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द्वितीय विश्व युद्ध का इतिहास

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दोस्तों आज के इस महत्वपूर्ण आर्टिकल में हम आपसे बात करने वाले है, द्वितीय विश्व युद्ध के बारें में तो चलिए आगे बढ़ते है और इस आर्टिकल के जरिये कुछ महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करते है। दोस्तों आपने प्रथम विश्व युद्ध के बारें में तो कहीं पे पढ़ा हीं होगा और उसके बारे में जानकारी प्राप्त की होगी पर फिर भी बता दें की प्रथम विश्व युद्ध 1914 – 18 के बिच हुआ था। यूरोप में प्रथम विश्व युद्ध के कारण वह पे क्षणभंगुरता (अल्पकालिकता) घटना बन गई थी, और इसी कारण की वजह से दुसरे अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का प्रारम्भ हो चूका था, इतिहास के इसी संघर्ष को द्वितीय विश्व युद्ध का नाम दिया जाता है। वास्तविकता (असलियत) के अनुसार देखा जाये तो प्रथम विश्व युद्ध के समय दौरान कुछ देशों को पराजय मिली थी उसी दौरान उनके बिच हुई संधियाँ और परिस्थिति के अनुसार तब बनाये गये कायदे कानून ज्यादा समय तक चल नहीं सके और 20 साल तक संभव रहे थे और वह पर नियम टूट गये। यह घटना हो जाने के बाद दुनिया में इसका पूर्व से भी ज्यादा कठिन विनाशकारी परिणाम सामने आ गया था।

एडोल्फ़ हिटलर और उनके राष्ट्रिय समाजवादी पार्टी ने आर्थिक और राजनीतिक रूप से अस्थिर जर्मनी में सत्ता आगे बढ़ा ने के लिए, उस दोनों ने साथ मिलके देश को फिर से स्थायी किया और विश्व भर में अपना शासन और अधिकार बढ़ा ने के लिए जैसे की, जर्मनी की महत्वाकांक्षाओ को पूरा करने हेतु इटली और जापान के साथ मिलकर अपनी रणनीतिक संधि पर हस्ताक्षर किये। देखा जाये तो तभी  ब्रिटेन को जर्मनी पर आक्रमण करने की तब से प्रेरणा मिली थी, जब पोलेंड पर हिटलरो पर 1 सितंबर 1939 को आक्रमण किया और इस तरह से द्वितीय विश्व युद्ध की औपचारिक (कर्मकाण्ड) की प्राम्भ हो गई। परंतु तब ये किसी को भी पता नहीं था की आने वाले 6 वर्षो में ये संघर्ष पिछले हुए किसी भी युद्ध की तुलना में बहुत ही ज्यादा भयानक और विनाशकारी होने वाला है और दुनिया की बहुत बड़ी जमीन और संपति को विनाश कर देगा। 

द्वितीय विश्व युद्ध कब शुरू हुआ था? (When did World War – II start?)

द्वितीय विश्व युद्ध सन 1939 से 1945 तक चलने वाला दुनिया का सबसे विनाशकारी और भयानक युद्ध था। देखा जाये तो करीबन 70 देशों की जमीन सेना, जल सेना और वायु सेना इस युद्ध में शामिल थी। इस भयानक युद्ध में सारी दुनिया दो भागों में बटी हुई थी और इस युद्ध में इसको मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र दोनों नाम दिए गये थे। आपको बता दे की इस दुसरे विश्व युद्ध की विनाशक शरुआत कार्य से ही पहले विश्व युद्ध के समाप्त हो जाने के बाद बन गयी थी, परंतु कई देशो के मतों अनुसार दुसरे विश्व युद्ध की वास्तविक आरंभ 1931 में हुई थी, जब जापान देश ने चाइना देश से मंचूरिया विस्तार हासिल कर लिया था और इधर इटली ने सन 1935 में एबिसनिया में अन्दर घुसकर उसे हरा दिया था।

