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भूस्खलन क्या है और कैसे होता है?

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दोस्तों आज के आर्टिकल हम भूस्खलन के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। आप इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ना ताकि इस विषय से संबंधित सभी सवालों के जवाब आपको मिल सके।

  • भूस्खलन की व्याख्या कई तरह से दी जा सकती है। भूस्खलन की अलग-अलग व्याख्या नीचे बताई गई है।
  • जब गुरूत्वाकर्षण के प्रभाव के कारण चट्टान तथा मिट्टी अचानक नीचे की और खिसकने लगती है तो उसे भू-स्खलन कहते हैं।
  • जब चट्टानें कुदरती या माननीय कारण से चटख जाती है तो गुरूत्वबल के कारण टूटकर धराशायी हो जाती हैं, जिसे भूस्खलन कहा जाता हैं।
  • भू-भाग के ढाल पर मिट्टी तथा चट्टानों के ऊपर से नीचे की ओर खिसकने, लुढ़कने या गिरने की प्रक्रिया को भूस्खलन कहते हैं।
  • आधार चट्टानों अथवा आवरण स्तर का भारी मात्रा में नीचे की ओर खिसकने की क्रियाा को भूस्खलन कहते हैं।
  • इस प्रकार भूस्खलन एक चट्टान के अकेले टुकड़े से लेकर मलबे के कई सारे बड़े तूफान तक के रूप में हो सकता है। भूस्खलन की वजह से भारी मात्रा में चट्टाने और मिट्टी कई सारे किलोमीटर तक फैल सकते हैं। भारी बारिश अथवा भूकंप भी भूस्खलन का कारण बन सकता है।
  • भू-स्खलन कई सारी दूसरी भौतिक आपत्ती जैसे कि भूकंप, ज्वालामुखी और सुनामी की तरह हानिकारक नहीं है। फिर भी यदि किसी विस्तार में अथवा तो कोई टाउन के पास भूस्खलन होता है तो अधिक मात्रा में जान माल को नुकसान होता है। भूस्खलन की तीव्रता का आधार चट्टानों की संरचना और सघनता पर निर्भर करता है। भूस्खलन के उदाहरण में शैल-बहाव, कीचड-बहाव, चट्टानी टुकड़ों का गिरना, मलवा का खिसकना  का समावेश होता है।
  • भूस्खलन की प्रक्रिया विश्वव्यापी है। यह प्रक्रिया छोटे बड़े पैमाने पर दुनिया भर में देखने को मिलती है। भू-स्खलन कुछ ही सेकंड से लेकर कुछ दिन और कुछ महीने मैं अचानक हो सकता है।

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भूस्खलन की परिभाषा

भू वैज्ञानिकों के अंतर्गत भूस्खलन ऐसी प्राकृतिक घटना है जिसमें गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव के कारण चट्टानों और मिट्टी के स्थान नीचे की ओर सरकने लगते हैं। भू-स्खलन के पीछे का एक कारण यह भी है कि नदियों द्वारा किए जाने वाले कटाव और लगातार भारी वर्षा के कारण मिट्टी तथा चट्टान की परतें कमजोर हो जाती है और गुरुत्वाकर्षण बल के कारण कमजोर परते नीचे की ओर सड़क नहीं लगती है। भूस्खलन की औसत गति लगभग 260 फीट प्रति सेकंड की होती है।

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भू-स्खलन होने के कारण

तीव्र ढाल:

पर्वतीय विस्तार और समुद्र तटीय क्षेत्रों के तीव्र ढाल भूस्खलन की घटना को तीव्रता से बढ़ा देता है। ज्यादा अधिक ढाल होने की वजह से गुरुत्वाकर्षण बल ज्यादा असर करता है और जिसके कारण पहाड़ी ढलानो का कमजोर हिस्सा तीव्र गति से सरककर नीचे आ जाता है।

जल:

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भूस्खलन की घटना के लिए कारण भूत तत्व में पानी का भी समावेश होता है। जब चट्टानों की ऊपरी कठोर परत के नीचे कोमल शैलौ का स्तर आया हुआ होता है तब बारिश होने की वजह से दरारो के जरीए पानी कोमल शैल मे प्रवेश कर जाता है। जिसके कारण यह परत फिसलन जैसे परत में बदल जाती है। इसके फलस्वरूप उपरी शैल सरक कर नीचे आ जाती है।

अपक्षय तथा अपरदन:

क्ले माइका, कलै साइट और जिप्सम इत्यादि जैसे खनिज पदार्थ की ज्यादा मात्रा वाले चट्टानों में अपक्षय तथा अपरदन की प्रिया तीव्र गति से होती है। चट्टानों में मौजूद मिश्रित खनिज तत्वों के पानी में अपक्षय तथा अपरदन की क्रीया के कारण उस विस्तार में भू-स्खलन की घटना देखने को मिलती हेै।

वन अपरोपण:

मानव ने अपनी सुख सुविधा और आर्थिक स्तर को बढ़ाने के इस दिल से जंगल लोग को नष्ट किया है। वनस्पति की जड़े मिट्टी की ऊपरी परत को पकड़े रखती है। जिसके कारण जमीन की ऊपरी परत पानी से अपक्षय कम होती है। परंतु जंगलों के नष्ट हो जाने की वजह से उस विस्तार की मिट्टी कमजोर पड़ जाती है और अपरदन की क्रिया तीव्र गति से होती है।

