क्या है?, Judicial Service Examination क्या है?, भारतीय न्यायिक प्रणाली का ढांचा, जिला और सत्र न्यायाशीध कैसे बने, अधिनस्थ / जिला न्यायालय में न्यायाधिशो की नियुक्ति कौन करता है?, न्यायालय न्यायाधीश /मजिस्ट्रेट के पास कौन से गुण और कौशल होने चाहिए?, एक जज का न्यायालय में क्या कम होता है?, क्या जज बनना एक सही करियर विकल्प है?, Judge की Salary जिला स्तर पर जैसी सभी माहिती से आप वाकिफ हो चुके होगे।

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