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1939 में जर्मनी ने यूरोप में एक बड़ा साम्राज्य बनाने के उद्देश्य से पोलैंड पर आक्रमण किया। 1939 के अंत से 1941 की शुरुआत तक कई अभियानों और संधियों में, जर्मनी ने महाद्वीपीय यूरोप के बड़े हिस्से को या तो अपने अधीन कर लिया था या जीत लिया था। नाजी-सोवियत समझौते के तहत, सोवियत रूस ने पोलैंड सहित अपने छह पड़ोसियों पर कब्जा कर लिया। फ्रांस की हार के बाद, यूनाइटेड किंगडम और अन्य राष्ट्रमंडल देश ही धुरी शक्तियों से लड़ने वाले देश थे, जिनमें उत्तरी अफ्रीका की लड़ाई और अटलांटिक की लंबी लड़ाई शामिल थी। जून 1941 में, यूरोपीय धुरी ने सोवियत संघ पर आक्रमण किया, जिससे मानव इतिहास में सबसे बड़ा जमीनी युद्ध हुआ। दिसंबर 1941 में जापानी साम्राज्य भी धुरी शक्तियों के पक्ष में युद्ध में कूद पड़ा। दरअसल, जापान का उद्देश्य पूर्वी एशिया और इंडोचीन में अपना प्रभुत्व स्थापित करना था। उसने संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रशांत महासागर और पर्ल हार्बर में यूरोपीय कब्जे वाले क्षेत्रों पर हमला किया, और जल्द ही पश्चिमी प्रशांत पर नियंत्रण कर लिया था।

1942 में आगे बढ़ने वाली धुरी बलों को रोक दिया गया था जब जापान ने पहली बार नौसैनिक झड़पों की एक श्रृंखला खो दी थी, यूरोपीय धुरी सेना उत्तरी अफ्रीका में हार गई थी, और मोड़ तब आया जब उन्हें स्टेलिनग्राद में हार का सामना करना पड़ा। 1943 में, जर्मनी ने पूर्वी यूरोप में कई झड़पों को खो दिया, मित्र राष्ट्रों ने इटली पर आक्रमण किया, और संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रशांत महासागर को जीतना शुरू कर दिया, जिससे एक्सिस को सभी मोर्चों पर रणनीतिक वापसी को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। गिर गया। 1944 में जहां एक ओर पश्चिमी मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी के कब्जे वाले फ्रांस पर आक्रमण किया, वहीं दूसरी ओर सोवियत संघ ने जर्मनी और उसके सहयोगियों पर उसकी खोई हुई जमीन वापस छीनकर हमला कर दिया। अप्रैल-मई 1945 में, सोवियत और पोलिश सेना ने बर्लिन पर कब्जा कर लिया, और यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध 8 मई 1945 को समाप्त हो गया जब जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया था।

1944 और 1945 के दौरान, अमेरिका ने कई जगहों पर जापानी नौसेना को हराया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया। जब जापानी द्वीपसमूह पर आक्रमण करने का समय आया, तो अमेरिका ने जापान पर दो परमाणु बम गिराए। 15 अगस्त 1945 को, एशिया में द्वितीय विश्व युद्ध भी समाप्त हो गया जब जापानी साम्राज्य आत्मसमर्पण करने के लिए सहमत हो गया।

एडोल्फ़ हिटलरे जर्मनी में सन 1936 को राईनलेंड में पुनः-सैन्यीकरण यानी री-मिलीट्राईजेशन के कार्य का आरंभ किया था। स्पेन देश में 1936 से लेकर 1939 तक सिविल वॉर हुआ था, बादमे जर्मनी ने 1938 को चेकोस्लावाकिया पर खुदका अधिकार जमाया था। लेकिन फिर भी इसमें 2 तारीख कई ज्यादा विशेष रूप से याद रखी जाती है, वह तारीख है 7 जुलाई 1937 जिसे हम दुसरे विश्व युद्ध के आरंभ का दिन मानते है, जब मार्कोपोलो के साथ पुल हादसा हुआ था, इसकी वजह से जापान और चाइना के बिच काफी लम्बा युद्ध आरंभ हुआ था और जब जर्मनी ने 1 सितम्बर 1939 के दिन पोलेंड में घुसपेठ की थी और इसी कारन ब्रिटेन ने और फ़्रांस ने हिटलर के नाजी राज्यों से प्रतिशोध (बदला) लेने का ऐलान कर दिया था और बादमे उनके बिच युद्ध छिड़ गया था। पोलेंड की घुसपैठ से लेकर युद्ध तब समाप्त हुआ जब जापान देश ने खुदको सितम्बर 1945 को सरेंडर कर दिया था, लेकिन इतने सारे सालों में दुनिया के कई सारे देश युद्ध में ही व्यस्त रहें थे।

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दुसरे विश्व युद्ध की उत्पत्ति (Origin of World War – II)

क्या आपको पता है द्वितीय विश्व युद्ध कोई एक घटना का परिणाम नहीं है। इसीलिए इस विनाश के लिए इसको किसी भी एक एतिहासिक घटना को उत्तरदायी नहीं माना जा सकता है। रूस और जापान के युद्ध में सिजरिस्ट (Cesarist) पर अपेक्षा के बिना जित ने जापान के लिए पसिफिक और एशिया में आगे बढ़ने के कई रास्ते खोल दिए थे, और वैसे भी युनाइटेड स्टेट्स के यूएस नेवी ने सन 1890 में समुद्री युद्ध की तैयारी का आरंभ कर दिया था, इसे “वॉरप्लान ओरेंग” कहा जाता था और द्वितीय विश्व युद्ध तक प्लान को नई नई तकनीको से अपडेट किया जाता रहा था। 

