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DRDO क्या है और DRDO की पूरी जानकारी

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दोस्तों, आपके भीतर यह प्रश्न उठ रहा की DRDO क्या है? यह आर्टिकल आपके लिए बहुत लाभदाई होने वाला है क्युकी इस आर्टिकल में हम बात करने वाले है, DRDO क्या है? DRDO का काम क्या है? DRDO के उत्पाद कोन-कोन से है? DRDO में कैसे जाए? और भी DRDO से जुडी जानकारी हम इस आर्टिकल में देने वाले है। इस लिए इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़े।

DRDO क्या है? (What is DRDO)

DRDO का पूरा नाम “Defense Research and Development Organization” है। जिसे हिंदी में “रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन” कहा जाता है। ये भारत की रक्षा से जुड़े अनुसंधान (Research) और रक्षा शक्ति को मजबूत बनाने के लिए कार्य करता है। इसकी स्थापना भारत की सैन्य शक्ति को ओर ज्यादा बढ़ाने के लिए की गई है। DRDO सैना और रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करते है। DRDO का उदेश्य है “बालस्य मुलं विज्ञानम है” इसका अर्थ है शक्ति का आधार विज्ञान है।

“DRDO के वर्तमान चेयरमेन डॉ. जी सतीश रेड्डी (Dr. G Satheesh Reddy) है।”

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DRDO भारत का सबसे बड़ा सैन्य शक्ति का शोध संगठन है। इसकी स्थापना 1958 में दिल्ली में की गई थी। DRDO की जब स्थापना नहीं हुई थी, उससे पहले भारत 70 प्रतिशत रक्षा के उपकरण बहार के देशो से आयात करता था। इस लिए देश को हथियारों के लिए दुसरे देशो पर आश्रित होना पड़ता था। इस संगठन का मुख्य उदेश्य थल सेना, जल सेना और वायु सेना सभी भारतीय सेना को मजबूत बनाना है। उन्हें सुरक्षा प्रदान करना है और रक्षा विभाग को तकनिकी रूप से मजबूत करना है और साथ ही साथ एक सुद्दढ राष्ट्र बनाना है।

DRDO का काम क्या होता है? (What is the Work of DRDO?)

DRDO भारत के रक्षा प्रणालियों के डिज़ाइन और उन्नति के लिए लगातार काम करता रहता है। ये जल, थल और वायु सेनाओ की रक्षा जरूरतो को पूरा करता है और विश्व स्तरीय हथियार प्रणाली और यंत्र को बनाती है। DRDO सैन्य प्रोद्योगिक के अलावा बहुत से क्षेत्र में भी कार्य करते है जैसे कि साइबर, अंतरिक्ष, लाइफ साइंस, कृषि और परिक्षण के क्षेत्रो में कार्य करते है ताकि देश की सुरक्षा को ओर ज्यादा मजबूत किया जाए।

DRDO संस्था रक्षा मंत्रालय के आधीन कार्य करती है। भारत सरकार के रक्षा मंत्री वैज्ञानिक सलाहकार जो अनुसंधान और विकास के निर्देशक एवं रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव होते है और यही DRDO का नेतृत्व करते है।

DRDO के द्वारा किए गए उत्पाद (Production Made by DRDO)

DRDO के द्वारा विकसित किए गए कुछ प्रमुख उत्पाद और प्रौद्योगिक की यादी निचे दी गई है-

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1. अग्नि 1 : यह मिसाइल सिंगल स्टेज, ठोस इंधन, मध्यम दुरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM- Medium-Range Ballistic Missile) है। ठोस प्रणोदन बूस्टर और एक तरल प्रणोदन ऊपरी चरण का उपयोग करना। यह 700-800 किलोमीटर की मारक क्षमता रखती है।

2. अग्नि 2 : यह मिसाइल मध्यम दुरी वाली बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM-Intermediate-Range Ballistic Missile) है। 2000 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता रखता है।

3. अग्नि 3 : यह मिसाइल दो चरणों वाली मध्यम दुरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM-Intermediate-Range Ballistic Missile) है। वार्ड कॉन्फिगरेशन की एक विस्तृत चैन को सहायता करती है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 2,500 किलोमीटर से अधिक है।

