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चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास और मौर्य वंश की स्थापना

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दोस्तों, हम सब भारत के इतिहास के बारे में अच्छे से जानते है। भारत में कई सारे महान राजा ने अपनी प्रतिभा, कौशल्य, बुध्धिमत्ता, बहादुरी, साहस और आपनी शक्ति से भारत के इतिहास में अपना नाम कायम किया है। भारत में कई सारे राजा हो चुके जैसे की पृथ्वीराज चौहान, सम्राट अशोक, समुद्रगुप्त, कृष्णदेवराय और महाराणा प्रताप जिन्हों ने भिन्न भिन्न काल में भारत में आपने साम्राज्य पर शासन किया है। इस प्रकार भारत आदि काल से शासको का देश रहा है।भारत को इन वीर शासको पर गर्व है। चलिए ऐसे ही एक महान राजा के बारे में इस आर्टिकल में बात करते है। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य जिन्हों ने मौर्य वंश की स्थापना की थी और वह मौर्य वंश के प्रमुख राजा थे। यह कहना बिलकुल भी गलत नही होगा की अगर चन्द्रगुप्त मौर्य नही होते तो मौर्य वंश की स्थापना कर पाना संभवित नहीं होता। चंद्रगुप्त मौर्य एक ऐसे महान राजा थे जिनकी वहज से ही भारत में मौर्य वंश का उदय हुआ। प्राचीन भारत में मौर्य साम्राज्य के स्थापना का पूरा श्रेय राजा चंद्रगुप्त मौर्य को ही जाता है।

दोस्तों आज के इस प्रकाशित किये गए आर्टिकल में आपके लिए मौर्य वंश की स्थापना करने वाले चन्द्रगुप्त मौर्य के जीवन की सम्पूर्ण छबी आपके सामने प्रस्तुत की गई है। चन्द्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य बहुत ही बड़ा था और उसका सही तरीके से शासन करके मौर्य वंश का नाम भारत के इतिहास के पन्नो पर अमर कर दिया।

यदि आपको चन्द्रगुप्त मौर्य के जिवन से सबंधित सभी प्रक्रिया के विषयो में माहिती जानना चाहत है तो आपको इस आर्टिकल को ध्यान से पडना होगा।

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चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास (History Of Chandragupta Maurya in Hindi)

नामचंद्रगुप्त मौर्य
जन्मजन्म ईसा मसीह के जन्म से लगभग 340 वर्ष
मृत्यु की तिथि297 ईशा पूर्व
शैक्षिक योग्यताशास्त्र और विज्ञान
वैवाहिक स्थिति
पत्नी का नाम
पुत्र

चंद्रगुप्त मौर्य कौन थे? (Who was Chandragupta Maurya)

चंद्रगुप्त मौर्य एक विशाल साम्राज्य के शासक थे। जिन्हों ने भारत में विशाल मौर्य वंश की स्थापना की और मौर्य वंश के सूर्य का उदय किया। मौर्य वंश के स्थापना से शरु करके उनके विकास तक की सम्पूर्ण क्रिया का श्रेय चंद्रगुप्त मौर्य को जाता है।उस दिन से लेकर आज तक सभी लोग चंद्रगुप्त मौर्य को मौर्य वंश के महान स्थापक के नाम से सभी लोग जानते है।

प्राचीन भारत के कई सारे छोटे छोटे खंडित राज्यों को साथ में लाकर उन्हें एक बड़े ही विशाल साम्राज्य की स्थापना करके चंदगुप्त मौर्य ने अपने शासनकाल की शरुआत की। यह बनाया गया नया सम्राज्य बहुत विशाल था। चन्द्रगुप्त मौर्य ने आपनी शक्ति और राजनीती और कौशल्य का उपयोग करके मौर्य वंश के साम्राज्य के शासनकाल को पूर्व बंगाल, असम से लेकर पश्चिम में अफगानिस्तान तक और वहा से बलूचिस्तान तक और उत्तर भारत के कश्मीर और नेपाल तक बढा लिया था। दक्षिण भारत के पठारी इलाकों में भी चंद्रगुप्त मौर्यने अपने साम्राज्य की नीव रख दी थी।