वास्तव में, प्रथम विश्व युद्ध से द्वितीय विश्व युद्ध तक का समय बहुत ही अस्थायी समय था। 1929 के “ब्लैक मंगलवार” से दुनिया में मंदी का दौर शुरू हो गया था। जब 1933 में हिटलर सत्ता में आया, तो उसने वर्साय की 1918 की संधि को तोड़ दिया, जिससे आर्थिक गिरावट आई, और घोषित किया कि “जर्मनी को रहने की जगह या लेबेन्सराम की आवश्यकता है“। सभी संधियों का परीक्षण और समझ करना शुरू किया और पश्चिमी देशों के उन्हें प्राप्त करने के लाभों को समझना शुरू कर दिया। 1936 में, वर्साय और लोकार्नो की संधि को एक बार फिर रीनलैंड को फिर से सैन्यीकृत करने के लिए तोड़ा गया, जिसे यूरोप की सीमा कहा जाता था।

रैंप पर ऑस्ट्रियाई (Anschluss) और चेकोस्लोवाकिया के कब्जे का कारण हिटलर की लेबनेंसम को हड़पने की महत्वाकांक्षा थी। तीसरा रोम बनाने की इटली की इच्छा ने देश को नाजी जर्मनी के साथ घनिष्ठ संबंधों में धकेल दिया। इसी तरह, 1919 में पेरिस में अपने बहिष्कार से नाराज जापान ने जापान के साथ एक आत्मनिर्भर राज्य बनने के लिए एक अखिल एशियाई क्षेत्र बनाने की मांग की।

और देखा जाये तो इस तरह प्रतिस्पर्धी (competitor) अंतराष्ट्रीय विचारधाराओ ने तनाव की आग को और ज्यादा बढ़ा दिया। जब प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था तब रूस में हुयी बोल्शेविक क्रांति और गृहयुद्ध के बाद सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ की स्थापना की गई थी, और जो इससे पहले तक व्यापक कम्युनिस्ट (widespread communist) राज्य कहलाया जाता था। परंतु पश्चिमी गणराज्य (प्रजातंत्र राज्य) और पूंजी पति बोल्शेविज्म के प्रसार से डर गये थे। साथ साथ इटली, जर्मनी और रोमानिया जैसे कई देश में, साम्यवाद की प्रतिक्रिया में कुछ हद तक रूढ़िवादी (conservative) समूह सत्ता में आ गए थे।

जर्मनी, जापान और इटली ने आपसी सहयोग (पारस्परिक समर्थन) के समझौता पर हस्ताक्षर किये थे, परंतु उनको यह डर था की सहयोगी राष्ट्रों से उनका सामना होगा, उन्होंने कभी भी समन्वित योजना विकसित नहीं की और नाही कभी भी एक व्यापक कारवाई की।

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देखा जाये तो इतनी सारी घटना कर्मो में दुसरे विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि कब तैयार हुई, पूरी दुनिया समज ही नहीं पाई, परंतु ये बात तय है की यह युद्ध कोई भी एक देश की मह्त्वकांक्षा या फिर किसी एक जगह पर हुई क्रांति का परिणाम नहीं था, क्योकि इस युद्ध को होने में कई सारे कारन थे, जो इस असभ्य युद्ध के लिए जिम्मेदार थे।

द्वितीय विश्व युद्ध के कारण (Due to World War – II)

पेरिस विश्व शांत वार्ता जब प्रथम विश्व युद्ध का अंत हुआ तब समस्त संधियों में कुछ सन्धिया ही ऐसी थी, को सभी देशो को मजूर थी। जैसे जर्मनी, पैरिस और ओस्ट्रिया जैसे कई और देश इस संधि से ना खुश थे, क्योकि इस संधि में यह दावा था की उन सभी देशो को हथियार का उपयोग करना बंद करना था, मतलब कोई भी देश ऐसे ही हथियार का उपयोग नहीं कर सकते थे। इस तरह जर्मनी ने अपने ऊपर होने वाले आक्रमण से वर्सेल की संधि पर हस्ताक्षर तुरंत ही हस्तक्षर कर दिए।

