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जनसँख्या विस्फोट का अर्थ, कारण, परिणाम और उसे रोकने के उपाय

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वर्तमान समय की तरह जनसँख्या का दर एसे ही बढता रहा, भारत जल्द ही चीन को पीछे रख दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। यह एसी उपलब्धता होगी जिस पर किसी भी भारतीय को गर्व नहीं होगा। इस वजह से भारत में 2 चाइल्ड पालिसी को लागु करने की बात की जा रही है। आइए इस आर्टिकल से जानते है की जनसँख्या विस्फोट किसे कहते है? जनसंख्या विस्फोट होने के कारण क्या क्या है? जनसँख्या विस्फोट से क्या परिणाम मिलेगे? और जनसँख्या विस्फोट को कैसे रोका जाए?

जनसँख्या विस्फोट का अर्थ (Meaning of Population Explosion)

जब किसी देश की जनसँख्या के मृत्यु दर में कमी होती है, बाल मृत्यु दर में कमी होती है लेकिन जन्मदर और जीवन आयुष्य में वृद्धी होती है, इन सभी के सयुक्त प्रभाव के कारण बस्ती बढ़ोतरी होती है, इस स्थिति को ही जनसँख्या विस्फोट कहा जाता है।

पूरी दुनिया में मनुष्य की जनसँख्या हर साल लगभग 8.3 करोड़ या यह भी कह सकते है की 1.1% के दर से बढती जा रही है। वर्ष 1800 को पुरे विश्व की जनसँख्या लगभग 1 अरब थी, जो की बढ़ कर 2017 में 7.6 अरब हो गई है। यह अनुमान है की 2030 के मध्य तक यह जनसँख्या बढ़ कर 8.6 अरब हो जाएगी। 2100 तक जनसँख्या 11.2 अरब तक हो सकती है।

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भारत की जनसँख्या में बात करे, भारत का क्षेत्रफल विश्व के कुल क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है जबकि हमारे देश की जनसंख्या का लगभग 16.7 प्रतिशत है। जनसँख्या की द्रष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है और क्षेत्रफल की द्रष्टि से सातवां स्थान है। 1901 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसँख्या 23.8 करोड़ थी जो 2011 के जनगणना के आकड़ो के अनुसार यह बढ़कर 1.21 अरब आबादी हो गई है। हमारे देश में आज जनसँख्या विस्फोट के कारण वस्त्र, आवास और भोजन की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है।

जनसँख्या विस्फोट होने के कारण क्या क्या है? (What is Causing the Population Explosion?)

इस तरह की अवस्था अक्सर कम विकसित देशों में पाई जाती है। भारत जनसँख्या विस्फोट की परिस्थिति से 1970 के दशक में गुजर चूका है लेकिन अब भारत की जनसंख्या वृद्धी दर में तेजी से कमी आ रही है और अब भारत की जनसँख्या को अभिशाप नही माना जाता है क्युकी भारत देश पूरी दुनिया का सबसे युवा देश है।

जनसँख्या विस्फोट के कारण इस प्रकार है :

1. सामाजिक कारण

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  • जनसँख्या विस्फोट का सबसे बड़ा कारण सामजिक है।
  • सयुक्त परिवार प्रथा होने से अधिक बच्चो के पालन पोषण में सामान्यतः परेशानी न होना।
  • कम आयु में विवाह कर देने से बच्चे अधिक पैदा होना।
  • भारतीय समाज का परम्परावादी होना एवं लड़कों के जन्म को महत्वपूर्ण समज ना।
  • स्त्रियों की सामाजिक स्थिति का कमजोर होना।
  • बच्चो के जन्म को इश्वर की देन मानना।

2. आर्थिक कारण

  • धन की कमी होने के कारण अधिक बच्चो को कमाई का साधन माना जाता है।
  • कृषि पर निर्भर परिवारों के बच्चे उनके कृषि संबंधी कार्यों में सहायता करते है इस लिए उन्हें अधिक बच्चे उपयोगी होते है।
  • ग्रामीण जनता की यह धारणा होती है कि आने वाला बच्चा अपने साथ दो हाथ और दो पैर भी लाता है और उनको काम में सहायता भी करवाता है। इस लिए ग्रामीण की जनता बच्चों को वरदान मानते है।

3. जनसँख्या विस्फोट के अन्य कारण

(1) शिक्षा का अभाव : 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल शिक्षित जनसँख्या में अभी भी केवल 74% जनसँख्या ही शिक्षित है। गावों में यह आंकड़ा और भी कम है। इस कारण जनसँख्या को लेकर लोगों में कई तरह की गलतफहमीया है।

भारत में आज भी बहुत से लोग बच्चों को इश्वर की देन मानते है। कई लोग बच्चों को धर्म से भी जोड़ते है और गर्भ निरोधकों का प्रयोग करना धर्म के खिलाफ समझते है। इन सभी का परिणाम जनसँख्या के विस्फोट के रूप में सामने आता है।

(2) अंधविश्वास : शिक्षा की कमी के कारण लोग परिवार नियोजन के उपायों को ठीक तरह से नहीं अपनाते है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगो का आज भी मानना यह है की पुरुष नशबंदी कराने से व्यक्ति की ताकत कम हो जाती है और वह आगे महनत का काम नहीं कर पाता।

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(3) मनोरंजन के साधनों की कमी : देश के कई एसे गाव है जिनमे आज भी मनोरंजन के साधनों की कमी है जिसकी वजह से लोग सेक्स को ही मनोरंजन का साधन मानते है। इस के कारण परिवार बढ़ाते रहते है।

(4) सरकार की गलत नीतियां : आजकल सरकार लोगों को 1 बच्चे के जन्म पर 6 हजार और दुसरे बच्चे के जन्म पर भी 6 हजार रुपये देती है। अब एसी नीतियों के माहौल में परिवार नियोजन कैसे सफल होगा?