नंद साम्राज्य को समाप्त करके मौर्य वंश की स्थापना की घोषणा चंद्रगुप्त मौर्य अपने गुरु चाणक्य जी के साथ मिल कर दी थी। उन्हो ने नंद साम्राज्य का अंत ला दिया था। चंद्रगुप्त मौर्यने अपने कौशल्य ,साहस और रणनीति से भारत से लेकर आसपास के दुसरे अनेक देश के साम्राज्य पर भी जित हाँसिल की थी। चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने शासन को लगभग 23 साल तक सफलता पूर्वक चलाया। जिसके बाद उन्हों ने सभी प्रकार के सांसारिक सुख और मोह मायाओं को त्याग करने का निर्णय ले लिया। उनके इस निर्णय के बाद वे एक जैन साधु बन गए।

लोगो का कहेना है की उन्हों ने सल्लेखना जैसी कठिन तपस्या की थी। जिसको करना सबके बस की बात नहीं है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे व्यक्ति को एक ऐसे व्रत का पालन करना होता है जिसमे वह कुछ भी खा नहीं सकता और भूखे ही रहकर के आपने जीवन में भगवान की पूजा करनी होती है।

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चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म कब हुआ था? (When was Chandragupta Maurya Born?)

चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म ईसा मसीह के जन्म से पहले करीब 340 साल पूर्व हुआ था। चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म पाटलिपुत्र में हुआ था। उनकी माता का नाम मुरा और पिता का नाम सर्वार्थसिद्धि था। उनके उत्तराधिकारी का नाम बिंदुसार था।

चंद्रगुप्त मौर्य जी की शिक्षा (Education Of Chandragupta Maurya)

चंद्रगुप्त मौर्य को अपनी शिक्षा में कोई रूचि नहीं थी, वह आपना दिन इधर उधर के खेल खेलकर और अपने परिवार का ख्याल रखने में बिताते थे। एक दिन की बात है, महा पंडित चाणक्य जी गाव में परिभ्राम कर रहे थे और उनकी नज़र खेल रहे चंद्रगुप्त पर पड़ी। महा पंडित चाणक्य जी ने चंद्रगुप्त को देखते ही उनकी शक्तियो को भाप लीया था। इसके बाद त्वरित रूप से ही उन्होंने चंद्रगुप्त के पिता जी से इन्हें खरीद लेनी की वात का प्रस्ताव रखा।

चंद्रगुप्त के पिता की स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से उन्हों ने चन्द्रगुप्त को गोद दे देने का फैसला कर लिया। महापंडित चाणक्य के पास से चन्द्रगुप्त ने शास्त्र और विज्ञान का ज्ञान हांसिल किया, जिसकी मदद से उन्हों ने भारत के प्रमुख विस्तार में शासन किया और सम्पूर्ण देश पर अपने साम्राज्य को विस्तृत किया।

चंद्रगुप्त मौर्य का प्रारंभिक जीवन (Early Life Of Chandragupta Maurya)

यदि हम शासको के हादसों के बारे में बात करे तो यह मालूम पड़ता है की चाणक्य जी एक ऐसे योध्धा की तलाश कर रहे थे जो शक्तिशाली, बुद्धिमान ओर चालक हो और साथ ही साथ उसमे नंद वंश के साम्राज्य को पारजित करके उसका अंत लाने की काबिलियत रखता हो।

एक दिन चाणक्य जी मगध राज्य की परिभ्रमण कर रहे थे, उसी दौरान उनकी नजर अपने दोस्त के साथ खेल रहे चंद्रगुप्त मौर्य पर पड़ी। और उनको चन्द्रगुप्त में ये सारी खुबिया दिख गई थी।