आर्थिक मुद्दे पहले विश्व युद्ध ने अन्य कई देशो पर आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव डाला था, हालांकि युरोपन की आर्थिक अवस्था सन 1920 तक कई ज्यादा अच्छी स्थिति में थी, लेकिन यूरोप में भी मंदी का दौर लाने की वजह सिर्फ यूनाइटेड स्टेट था ओर वह देश काफी समृद्ध हो रहा था। ऐसी ख़राब हालत और ख़राब आर्थिक स्थिति में कम्युनिज्म और फासिज्म में अपनी सभी तरह की शक्तिया को अपडेट कर लिया था।

नेशनलिज्म – जब प्रथम विश्व युद्ध के बाद यूरोप में देशभक्ति का नारा उमड़ पड़ा था, और उसमे भी ज्यादातर वहीँ देश थे जो युद्ध दरमियान हार गये थे।

डिक्टेटरशिप – कई देशो में राजनीतिक अस्थिरता और प्रतिकुल आर्थिक स्थिति के कारण डिक्टेटरशिप बढ़ ने लगा। इसमें भी जर्मनी, जापान, इटली और सोवियत जैसे मुख्य संध थे।

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विफल अपीले और संधि वार्ता – जब प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हुआ उसके बाद चेकोस्लोवाकिया (Czechoslovakia) एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया था, परंतु 1938 तक चेकोस्लोवाकिया जर्मन क्षेत्र से घिरा हुआ था। हिटलर पश्चिमी चेकोस्लोवाकिया (Czechoslovakia) के एक विस्तार सुडेनेटलैंड को भी जर्मनी शहर में जोड़ना चाहता था, ज़हा पर कई सारे जर्मन रहते थे। ब्रिटिश प्रधान मंत्री नेविल चेम्बरलेन हिटलर को खुश करना चाहते थे और हिटलर के वादे के बाद सुडेनलैंड के लिए उनकी मांगों पर सहमत हुए कि वह अधिक क्षेत्र की मांग नहीं करेंगे। मार्च 1939 के दौरान, हिटलर ने शेष चेकोस्लोवाकिया पर भी कब्जा कर लिया।

दो पक्षों का बनना और विभिन्न देशों की स्थिति – इसी तरह सारी दुनिया को और उसके देश को दो प्रतिद्वंद्वी में बंट गये, जिनमे से कुछ देश तो ऐसे थे की जो उदास थे और उस देशों का तो नाहीं प्रथम युद्ध में कोई योगदान था नाहीं द्वितीय युद्ध में परंतु साथ हि भारत जैसे कई ऐसे देश थे जो किसी यूरोपियन देशो का राष्ट्र शासन था, इस कारण उन्हें उसके पक्ष में ही रहने का दबाव बनाया गया था। परंतु देखा जाये तो फिर भी द्वितीय विश्व युद्ध में महान खिलाड़ीयो में जापान, जर्मनी और इटली के सैनिको के नाम आगे आते है जिनमे एडोल्फ़ हिटलर, डेर फर्दर, जापान देश के प्रधानमंत्री एड्माइरल हिड़ेकी तोजो, इटली के उस टाइम के प्रधान मंत्री बेंटो मुस्सोलीनी ऐसे प्रखात नाम थे। तो इस तरह जापान, जर्मनी और इटली ने एक्सिस पावर नामक एक गठबंधन बनाया था। बुल्गारिया, हंगरी, रोमानिया और दो जर्मनी निर्मित राज्य जैसे क्रोएशिया और स्लोवाकिया इसके अंत में शामिल हो गये थे।

जब जर्मनी, जापान और इटली ने एक्सिस पावर नामक एक गठबंधन बनाया उसके बाद यूनाईटेड स्टेट, ग्रेट ब्रिटेन, चाइना और सोवियत ने मिलके एक गठबंधन बनाया था, और यह सारा ग्रुप ध्रुवीय शक्तियो के सामने खड़ा हुआ था। 1939 से 1944 तक लगभग 50 देश किसी न किसी कारण से आपस में लड़े थे। और 1945 में 13 और देश युद्ध में शामिल हुए, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, ब्राजील, ब्रिटिश राष्ट्रमंडल राष्ट्र, कनाडा, भारत, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, चेकोस्लोवाकिया, डेनमार्क, फ्रांस, ग्रीस, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, फिलीपींस शामिल हैं। और यूगोस्लाविया बड़े नाम हैं। जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट, ग्रेट ब्रिटेन के प्रधान मंत्री विंस्टन चर्चिल, चीन के जनरल चियांग काई-शेक, सोवियत संघ के जनरल जोसेफ स्टालिन मुख्य नाम हैं।

