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भारतीय शेयर बाजार में उतार चढ़ाव क्यों और कैसे होता है?

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शेयर बाजार में सिर्फ XYZ कंपनी की डिमांड बढ़ने से ही उसमे उतार-चढाव नहीं आते, उतार-चढाव होने के कई और भी कारण है। तो आज के इस आर्टिकल में हम उन सभी कारणों के बारे में पूरी डिटेल्स से जानेंगे की किन-किन परिवर्तनों के कारण शेयर बाजार में इतना उतार-चढाव होता है? लेकिन उससे पहले शेयर बाजार की कुछ जरुरी बातो को आपको समजना पड़ेगा। जैसे की सेंसेक्स (Sensex) क्या होता है?, किस तरह यह सेंसेक्स बनता है?, इसमें कितनी कंपनिया होती है?, किनसे शेयर बेचे जाते है इसके अलावा भी बहुत कुछ जानते है इस आर्टिकल में, इसलिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़े।

शेयर बाजार और सेबी (SEBI) क्या है?

शेयर बाजार (Stok Exchange) एक ऐसा प्लेटफोर्म है जहा शेयर, बोंड्स म्यूचुअल फंड्स इत्यादि की खरीदी डिग्री होती है। इस बाजार में भाग लेने वाले निवेशक, शेयर ब्रोकर्स और कंपनियों के काम-काज करने के लिए शेयर बाजार या SEBI (सेबी) में रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। अब SEBI (सेबी) क्या है? तो शेयर बाजार को Securities & Exchange Board of India (SEBI) के नियमो अनुसार चलना पड़ता है।

शेयर का अर्थ (Meaning of Share)

शेयर का सीधा अर्थ होता है हिस्सा। शेयर बाजार में किसी कंपनी में हिस्से को शेयर कहा जाता है। इन शेयरों को अलग-अलग लोगो द्वारा ख़रीदा और बेचा जाता है। इस मार्किट में भाग लेने वाले निवेशको, शेयर दलालों और व्यापारियों को व्यापार का संचालन करने के लिए शेयर बाजार और SEBI के साथ स्वयं को पंजीकृत कराना पड़ता है और अगर आपको शेयर बाजार की ज्यादा जानकारी नहीं है तो आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की बोम्बे स्टोक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange) सिर्फ भारत का ही नहीं बल्कि हमारे पुरे एशिया खंड का सबसे पुराना स्टोक एक्सचेंज है और इसकी स्थापना 1875 में हुई थी, यानि की करीब-करीब 145 साल पहले शेयर बाजार भारत में आया हुआ है।

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सेंसेक्स क्या होता है? (What is Sensex?)

Sensex नाम का शब्द अंग्रेजो के “Sensitive Index” से लिया गया है। Sens+Ex को हिंदी में संवेदी सूचकांक (Sensory Index)भी कहा जाता है। अब जैसा नाम है वैसा ही उसका काम है, एक ऐसा सूचकांक जो बहुत ही ज्यादा संवेदनशील (Sensitive) हो, इसीलिए इसे सेंसेक्स कहा गया।

सेंसेक्स बनता कैसे है? (How is Sensex Formed?)

इसमें 30 बड़ी कंपनियों के शेयर मूल्यों में होने वाले उतार-चढाव को दर्ज किया जाता है। इसे संवेदन सूचकांक यानि सेंसेक्स इसीलिए कहना ठीक है क्योकि यहाँ बहुत छोटी-मोटी घटनाओ को घटित होने पर भी ऊपर-निचे होने लगता है।

सेंसेक्स किन-किन कंपनियों से मिलकर बनता है?

सेंसेक्स को BSE 30 या BSE Sensex भी कहा जाता है। BSE सेंसेक्स 30 सबसे मुख्य कंपनियों के शेयरों पर आधारित है और आपके लिए यह जानना जरुरी है की यह 30 शहेरो की लिस्ट समय-समय पर बदलती रहेती है और मुंबई शेयर बाजार जरुरत के अनुसार इस लिस्ट में बदलाव करता रहता है, लेकिन सेंसेक्स में कुल शहेरो की संख्या 30 ही रहती है, उसमे कुछ कम-ज्यादा नहीं होता।

अब इन 30 कंपनीओं का सिलेक्शन कैसे होता है?