4. त्रिशूल : सभी मौसम में यह मिसाइल सतह से आकाश में मारने में सक्षम है लेकिन मारक क्षमता में कम दुरी है। यह मिसाइल त्वरित प्रतिक्रिया वाली है, इस लिए इसे निम्न स्तर के हमले का मुकाबला करने के लिए बनाई गई है।

5. आकाश : यह मिसाइल एक साथ कई लक्ष्यों को भेद ने के साथ एक से अधिक हथियार ले जाने की ताकत है। जमीन से आकाश में वार करने वाली मध्यम दूरी वाली मिसाइल है।

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6. पृथ्वी : IGMDP (Integrated Guided Missile Development Programme) के तहत स्वदेशी तौर पर निर्मित पहली बैलिस्टिक मिसाइल है। जमीन से जमीन पर वार करने वाली बैटल फिल्ड मिसाइल है। यह मिसाइल 150 किलोमीटर से 300 किलोमीटर तक की मारक क्षमता रखता है।

7. ब्रह्मोस : यह मिसाइल एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे निजी सयुक्त उद्यम के रूप में रूस के साथ बनाया गया है। मल्टी-प्लेटफोर्म क्रूज विभिन्न प्रकार के प्लेटफार्मो से आक्रमण कर सकता है। 2.5 से 2.8 मैक की गति के साथ ही विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलो में से एक है। एक बार यह मिसाइल को लक्ष्य साधने के बाद इसे कंट्रोल केंद्र से मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती। इस लिए इस मिसाइल को “दागो और भूल जाओ” (Fire and Forget) मिसाइल भी कहा जाता है।

8. निर्भय : सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस का पूरक है। भूमि, समुद्र और वायु पर कई प्लेटफोर्मो से प्रक्षेपण (Launch) किये जाने में सक्षम है। इस की मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर तक है।

9. नाग मिसाइल, 10. सागरिका मिसाइल, 11. शौर्य मिसाइल, 12. अस्त्र मिसाइल, 13. धनुष मिसाइल, 14. युद्ध टैंक अर्जुन, 15. हल्का लड़ाकू विमान (एस सी ए), 16. बहुमुखी रोबोट, 17. लेजर चेतावनी प्रणाली, 18. कावेरी इंजन, 19. स्वदेशी एक्स-रे औधोगिकी टोमोग्राफी सिस्टम, 20. तुरंत चिकित्सा प्रक्रिया दलों के लिए संरक्षक वस्त्र इत्यादि जैसे भारत की शक्ति को बढाने के लिए उत्पाद किए है।

DRDO में नौकरी कैसे मिलती है? (How to Join DRDO?)

जो भी उम्मीदवार (Candidate) DRDO में नौकरी करना चाहता है या यह जानना चाहते है की DRDO में नौकरी कैसे पाए? और इसके लिए तैयारी कर रहे है, आज हम उनको बतायेगे की इसके लिए अपको कीस प्रकार तैयारी करनी होगी और आपकी शैक्षणिक योग्यता क्या होनी चाहिए। उस परीक्षामे किस प्रकार के प्रश्न पूछे जायेगे और अपको उस प्रश्नों को हल करने के लिए कितना समय दिया जायेगा।

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जो भी उम्मीदवार DRDO में साइंटिस्ट बनना चाहते है वह DRDO के द्वारा आयोजित भर्ती 2021 में आवेदन कर सकते है। आप GATE, SET और CEPTAM के परीक्षा में आवेदन करके साइंटिस्ट बन सकते है।

GATE की परीक्षा से DRDO में जुड़े (Join DRDO Through GATE Exam)

GATE ( Graduate Aptitude Test in Engineering) के द्वारा उम्मीदवार DRDO में भर्ती के होने का आवेदन कर सकते है। इस पोस्ट के लिए उमीदवार (Candidate) अगर आवेदन करना चाहता है, उसके पास GATE पास होना अनिवार्य है। DRDO उम्मीदवार (Candidate) द्वारा GATE और साक्षात्कार (Interview) में प्राप्त अंको के माध्यमो से DRDO साइंटिस्ट की भर्ती करता है। जो भी उम्मीदवार (Candidate) साइंटिस्ट बनने की इच्छा रखता है, वह DRDO के Application Form को GATE के माध्यम से भर सकते है। पेपर होने के बाद चयन किए गए उम्मीदवार (Candidate) को साक्षात्कार (Interview) के लिए बुलाया जायेगा। यदि वह साक्षात्कार (Interview) में पास हो जाते है, उन्हें भर्ती कर दिया जाता है।

CEPTAM के माध्यम से DRDO के साथ कैसे जुड़े? (How to Connect With DRDO Through CEPTAM?)