इस तरह, गठबंधन राष्ट्रों और ध्रुवीय देशों सहित कुल 70 मिलियन लोग पूरे युद्ध में लड़े। फ़िनलैंड आधिकारिक तौर पर किसी भी पक्ष में शामिल नहीं हुआ, लेकिन सोवियत संघ के साथ उसके युद्ध ने द्वितीय विश्व युद्ध शुरू कर दिया। 1940 में आवश्यकता को देखते हुए फ़िनिश सोवियत रूस से आगे निकलने के लिए नाज़ी जर्मनी में शामिल हो गया। जब 1944 में फ़िनलैंड और सोवियत संघ के बीच शांति की घोषणा की गई, फ़िनलैंड ने सोवियत संघ को हटाने के लिए जर्मनी के साथ गठबंधन किया।

स्विट्जरलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और स्वीडन ने युद्ध के दौरान तटस्थता की घोषणा की।

द्वितीय विश्व युद्ध का कार्यकाल (period of World war II)

  • 1 सितम्बर 1939 को पोलैंड में घुसपैठी जर्मनी ने की थी डेनमार्क, लक्सेम्बर्ग, निदरलैंड, नोर्वे, बेल्जियम और फ़्रांस तुरंत ही जर्मनी के नियंत्रण में आने लगे और केवल जर्मनी का सामना करने के लिए यूनाईटेड किंगडम बच गया था।
  • 10 जून 1940 को ब्रिटेन के खिलाफ इटली ने युद्ध में जर्मनी के मिलने की घोषणा की और ये युद्ध ग्रीस और उत्तरी आफ्रिका तक फैल गया था। बादमे 14 जून 1940 को जर्मनी की सेना ने पेरिस पर आक्रमण कर दिया था।
  • जुलाई से लेकर सितंबर 1940 तक इंग्लिश ग्रेट कोस्ट लाइन और जर्मन ने युद्ध लड़ा था। फिर 7 सितम्बर 1940 से मई 1941 के समय में लंदन में आधी रात के समय में जर्मनी का हवा में बमबारी अभियान चला था, बाद में जिसे ब्लिट्ज के नाम से जाना जाता हैं।
  • 22 जनवरी 1941 को, ब्रिटिश और राष्ट्रमंडल बलों ने बंदरगाह शहर टोब्रुक, लीबिया पर कब्जा कर लिया, 22 जून 1941 को जर्मनी ने सोवियत संघ में घुसपैठ की।
  • सितंबर 1941 में जापानी सेना भारत-चीन सीमा में गहरी आ गई थी। 7 दिसंबर 1941 को जापान ने पर्ल हार्बर पर हमला किया और आधे से अधिक विमान बेड़े को नष्ट कर दिया और 8 युद्धपोतों को नष्ट कर दिया। जापान ने फिलीपींस में क्लार्क और इबा हवाई क्षेत्रों पर भी हमला किया, जिसमें आधे से अधिक अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हो गए।
  • रूजवेल्ट ने 8 दिसंबर 1941 को कांग्रेस को दिए गए एक भाषण में कहा था “एक ऐसी तारीख जो बदनाम रहेगी” और इसके साथ ही अमेरिका ने जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी। इस दौरान जापान ने हांगकांग, गुआम, वेक आइलैंड्स, सिंगापुर और ब्रिटिश मलाया पर हमला किया।
  • 11 दिसंबर 1941 को जर्मनी और इटली ने संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा की, क्रिसमस 1941 तक जापान ने थाईलैंड, गुआम, हांगकांग और वेक आइलैंड पर कब्जा कर लिया।
  • 1942 में, गठबंधन देशों ने ध्रुवीय शक्तियों को उत्तरी अफ्रीका और सोवियत संघ में आगे बढ़ने से रोक दिया। फरवरी 1942 में जापान ने मलय प्रायद्वीप में घुसपैठ की, सिंगापुर ने एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण कर दिया।
  • 4 जून से 6 जून 1942 तक, जापानी विमानों ने हवाई द्वीप में प्रवेश किया, और संयुक्त राज्य अमेरिका ने मिडवे द्वीप पर ही मिशन कोड को तोड़ दिया, इस प्रकार जब जापान ने मिडवे पर हमला किया, तो न केवल अपने 4 विमान, बल्कि 200 विमानों को खो दिया। और पायलट भी हार गया और अमेरिका को एक ही बार में जीत मिल गई।
  • 19 अगस्त 1942 को जैसे ही जर्मनी ने रूस में प्रवेश करने की कोशिश की, स्टेलिनग्राद की लड़ाई शुरू हो गई। अगस्त 1942 से फरवरी 1943 तक, अमेरिकी मरीन ने गुआडलकैनाल के प्रशांत द्वीप पर कब्जा कर लिया।