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एसा कहा जाता है की जब चन्द्रगुप्त खेल रहे थे तब चाणक्य ने उनके खेल में नेतृत्व करने की खूबी को भाप लिया था, और उनके इसे कौशल्य से प्रभावित हो कर चाणक्य जी ने उनको शिक्षा प्रदान करने के बारे में निर्णय कर लिया था। इस घटना के बाद चन्द्रगुप्त को भिन्न भिन्न क्षेत्र के लिए उन्हें प्रशिक्षा देने से पहले चाणक्य जी उनको अपने पुत्र के तौर पर अपने साथ ले जाना चाहते थे। इस विचार को अमल में रखते हुए वे चन्द्रगुप्त के पिता के पास गए और अपनी इच्छा को प्रगट किया। चन्द्रगुप्त के पिता जी की परिस्थिति सही न होने के वजह से वे उनको गोद देने के लिए मान गई। पिताजी की संमति मिल जाने के बाद चाणक्य जी उन्हें लेकर तक्षशिला आ जाते है।

नंद राजा के साम्राज्य का अंत लाने के लिए चन्द्रगुप्त मौर्य को एक विशाल सेना की जरूरत थी इसीलिए उन्हों ने अपनी संपति को सेना में बदल ने का हुकुम दिया। जिसके बाद उनके पास विशाल सैन्य खड़ा हो चूका था।

चंद्रगुप्त मौर्य की भूमिका रूप व्यवस्था क्या थी? (What was the role system of Chandragupta Maurya)

मौर्य वंश के साम्राज्य में इंजीनियरिंग चमत्कारों जैसे जलाशय, सड़क, सिंचाई, मंदिर और भिन्न भिन्न तरह की खानों के लिए जाना जाता था। इसका मुख्य कारण यह है की चन्द्रगुप्त मौर्य जल के रास्तो के लिए ज्यादा पक्षधर नथी थे, लेकिन इसी वजह से मौर्य वंश का मुख्य मार्ग सड़क हुआ करता था। चन्द्रगुप्त ने अपने साम्राज्य के लिए कई सारे प्रकार की सड़के बनवाई थी।

सडको की रचना बड़ी अच्छे तरीके से की गयी थी। सड़क का विस्तार इतना रखा गया था की बड़े वाहन जैसे की बैलगाड़ी भी आसानी से गुजर सकती थी। उन्हों ने अपने समय में भूमि का प्रयोग करके पाटलिपुत्र से तक्षशिला को जोड़ने वाला एक राज्यमार्ग बनवाया था। इस निर्मित किये गए राज्यमार्ग की मदद से उनके साम्राज्य की विभिन्न राजधानी जैसे की नेपाल, देहरादून, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक जैसे स्थानों से जोड़ा गया था।

नंद वंश का अंत कैसे हुआ था? (How did The Nanda dynasty end?)

नंद वंश के शासक के द्वारा महान पंडित चाणक्य जी का अपमान किया गया था। जिसकी वजह से चाणक्य जी को उसके प्रति बहुत ज्यादा अरुचि हो गई थी। उनकी नंद राज्य के लिया घृणा की वजह से उन्हो ने नंद के साम्राज्य का अंत करने के लिए दृढ निश्चय कर लिया था।
चंद्रगुप्त से मिलने के बाद चाणक्य जी के लिए नंद के साम्राज्य को समाप्त करने के लिए एक अच्छा और काबिल योध्धा मिल गया था। चन्द्रगुप्त को प्रशिक्षित करने के बाद चाणक्य ने नंद वंश को समाप्त करने का अपना एकमात्र लक्ष्य को पूरा कर लिया था।

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चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की मदद से प्राचीन भारत के हिमालय क्षेत्र के शासक राजा पर्वत के साथ गठबंधन कर लिया था। महान चंद्रगुप्त मौर्य ने अपनी विशाल सैन्य के साथ नन्द वंश के साम्राज्य पर साल 322 ईसा पूर्व में आक्रमण कर दिया था और जित हांसिल करके नंद वंश को समाप्त कर दिया था।