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बीएसई 30 में से सबसे बड़े और सबसे सक्रीय रूप से कारोबार करने वाले शहेरो में से एसी 30 कंपनियो को लिया जाता है, जो की भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रो का प्रतिनिधित्व करती है।

बाजार पूंजीकरण (Market Cap/Market Capitalization) क्या है?

इसे कंपनी द्वारा कुल जारी किए गए शहेरो की संख्या को प्रति शेयर बजार भाव से गुना करके प्राप्त किया जाता है। अगर 1 कंपनी ने 1 रुपये की किंमत के 1 लाख शेयर जारी किए है, तो कंपनी की कुल पूंजी 1 लाख रुपये होगी। अब, अगर बाद में इस कंपनी के 1 शेयर की बाजार में किंमत बाद में 10 रुपये हो गई, तो कंपनी की बाजार पूंजी 10 लाख रूपये हो जाएगी।

शेयर बाजार में कौन से शेयर बेचे जाते है? (Which Shares are Sold?)

किसी भी कंपनी का मार्किट केप का वो हिस्सा जो बेचने के लिए बाजार में उपलब्ध हो सकता है, वो फ्री फ्लोट बाजार मार्किट केप होगा और उसीके आधार पर सेंसेक्स की गणना की जाती है। आमतौर पर प्रमोटरो का हिस्सा और सरकार का हिस्सा पूंजी में से निकाल दे तो, बाकि बची पूंजी बाजार में बिकने के लिए उपलब्ध हो सकती है, यानि इन शेयरों को बेचा जा सकता है।

अब, हम आम लोगो की समज के लिए उन कारणों को जानने का प्रयास करेंगे, जिसकी वजह से शेयर बाजार में इतना उतार-चढाव आता है। इसमें ज्यादातर लोगो का मानना ऐसा है, की जब किसी कंपनी के शेयर की मांग बढ़ जाती है तो उसके शेयर का मूल्य भी बढ़ जाता है, लेकिन इसके अलावा भी और भी कई कारण है। जैसे की, यदि दो देशो के बिच कारोबारी और रणनीतिक संबंध बेहतर बनने की उम्मीद हो तो अर्थव्यवस्था की तरक्की के हिसाब से निवेशक शेयर बाजार में पैसे लगाने लगते है।

मानले अगर हमारे प्रधानमंत्री मोदीजी अमेरिका की विदेश यात्रा पर जाते है तो, अमेरिका में रहने वाले विदेशी निवेशक इस बात का अंदाजा लगा सकते है की मोदीजी यहाँ के राष्ट्रपति के साथ कई समजौते कर सकते है। जिससे इन दोनों देशो के बिच संबंध और भी अच्छा होने वाला है, इसी उम्मीद में अमेरिका के निवेशक भारत में बड़ी मात्र में पैसे लगाना शुरू करते है। जिससे पुरे शेयर बाजार में उतार-चढाव शुरू हो जाता है।

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शेयर बाजार में उतार-चढाव के कारण :

1. Monsoon

भारत एक कृषिप्रधान देश है, अगर मोसम विभाग मोंसून के अच्छे बारिश का अनुमान लगाता है तो शेयर बाजार में तेजी आती है। निवेशक यह अनुमान लगाते है की अच्छी बारिश से अनाज का उत्पादन ज्यादा होगा। इसका मतलब की कृषि आधारित उद्योग की तरक्की ज्यादा होगी। इन उद्योग में ट्रेक्टर, खाद, बिज, कीटनाशक, बाइक और FMCG कंपनिया शामिल है।

निवेशको को लगता है की इन कंपनियों का कारोबार और मुनाफा बढेगा यानि कृषि से जुडी कंपनियों की खरीददारी बढ़ जाती है। जिससे की एसे उद्योगो में और भी ज्यादा पैसा निवेश किया जायेगा, इस कारण निवेशको को ज्यादा प्रॉफिट मिलेगा।

2. RBI (Reserve Bank of India)

अगर रिजर्व बैंक मैदिक निति की घोषणा में ब्याज दर में कमी करे तो कर्ज के दर सस्ते होगे। इससे बैंक से लोन लेने वाले लोगो की संख्या बढ़ेगी और आखिर में बैंको को लाभ बढेगा। इस वजह से निवेशक बैंक और NBFC के शेयर की खरीददारी करते है और उनके भाव में तेजी आती है और अगर ब्याज दर बढेगा तो इसके भाव में गिरावट आएगी।