  • 23 अक्टूबर 1942 को, ब्रिटिश सेना ने अल अलामीन की दूसरी लड़ाई में ट्यूनीशिया की संधि में ध्रुवीय शक्तियों की सेना को पीछे धकेल दिया।
  • 1 फरवरी 1943 को, जर्मन सेना ने स्टेलनग्राद में आत्मसमर्पण कर दिया, और बड़े पैमाने पर रूस से हार गए। इस हार ने जर्मनी को पूर्व की ओर बढ़ने से रोक दिया। 10 जुलाई 1943 को गठबंधन देश इटली में उतरे।
  • 25 जुलाई 1943 को, इटली के राजा पूरी शक्ति में लौट आए और मुसोलिनी को पराजित कर गिरफ्तार कर लिया गया। 1943 नवंबर से मार्च 1944 तक, यूएस मरीन ने बोगनविले में सोलोमन द्वीप में घुसपैठ की और इसे जापानियों से मुक्त कराया।
  • 6 जून, 1944 को, गठबंधन सेना नॉर्मंडी से 5 समुद्र तटों पर एक साथ उतरी, अर्थात् यूटा, ओमाहा, गोल्ड, जूनो और स्वॉर्ड। इस लैंडिंग में 5000 जहाज, 1100 हवाई जहाज और 15000 सर्विस मैन शामिल थे।
  • 25 अगस्त 1944 को अमेरिकी और स्वतंत्र फ्रांसीसी सेना ने पेरिस को आजाद कराया। 27 जनवरी 1945 को, सोवियत सेना ने क्राको (पोलैंड) के पास स्थित ऑशविच कैंप कॉम्प्लेक्स को मुक्त कराया।
  • 19 फरवरी से 26 मार्च 1945 के बीच अमेरिका ने इवो जिमा द्वीप के लिए जापान के साथ समुद्री युद्ध किया। 12 अप्रैल 1945 को जॉर्जिया में रूजवेल्ट की मृत्यु हो गई और हैरी ट्रूमैन ने वहां राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
  • 25 अप्रैल 1945 को सोवियत संघ ने बर्लिन को घेर लिया और 28 अप्रैल 1945 को स्विट्जरलैंड भागते समय मुसोलिनी मारा गया। 29 अप्रैल 1945 को, अमेरिकी सैनिकों ने जर्मनी में म्यूनिख के बाहर दचाऊ को मुक्त कर दिया।
  • 1945 में, 30 अप्रैल को, ईवा ब्राउन (जो हिटलर की पत्नी थीं) और हिटलर ने आत्महत्या कर ली। 7 मई 1945 को जर्मनी ने रिम्स में रेड स्कूल हाउस में आइजनहावर के मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया। वी-ई दिवस 8 मई को मनाया जाता है, क्योंकि युद्धविराम उसी दिन हुआ था।
  • 1945 से, 8 मई को यूरोप में वी-ई दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यूरोप में युद्ध समाप्त हुआ था।
  • 16 जुलाई 1945 को न्यू मैक्सिको के अलामोगोर्डो पर एक परमाणु बम गिराया गया था।
  • 29 जुलाई, 1945 को ट्रूमैन ने जापान को चेतावनी दी कि अगर उसने आत्मसमर्पण नहीं किया, तो देश नष्ट हो जाएगा, लेकिन जापान ने युद्ध जारी रखा।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा पर लिटिल बॉय नाम का पहला परमाणु बम गिराया, जिसमें 140,000 लोग मारे गए। जापानी सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर, 9 अगस्त 1945 को, नागासाकी पर फातमान नाम का एक दूसरा बम गिराया गया, जिसमें 80,000 लोग मारे गए थे।
  • 14 अगस्त 1945 को जापान ने अमेरिका की सभी शर्तों को स्वीकार कर लिया और युद्ध रोक दिया। और इस दिन जापान पर विजय दिवस के रूप में घोषित किया गया था। 2 सितंबर, 1945 को जापान ने टोक्यो की खाड़ी में यूएसएस मिसौरी को आत्मसमर्पण करने वाले औपचारिक कागजात पर हस्ताक्षर किए।
  • मार्च 1947 में, एक जापानी सैनिक हिरू ओनोडा, जो तब भी युद्ध लड़ रहा था, को फिलीपींस के लुबांग द्वीप पर एक खोज दल द्वारा खोजा गया था। जब उन्हें अपने पूर्व कमांडिंग ऑफिसर द्वारा आश्वस्त किया गया कि युद्ध समाप्त हो गया है, तो वे मनीला गए और औपचारिक रूप से राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। 16 जनवरी 2014 को 91 साल की उम्र में हीरू ओनोडा का निधन हो गया।