नंद वंश के अंत के पश्चात मौर्य वंश का विस्तार (The expansion of the Mauray dynasty after the end of the nanda)

चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश को समाप्त करके भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर पश्चिम मैसेडोनियन सूबेदार पर आक्रमण करके जित हांसिल करली। उसके बाद चंद्रगुप्त मौर्य ने एक यूनानी शासक सेल्यूकस, जिसका साम्राज्य भारत देश के अधिक विस्तारो में फैला हुआ था उस पर आक्रमण करने की घोषणा कर दी थी।

एक जानकरी के आधार पर सेल्यूकस को अपनी बेटी की शादी चंद्रगुप्त मौर्य से करवाने के लिए प्रस्ताव को रखा और गठबंधन के बाद उसके राज्य में प्रवेश किया। सेल्यूकस की सहायता से चन्द्रगुप्त ने कई सारे साम्राज्य पर आपना अधिकार जमा लिया था। चंद्रगुप्त मौर्य ने उसके बाद दक्षिण एशिया तक साम्राज्य को बड़ा कर लिया था। चंद्रगुप्त मौर्य के भाग विस्तार के लिए पुरे एशिया में प्रसिध्ध हो गया था।

मौर्य वंश का उदय कैसे हुआ? (How did the Mauray dynasty rise)

मौर्य वंश के उदय के साथ जुड़े कई सारी बाते हमारे सामने आती है। मौर्य वंश की अधिक माहिती आपको ग्रीक, जैन धर्म और बौध्द धर्म एवम आदि ब्राह्मणवाद के गानों में आपको सम्पूर्ण जानकारी मिल जाएँगी। साथ ही उसमे आपको ये भी जानने को मिलेंगा की मौर्य वंश का उदय कैसे हुआ था।

कुछ लोको का यह भी कहना है की चन्द्रगुप्त मौर्य एक नंद राजकुमार थे और वो मुरा नामक एक नौकरानी से जन्मा एक नाजायज बच्चा था। लोगो का कहना है की चन्द्रगुप्त जाती से सबंधित थे जो पीपलीवाला विस्तार के प्राचीन गणराज्य के एक क्षत्रिय कबीले से थे।

दूसरी जानकारी के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य मुरार वंश से या तो इंडो-एशियन वंश के थे। यह वंश क्षत्रियों का हुआ करता था। चन्द्रगुप्त के आने से पहले भी यह वंश देखने को मिलता था पर यह उतना प्रचालन में नहीं आया था। मौर्य वंश को प्रचलित करके उसके शासनकाल को विस्तृत करने का श्रेय सिर्फ चन्द्रगुप्त को जाता है जिनकी कौशल के बदोलत आज हम सब मौर्य वंश के बारे में जानते है। चन्द्रगुप्त ने मौर्य वंश का नाम भारत के इतिहास में सफलता प्राप्त करने वाले महान साम्राज्य में कायम कर लिया।

चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु (Death of Chandragupta Maurya)

बिंदुसार को सिंहासन पर राजा के स्थान पर चंद्रगुप्त मौर्य को बैठाया गया था। बिंदुसार की पत्नी ने अशोक नामक एक बच्चे को जन्म दिया। अशोक ने भी आगे जाके सबसे शक्तिशाली राजा के रूप भारत के इतिहास में आपना नाम शामिल कर लिया था। चंद्रगुप्त मौर्य के द्वारा रचित इस विस्तृत साम्राज्य पूरी दुनिया में सबसे बड़ा बन गया था।

यह इतना बड़ा साम्राज्य बन चूका था की इसकी तुलना करना किसी के बसमे नहीं था। चंद्रगुप्त मौर्य का यह साम्राज्य करीब 130 साल तक आने वाली पीढ़ियों के लिए विस्तृत हो गया था। चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु 297 ईशा पूर्व के नजिक के समय में हुई थी। जिसका मार्गदर्शंन आध्यात्मिक संत गुरु भद्रबाहुके द्वारा किया गया था।

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चंद्रगुप्त मौर्य से जुड़े कुछ प्रश्न और सही जवाब

चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म कब हुआ था?(When was Chandragupta Maurya born?)

चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म पाटलिपुत्र के विस्तार में ईसा मसीह के जन्म से करीब 340 साल पहले किसी तिथि को हुआ था।

चंद्रगुप्त मौर्य किसका पुत्र था? (Whose son was Chandragupta Maurya?)

चंद्रगुप्त मौर्य के पिता का नाम सर्वार्थसिद्धि और माता का नाम मुरा था। वह बिंदुसार के उत्तराधिकारी थे।

चन्द्रगुप्त मौर्य के पिता कौन थे? (Who was the father of Chandragupta Maurya?)

सर्वार्थसिद्धि मौर्य चन्द्रगुप्त मौर्य जी के पिता जी थे।

चन्द्रगुप्त मौर्य की पत्नी का क्या नाम था? (What was the name of the wife of Chandragupta Maurya?)

चंद्रगुप्त मौर्य ने 3 बार शादी कि थी। प्रथम पत्नी का नाम दुर्धरा जिसकी चंद्रगुप्त मौर्य को बिन्दुसार का साम्राज्य मिला था।

चन्द्रगुप्त मौर्य की कितनी पत्नियां थी? (How many wifes did Chandragupta Maurya have?)

चंद्रगुप्त मौर्य ने 3 बार शादी कि थी। प्रथम पत्नी का नाम दुर्धरा जिसकी चंद्रगुप्त मौर्य को बिन्दुसार का साम्राज्य मिला था। चंद्रगुप्त मौर्य ने दूसरी शादी सेल्युकस की पुत्री कार्नेलिया हेलेना के साथ करी थी। जिससे उनको एक पुत्र प्राप्त हुआ था। जिसका नाम उन्हों ने जस्टिन रखा था। चन्द्रगुप्त मौर्य के 3 पत्नी का नाम चंद्र नंदिनी था।

दुर्धरा किसकी पुत्री थी? (Whose daughter was Durdhara?)

महाराज घनानंद जो की नंदवंशियो के पूर्वज थे उनकी पुत्री का नाम दुर्धरा था।

चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु कब हुई थी ? (When did Chandragupta Maurya die?)

आध्यात्मिक गुरु भद्रबाहु के निगरानी में चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु 297 ईशा पूर्व में हो चुकी थी।

चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु कौन थे?

गुरु महा पंडित चाणक्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य को प्रशिक्षित किया था इसीलिए वे उनके गुरु थे।

मौर्य साम्राज्य की स्थापना किसने की थी? (Who founded the Maurya Empire?)

मौर्य साम्राज्य के स्थापना करने का पूरा श्रेय चन्द्रगुप्त मौर्य जाता है।

चन्द्रगुप्त मौर्य का कार्यकाल? (Chandragupta Maurya’s tenure?)

चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 से लेकर 298 ईसा पूर्व के समय में शासन किया था। चंद्रगुप्त मौर्य ने करीब 23 साल तक सफलता पूर्वक शासन लिया था। उसके बाद उन्हों ने सभी मोह माया को त्याग कर दिया और एक जैन साधु बन गए थे।

चंद्रगुप्त मौर्य का उत्तराधिकारी किसको बनाया गया था?

बिंदुसार को सिंहासन पर राजा के स्थान पर जगह देकर चंद्रगुप्त मौर्य ने उत्तराधिकारी तौर पर घोषित किया था।

Last Final Word:

दोस्तों ये थी महान साम्राज्य के राजा चंद्रगुप्त मौर्य बारे में उनसे सबंधित सभी जानकारी। उम्मीद है की हम आपके तक उनसे सबंधित सारी जानकारी पंहुचा सके होंगे। अगर आपको इस आर्टिकल से सबंधित कोई सवाल हो तो आप हमें Comment के माध्यम से बता सकते है।

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