जानने में आया है की चीन ने अपनी जनसँख्या पर नियंत्रण रखने के लिए 1 बच्चे की नीति को कठोरता से लागु किया था और इस तरह से जनसँख्या की बढ़ोतरी पर नियंत्रण पा लिया है लेकिन भारत इसका उल्टा कर रहा है। हमारे हिसाब से भारत सरकार को 6 हजार रूपए ना देकर पोषण युक्त खाद्य सामग्री फ्री में देनी चाहिए ताकि बच्चे स्वस्थ पैदा हों।

जनसँख्या विस्फोट होने के परिणाम (Consequences of Population Explosion)

1. देश के संसाधनों पर दबाव : अगर किसी देश में जनसँख्या तेजी से बढती है, साथ ही उस देश में मौजूद आधारभूत संरचना और संसाधनों पर भी दबाव बढ़ता है। इस से देश का विकास प्रभावित होता है और फिर वह देश गरीबी के कुचक्र में फंस जाता है।

2. लोगों के जीवन स्तर में गिरावट : यह बिलकुल सामान्य सी बात है की जब कमाने वाले कम होगे और खाने वाले ज्यादा होगे, उस कमाई से उनकी शारीरिक जरूरतों के अनुसार भोजन और पोषण नहीं मिल सकेगा, जीस की वजह से उनके जीवन स्तर में गिरावट आती जाएगी, भारत में आज भी बहुत से गावों एसे है जिसमे यह सिलसिला जारी है।

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3. गरीबी का दुष्चक्र : गरीब माता पिता ने ज्यादा बच्चों के कारण सभी बच्चों की अच्छे से पढाई लिखाई पर ध्यान नहीं दिया, एसा हो सकता है कि उसकी आने वाली पीढ़िया भी इस में फंसी रहेंगी और इस से गरीब के घर में गरीब ही होता रहेगा।

4. देश का विकास प्रभावित : जिस देश के लोग केवल अपने पेट के भरण पोषण में ही लगे रहेगे वहां विज्ञान और प्रोद्योगिकी के विकास का अनुमान करना भी मुर्खता है। इस तरह की स्थिति अफ्रीका महाद्वीप के कई देशों में आज भी देखने के लिए मील जाती है।

जनसंख्या विस्फोट को रोकने के उपाय (Measures to Stop Population Explosion)

भारत में जनसंख्या की वृद्धी दर को कम करने का एकमात्र उपाय जन्म दर को घटाना है। हमारे देश में जनसंख्या विस्फोट को नियंत्रित करने के लिए जनसंख्या नीति अपनाई गई है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने आवश्यक कदम उठाये है, वह इसके लिए जनसंख्या की नीति को भी निर्धारित किया गया है। प्रत्यक पंचवर्षीय योजना में जनसंख्या की नीति को भी निर्धारित किया गया है। प्रत्यक पंचवर्षीय योजना में जनसंख्या समस्या हेतु व्यवस्था की जाती है। छठी पंचवर्षीय योजना में परिवार नियोजन को प्राथमिकता दी गई, इस से भी कोई संतोषजनक परिणाम नहीं मिले, लेकिन एसा विश्वास है कि शिक्षा द्वारा जनसंख्या के नियंत्रण में एक महत्वपूर्ण योगदान होगा। हमने निचे जनसंख्या के नियंत्रण से जुड़े कुछ उपाय दिए है-

  • परिवार नियोजन
  • जनसंख्या शिक्षा
  • जनसंख्या संबंधी कानून

जनसंख्या नियंत्रण के अन्य साधन तथा उपाय निचे लिखे है-

  • प्राकृतिक साधन तथा उपाय।
  • जनसंख्या संबंधी योजना तथा नीति।
  • जनसंख्या तथा परिवार नियोजन की अलग से मंत्रालय हो।
  • जन-संचार माध्यमों का जनसंख्या नियंत्रण में उपयोग।
  • मुद्रित और प्रकाशन-सामग्री जैसे पोस्टर, नारे, कहानियाँ इत्यादि।
  • सतत् शिक्षा कार्यक्रम प्रौढ़ शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा कार्यक्रम इत्यादि में जनसंख्या प्रत्यय को भी सम्मिलित किया जाए।
  • जनसंख्या संबंधी कानून को सरकार द्वारा निष्ठां एवं सख़्ती से लागु करना चाहिए।
Last Final Word

इस से स्पष्ट है कि जनसंख्या विस्फोट सभी देशों के विकास में बाधक है। यह एक एसी वृद्धी है जिस पर अल्प विकसित देशों को शर्म आती है। इसके अलावा दुनिया के कई देश एसे भी है जहां पर जनसंख्या वृद्धी नकारात्मक दौर में पहुँच गई है। उस देश की सरकारों को लोगों से जनसंख्या बढ़ाने के लिए विनती करनी पड़ती है और कुछ देशों में सरकार के द्वारा एक से अधिक बच्चे पैदा करने पर पैसे भी दिए जा रहे है।

दोस्तों, हम ने इस आर्टिकल (जनसँख्या विस्फोट का अर्थ, कारण, परिणाम और उसे रोकने के उपाय) बताया की जनसँख्या विस्फोट क्या है? जनसंख्या विस्फोट के कारण क्या क्या है? जनसंख्या विस्फोट होने से क्या परिणाम मिलेगे? और जनसंख्या विस्फोट को रोक ने के उपाय क्या क्या है? फिर भी अपको इस आर्टिकल से जुड़ा कोई भी प्रश्न है, आप हमें कमेंट बॉक्स में बता सकते है।

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