द्वितीय विश्व युद्ध के दुष्परिणाम (World War – II Estimates)

कहा जाये तो इस युद्ध में जो सबसे बड़ी और भयानक हानि सामने आई थी वह जन हानि थी। जब अमेरिकाने हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम से हमला किया था वह मानव सभ्यता के इतिहास का सबसे क्रूर, विनाशकारी और दर्दनाक घटना मानी जाती है। जिसका परिणाम आज तक और तब से लेकर आने वाली भुगत रहीं है। इसके कारण जो घटना हुई और मनुष्य जीवन का दर्दनाक भरा युद्ध हुआ था तब इसके बाद इस पर पूरी तरह से रोक लगाई गयी थी। गिना जाये तो अमेरिका ने जब यह हिरोशिमा और नागासाकी के पर बम गिराया तो उस घटना के बाद कुल 12 मिलियन जवानो को मार गिराया गया था, इस जवानो की गिनती के बाद भी 25 मिलियन नागरिक भूख बीमारी और भी कई कारणों से मारे गये थे। 24 मिलियन से अधिक लोग इस युद्ध के दौरान घायल और शारीरिक रूप से खोटखापन यानि विकलांग हुए। US द्वरा जापान में परमाणु बम गिराने से 1,60,000 लाख से अधिक जन-हानि हुई थी। ईसी तरह दूसरा विश्व युद्ध देखा जाये तो सब तरह की नजरों से एक मानव जाती के लिए विनाशकारी और भयंकर साबित हुआ था।

मानो तो हम लोग दुसरे विश्व युद्ध के समय के दौरान हुई आम-जनों को वास्तविक संख्या को कभी नहीं जान सकते के उस समय कितने लोग मृत्यु पामे थे या घायल हुए थे। इसमें जुड़ी कई सारी मृत्यु तो बम के ब्लास्ट होने से, नर-संहार यानि पशुबध, बुख मरो और युद्ध से जुड़ी अन्य कई गतिविधियों (activities) के कारन उस समय पर हुई थी। हिटलर के दिव्य “अंतिम समाधान” के हिस्से के रूप में अनुमानित 45-60 मिलियन मनुष्य की हत्या नाजी एकाग्रता शिविरों में 6 मिलियन यहूदी मारे गए थे। अब उन्हें लोग होलोकोस्ट के नाम से जानते है। उस समय दरमियान सोवियत यूनियन के 7 मिलियन सैनिक घायल हुए थे।

सिर्फ 1939 से 1945 तक की विनाश और जनहानि।

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देश का नाममृतकों की संख्याघायलों की संख्या
ऑस्ट्रेलिया23,36539803
ऑस्ट्रिया380,000350,117
बेल्जियम776014500
बुल्गेरिया10,00021878
कनाडा3747653174
चाइना2,2000001,762000
फ्रांस210,671390,000
जर्मनी35000007,250,000
ग्रेट ब्रिटेन329,208348,403
हंगरी140,00089,313
इटली77,494120,000
जापान1219000295247
पोलैंड320,000530000
रोमानिया300,000
सोवियत यूनियन75,000005,000000
यूनाइटेड स्टेट्स405,399670,846

इस युद्ध दौरान जमिन का नुक्सान बहुत भारी मात्रा में हुआ था, सिर्फ अनुमान ने आधार से देखा गया खर्च लगभग 1000 बिलियन डॉलर हे जो इस युद्ध में इस्तमाल हुआ था। इस युद्ध में सिर्फ अमेरिका ने 350 बिलियन डॉलर का खर्च किया था। इस युद्ध के दौरान कई साड़ी बिल्डिंग, आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर), रोड्स, युद्धपोत (लड़ायक जहाज़) और फाइटर विमान इसमें बरबाद हुए थे।

दुसरे युद्ध के परिणामस्वरूप सारी दुनिया के कई सारे साम्यावादी और पूँजीपति दो भागो में बट गये थे, जिसमे अमेरिका पूँजीपतियों का रहनुमाई कर रहा था, और दूसरी तरफ सशिया साम्यवादी का रहनुमाई कर रहा था। रशिया और अमेरिका दोनों ने अपनी विश्व पटल यानी विश्व तालिका पर एक दुसरे की आलोचना शरु कर दिया था, जिसका परिणाम जल्दी ही युद्ध होगा। इस शीत युद्ध के दौरान उन दोनों देशो अमेरिका और रशिया ने अपने खुदके परमाणु हथियार तैयार कर लिए है जिसका उसको घातक परिणाम तुरंत ही दुनिया के सामने आने वाला है, और सारी दुनिया को यह भुगतना पड़ेगा।