अगर आप CEPTAM (Centre for Personnel Talent Management) के माध्यम से DRDO में जाना चाहते है, इसके लिए पहले अपको लिखित परीक्षा देनी होगी जिसमे 2 टियर में अपको इस की परीक्षा देनी होगी। अगर आप पहले टियर की परीक्षा पास कर लेते है, आप दुसरे टियर की परीक्षा दे सकते है। अगर आप पहली परीक्षा पास नहीं कर सके, दुसरे टियर की परीक्षा आप नहीं दे सकेगे।

  • टियर-1 : इस में अपको ऑब्जेक्टिव जैसे प्रश्न दिए जायेगे। इसका पेपर 150 अंक के होते है, जो अपको 2 घंटे के समय में अपको हल करना होता है।
  • टियर-2 : इसका पेपर भी ऑब्जेक्टिव प्रकार के ही प्रश्न आते है। इस में अपको 100 प्रश्न पूछे जायेगे, जीसे हल करने के लिए अपको 1 घंटे 30 मिनट का समय दिया जाता है।

DRDO टियर – 1 का पाठयक्रम (Syllabus)

  • क्वांटिटेटिव एबिलिटी/एप्टीट्यूड
  • जनरल इंटेलिजेंस और रीजनिंग एबिलिटी
  • जनरल अवेयरनेस
  • इंग्लिश लैंग्वेज (बेसिक नॉलेज)
  • जनरल साइंस

DRDO टियर – 2 का पाठ्यक्रम (Syllabus)

  • टेस्ट स्पेसिफिक टू द सब्जेक्ट ऑफ़ द पोस्ट कोड

SET (साइंटिस्ट एंट्री टेस्ट)

DRDO की यह परीक्षा दो चरणों में होती है जिसमे पहले आपको रिटर्न परीक्षा देनी होगी। यह परीक्षा के बाद साक्षात्कार (Interview) होता है। DRDO में अपको द्वारा प्राप्त अंको को आगे बढाया नहीं जाता बल्कि साक्षात्कार (Interview) में उम्मीदवार (Candidate) को स्क्रीनिंग के लिए उपयोग किया जाता है। इसका अंतिम चयन (Selection) Interview पर निर्भर करता है की उम्मीदवार का प्रदर्शन कैसा है। अगर आप अच्छे से अपना Interview देते है, आपका चयन (Selection) हो जायेगा। यह परीक्षा 3 घंटे की होती है जिसमे 500 अंक के 150 ऑब्जेक्टिव प्रकार के प्रश्न पूछे जाते है।

  • विभाग-A में BE, B.Tech, M.sc पाठ्यक्रम के अनुसार 400 अंको में 4 अंक के 100 प्रश्न पूछे जाते है।
  • विभाग-B में 2 अंको के 50 प्रश्न पूछे जाते है जो कुल 100 अंक के होते है। जिसमे लॉजिकल रीजनिंग, न्यूमेरिकल रीजनिंग, कांसेप्ट फोर्मशन, स्पेटियल रीजनिंग, एब्सट्रेक्ट रीजनिंग से संबंधित विषय से अपको प्रश्न पूछे जाते है।
Last Final Word

दोस्तों, अपको आज के इस आर्टिकल से पता चल गया होगा की DRDO क्या है?, DRDO के कार्य क्या है? इत्यादि जैसे डीआरडीओ से जुडी सारी जानकारी इस आर्टिकल में हमने दे दी है। आपको इस आर्टिकल से जुड़ा कोई भी प्रश्न हो, आप कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है।

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