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निर्माण कार्य:

भू-स्खलन के लिए निर्माण का कार्य भी जवाबदार है। पहाड़ी विस्तार पर कटान द्वारा सड़कें और रेलवे लाइन के निर्माण के कारण पहाड़ी कमजोर हो जाती है। जिसके कारण अस्थिर ढाल गिरने लगता है।

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भूकंप और ज्वालामुखी:

भूकंप और ज्वालामुखी जैसी प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाले कंपन तथा विस्फोट द्वारा पहाड़ी ढलान नीचे की ओर गिरने लगता है।

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भूस्खलन को रोकने के उपाय:

  • स्थानांतरित कृषि जगह पर स्थायी और सिढिनुमा कृषि को प्रोत्साहित करना।
  • जंगलों को नष्ट होने से बचाना तथा नए पेड़ पौधे लगाना।

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भू-स्खलन से पहले:

  • भू-स्खलन होने से पहले नीचे बताई गई तैयारी कर लेनी चाहिए।
  • भू-स्खलन के बारे में अपनी काउंसिल से माहिती ले लेनी चाहिए कि आपके विस्तार में क्या कभी भूस्खलन होते रहे हैं या फिर आगे भू-स्खलन कब हो सकता है।
  • धरती हिलने की घटना को जांच करें। वाहन चलाते समय ध्यान रखे।

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भू-स्खलन के समय:

  • भू-स्खलन के समय तुरंत कार्यवाही करें। घटनास्थल से दूर हो जाना ही बेहतर सुरक्षा का रास्ता है। अपने पालतू पशुओं को भी अपने साथ सुरक्षित जगह पर ले जाइए।
  • आपके पड़ोसियों को भी सचेत करें और यदि उन्हें मदद की जरूरत हो तो स्थान छोड़ने में उनकी सहायता करें।
  • आपातकालीन सेवाओं तथा आपके स्थानिक काउंसिल को उसके बारे में बताने के लिए संपर्क करें।

भू-स्खलन के बाद:

  • भू-स्खलन से प्रभावित हुए स्थान पर से तब तक दूर रहे जब तक पूरी तरह से उसकी जांच पड़ताल नहीं हो जाती।
  • यदि इस घटना के दौरान आपकी किसी भी प्रॉपर्टी को नुकसान हुआ हो और नष्ट हो गई हो तो, बीमा उद्देश्य के लिए इसका विवरण लिखें और फोटो खींच ले।

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भूमिका:

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  • भारत में मानव प्रेरित भू-स्खलन संख्या में बढ़ोतरी हुई है जो साल 2004 से लेकर 2016 तक करीबन 28% निर्माण प्रेरित भू-स्खलन हुए हैं। इस घटना के बाद चीन (9%), पाकिस्तान (6%), फिलिपिन्स (5%), नेपाल (5%) और मलेशिया (5%) का स्थान है।
  • भू-स्खलन जो तीसरी सर्वाधिक विनाशकारी प्राकृतिक आपदा है, उसके प्रबंधन पर हर साल करीबन 400 अरब डॉलर का यह किया जा रहा है।

भारत से संबंधित लैंडस्लाइड डाटा

  • Global Fatal Landslide Database  यानी कि GFLD के अंतर्गत, एशिया महाद्वीप को सर्वाधिक प्रभावित माना गया है, जहाँ 75% भू-स्खलन की घटना विस्तार में घटित हुई है।
  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अंतर्गत भारत के कुल स्थलीय क्षेत्र का करीबन 12.6% भूस्खलन-प्रवण संकटग्रस्त विस्तार के अंतर्गत आता है।
  • सिक्किम की सुभेद्यता का 4,895 वर्ग किलोमीटर का विस्तार भू-स्खलन के प्रति संवेदनशील है। जिसमें से 3,638 वर्ग किमी विस्तार मानव जनसंख्या, सड़कों और अन्य अवसंरचनाओं से घिरा हुआ है।

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Landline Warning System:

कुछ ही समय पहले पूर्वोत्तर हिमालय के सिक्किम दार्जिलिंग विस्तार में एक वास्तविक समय आधारित भू-स्खलन चेतावनी प्रणाली की शुरुआत की गई है। इस प्रणाली के माध्यम से 24 घंटे से पहले ही भूस्खलन की चेतावनी जारी की जा सकती है। इसमें 200 से ज्यादा सेंसर से आए हुए हैं। ईस सेंसर की मदद से भूगर्भीय तथा हाइड्रोलॉजिकल मापदंड जैसे कि वर्षा और पोर प्रेशर तथा भूकंपीय गतिविधियों का मापन कर सकते हैं।

केरल में स्थित अमृता विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सिक्किम राज्य आपदा प्रबंध के सहयोग से इसे स्थापित किया है। इस विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में केरल के मुन्नार जिले में एक भू-स्खलन चेतावनी प्रणाली की शुरुआत की जा चुकी है।

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Last Final Word

दोस्तों यह थी भूस्खलन के बारे में जानकारी। हम उम्मीद करते हैं कि हमारी जानकारी से इस विषय से संबंधित आपके सभी सवालों के जवाब आपको मिल गए होगे। अगर अभी भी आपके मन में कोई सवार हो गया हो तो हमें कमेंट के माध्यम से अवश्य बताइए। यदि आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए।

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