द्वितीय विश्व युद्ध और भारत (World War – II and India)

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, भारत पर अंग्रेजों का कब्जा था। इसलिए आधिकारिक तौर पर भारत ने भी 1939 में नाजी जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। ब्रिटिश राज (दास भारत) ने दो मिलियन से अधिक सैनिकों को युद्ध में भेजा, जिन्होंने ब्रिटिश नियंत्रण में धुरी शक्तियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। इसके अलावा, सभी रियासतों ने युद्ध के लिए अंग्रेजों को बड़ी मात्रा में धन उपलब्ध कराया।

दुसरे विश्व युद्ध के बाद का परिदश्य – स्थल-दृश्य (Post World War – II scenario)

जब दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ तब डेमोक्रेटिक लहर भी चली थी और डेमोक्रेटिक का मतलब लोक-तंत्र-संबंधी होता हैं, बहुत से देशों के लोग अपनी स्वतंत्र होने के लिए जागृत हो गये थे, इसके अंतर्गत कई सारे नई बस्ती के लोगो को स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। इस डेमोक्रेसी में हम अपना भारत का नाम भी शामिल कर सकते है क्युकी हमारे भारत देश को भी स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। इसी कारण वश उपनिवेशवाद (colonialism) का समाप्त हो गया और इस उपनिवेशवाद के खिलाफ लोगो ने राष्ट्रय आंदोलन की शुरुआत एशिया और आफ्रिका में करी थी, जिसके कारण वश भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और इजिप्त जैसे कई देशो को ब्रिटिश शासन काल से मुक्ति मिल गई थी। वियतनाम (Vietnam) जैसे कम्बोडिया और लाओस देश को फ्रेंच शासन काल से मुक्ति मिल गयी थी।

दुसरे विश्वयुद्ध के समाप्त हो जाने के बाद US के प्रेसिडेंट हैरी ट्रूमैन  ने युद्ध के विक्टिम यानि युद्ध में बलिदान किया हुआ देश इस को आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया और कम्युनिज्म के प्रभाव को रोका था। इसके बाद इस घोषणा का एक नाम हुआ जिसको लोग ट्रूमैन की घोषणा से जाना गया और आज भी यह नाम से जानते है।

मार्शल योजना (Marshal Plan)

इस योजना के अनुसार US के विदेशमंत्री ज़ोर्ज मार्शल ने युद्ध द्वारा बलिदान हुए सारे देशो को सपोर्ट करने के लिए प्लान बनाने शुरू कर दिये थे। जिसे मार्शल प्लान कहाँ जाता है, इस योजना में US ने यूरोपियन देशों को क्षति-पूर्व के लिए 12.5 बिलियन डॉलर दिए गये थे। 17 से ज्यादा देशो में खाने की सामग्री, कृषि और ट्रांसपोर्ट ऐसे कई के लिए दुबारा निर्माण किया गया था। इस सभी के दौरान मशीनरी और अन्य जरुरत मंद सामानों के लिए 13 अरब डॉलर की राशी का भुक्तान किया गया था।

दुसरे विश्व युद्ध के बाद 1949 में USSR ने काउंसिल ऑफ़ म्यूच्यूअल असिस्टेंस (Council of Mutual Assistance) की स्थापना की थी, इसके कारन यूरोप देशो को आर्थिक रूप से सहायता मिल सके।

द्वितीय विश्व युद्ध के एक महीने बाद 24 अक्टूबर 1945 के दिन युनाईटेड नेशन की स्थापना की गई थी। नेशन की इस स्थापना करने की एक सिर्फ एक ही वजह थी के वर्ल्ड वॉर दुबरा ना हो और वर्ड वॉर को रोकने के लिए की गयी थी। परंतु यह असफल रहीं इसलिए 4 साल के बाद फ्रेक्लिन रूजवेल्ट और विन्सन चर्चिल ने अटलांटिक चार्टर पर अपने हस्ताक्षर किये थे, और बादमे उसने UN की स्थापना की थी और इस संस्था का मुख्य उदेश्य सिर्फ यही था की विश्व शांति कायम बनी रहें और तबाही से बचाना था।

Last Final Word:

दोस्तों हम आशा करते हे की आप्नको हमारा यह आर्टिकल को पढ़ के संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो गयी होगी। इसी तरह द्वितीय विश्व युद्ध का समाप्त हुआ हुआ और सभी देशो ने मिलकर विश्व शान्ति कायम बनायीं रखी।

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