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3. सरकारी निति (Government Policy)

अगर सरकार ब्याज दर में कमी या वृद्धि करे या राजकोषीय निति जिसमे कर की दरो में कमी या वृद्धि या वाणिज्य निति, औद्योगिक निति, कृषि निति यानि एसी कोई भी सरकारी निति में अगर सरकार द्वारा कोई भी परिवर्तन किया जाता है, तो इन सभी क्षेत्रो से जुडी सभी कंपनियों के शेयरों के दामो में उतार-चढाव आता है और अमेरिकी केन्द्रीय बैंक फ़ेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरो में बदलाव पर दुनिया भर की नजरे होती है। निवेशक मानते है की अगर अमेरिका में ब्याज दरे बढ़ी तो विदेशिय निवेशक भारत जैसे बाजार से पैसा निकालकर वहा लगायेंगे। इस वजह से यहाँ के शेयर बाजार में खलबली शुरू हो जाती है। इससे भारतीय बाजार में कमजोरी आती है।

4. आंतरराष्ट्रिय घटनाक्रम (International Events)

आंतरराष्ट्रिय घटनाक्रम भी शेयर बाजार के भाव पर असर डालते है, जैसे वर्तमान में जो व्यापार युद्ध (Trade War) शुरू है वो- उत्तर कोरिया विवाद, ईरान-अमेरिका विवाद या रूस-अमेरिका विवाद इन सबकी वजह से युद्ध की आशंका की वजह से निवेशक शेयर से पैसे निकाल कर सोने में निवेश करते है, इस वजह से भी शेयर बाजार में उतार-चढाव होता है।

5. बजेट (Budget)

बजेट पेश करने के दौरान भी सरकार द्वारा की गई सकारात्मक या नकारात्मक घोषणाओं की वजह से भी अलग-अलग कंपनियों के शेयरों के दाम भी ऊपर-निचे होते है।

6. राजनीति (Politics)

इसमें देश में राजनितिक स्थिरता यानि बहुमत की सरकार या गठबंधन की सरकार या फिर राजनितिक वातावरण जिसमे वामपंती या दक्षिणपंती सरकार एसे कारण भी निवेशक के निर्णयों को बहुत हद तक प्रभावित करते है। मानले, अगर देश में वामपंती की सरकार आएगी तो वें सरकार देश के कई क्षेत्रो में विदेशी निवेश का विरोध करेगी, जैसे की “मल्टी ब्रांड रिटेल” (Multi Brand Retail)। जिससे की उस क्षेत्र की कंपनिया जिसमे बिग बाज़ार, विशाल मेगा मार्ट्स जैसी कंपनियों के शेयर में गिरावट आएगी।

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7. जुंड प्रभाव (Herd Effect)

इस समूह प्रभाव (Herd Effect) की वजह से भी शेयर बाजार में अधिक बिग वाली या खरीददारी की जाती है। इसकी वजह कभी कोई अफवा या गुप्त जानकारी हो सकती है। जिस वजह से बड़ी संख्या में एक साथ बिग वाली या खरीददारी की वजह से शेयर में भाव में उतार-चढाव होता है। कभी-कभी शेयर बाजार में उतार-चढाव डर या अनिश्चितता की वजह से भी होता है।

तो यह थे कुछ बड़े-बड़े कारण, इसके अलावा भी कई छोटे-छोटे कारण भी कभी-कभी शेयर बाजार को हिलाकर रख देते है। यानि यहाँ पर आप इतना तो समज ही सकते है की शेयर बाजार में उतार-चढाव की सही-सही भविष्यवाणी करना बहुत ही मुश्किल है, क्योकि यहाँ सूचकांक बहुत ही संवेदनशील है और बहुत छोटे-छोटे मुद्दों की वजह से अपना रुख बदलता रहता है।

Last Final Word

दोस्तों! इस आर्टिकल के जरिये हमने आपको कई जानकारी दी है जैसे की ‘शेयर बाजार में उतार-चढाव क्यूँ और कैसे आते है?’, ‘सेबी क्या है?’, ‘शेयर का अर्थ’, ‘शेयर बाजार में उतार-चढाव के कारण’ आदि। अगर आपको इस आर्टिकल से जुड़ा कोई प्रश्न हो, आप कमेंट बोक्स में पूछ सकते है।

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