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भारत ने 1900 से लेकर अब तक ओलंपिक में कितने पदक जीते है?

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ओलंपिक के इस खेल में में भारत ने प्रथम बार 1900 की साल में भाग लिया था। नौर्मं प्रिचर्ड को एथलीट के खेल में पेरिस भेजा गया था। पेरिस में उन्होंने पुरुषो की 200 मीटर की हर्डल रेस में दो रजत पदक जीते थे। भारत ने 1920 की साल में सर्व प्रथम बार एक टीम भेजी थी ओलंपिक खेल के लिए उस के बाद भारत ने हर ग्रीष्मकालीन खेलो में भाग लिया है। 1964 से भारत ने कई बार शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भी भाग लिया है। 2016 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की शुरुआत तक, भारत के पास कुल 26 पदक थे, जो सभी ग्रीष्मकालीन खेलों में जीते गए थे, भारत अभी तक शीतकालीन खेलों में पदक जीतने में सफल नहीं हुआ है। भारत ने 1900 की साल से अबत तक कितने ओलंपिक जीते है, उसकी जानकारी हमारे इस आर्टिकल में दी गई है।

पेरिस, साल 1900 नॉर्मन प्रिचर्ड को रजत पदक पुरुषों की 200 मीटर और 200 मीटर हर्डल्स

भारत ने पेरिस में सर्वप्रथम ओलंपिक खेल की शरुआत की थी। इस ओलंपिक में नॉर्मन प्रिचर्ड ने भाग लिया था। ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में पहले भारतीय प्रतिनिधि ने एथलेटिक्स में पांच पुरुष स्पर्धाओं में भाग लिया था। इस में जिनमें 60 मीटर, 100 मीटर, 200 मीटर, 110 मीटर और 200 मीटर बाधा दौड़ शामिल है। यही नहीं उन्होंने 200 मीटर स्प्रिंट और 200 मीटर बाधा दौड़ (हर्डल रेस) में नॉर्मन प्रिचर्ड ने दो रजत पदक जीते थे। भारत आजाद होने से पहले उन्होंने देश के लिए सर्वप्रथम “इंडिविजुअल” मेडल जीता था।

एम्स्टर्डम साल 1928 भारतीय हॉकी पुरुष टीम, स्वर्ण पदक

साल 1928 में भारत ने हॉकी में अपना पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता था। भारतीय हॉकी टीम ने पांच मेचो में 29 गोल किये थे। भारत और नीदरलैंड के साथ खेले मेच में ध्यान चंद फ़ाइनल में हैट्रिक सहित 14 गोल किए थे। यह ओलंपिक में भारतीय हॉकी पुरुष टीम का सर्वप्रथम पदक था।

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1932 की साल में लॉस एंजिल्स में भारतीय हॉकी पुरुष टीम, स्वर्ण पदक मिला

1932 की साल में खेली गई हॉकी मैच में भारतीय हॉकी टीम ने सर्व प्रथम जापान को 11- 1 से पराजित किया था। आगे जेक संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ खेले मैच में भारतीय टीम 24-1 के साथ जित हासिल की थी हॉकी में भारत का दूसरा ओलंपिक स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया गया था। इस वर्ष रूपसिंह जो ध्यान चंद के भाई थे उन्हों ने भी इस खेल में भाग लिया था।

1936 की साल में भारतीय हॉकी पुरुष टीम को स्वर्ण पदक बर्लिन में मिला

भारत ने साल 1936 में बर्लिन के साथ हॉकी का मैच खिला था जिसमे ध्यान चन्द्र के नेतृत्व में भारत ने ओलंपिक स्वर्ण की हैट्रिक पूर्ण की थी। उस साल में भारत ने पांच मेच में 38 गोल किए थे। फ़ाइनल मुकाबले में भारतीय टीम 8-1 के साथ जित हासिल की थी।

1948 की साल लंडन में भारतीय हॉकी पुरुष टीम, स्वर्ण पदक 

भारत जब अंग्रजो की गुलामी से आजाद हुआ, उसके बाद भारतीय टीम द्वारा भारत का पहला स्वर्ण पदक आया था। भारत और लंडन के बिच हुए मैच में भारत ने तिन मैच में 19 गोल करके फाइनल मैच में प्रवेश लिया था। मेजबान ग्रेट ब्रिटन को भारत ने 4-0 से पराजित करके चौथा ओलंपिक स्वर्ण पदक हासिल किया था। 1948 की साल में बबीर सिंह सीनियर ने तिन मैच में 19 गोल किए थे।

1952 की साल हेलसिंकी में भारतीय हॉकी पुरुष टीम, स्वर्ण पदक

भारत और हेलसिंकी के साथ साल 1952 में मैच हुआ था। भारतीय हॉकी टीम 5 साल तक लगातार स्वर्ण पदक हासिल करती आरही थी, इस के साथ ही में उन्हों ने ठंड की स्थित को भी काबू कर लिया था। बनवीर सिंह सीनियर ने 9 गोल किये थे तिन मैच में, जो नेदरलैंड की टीम के खिलाफ फाइनल में पाच गोल शामिल थे। यह हॉकी फाइनल में किसी भी खिलाडी द्वारा किया गया सबसे ज्यादा गोल था।

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केडी जाधव को कांस्य पदक, पुरुषों की बैंटमवेट कुश्ती में 1952 की साल हेलसिंकी 

स्वतंत्र भारत के बाद ओलंपिक में व्यक्तिगत पुरुषो की फ्रीस्टाइल बैटमवेट श्रेणी में कस्य पदक को हासिल करने वाले सर्वप्रथम व्यक्ति खशाबा दादासाहेब जाधव थे। इसं होने अपनी ओलंपिक की यात्रा के लिए घर घर भटक कर धन जमा किया था। इस के बाद अपनी महेनत से उन्हों ने ओलंपिक का कांस्य पद हासिल किया था।

भारतीय हॉकी पुरुष टीम, स्वर्ण पदक, मेलबर्न में, साल 1956

भारतीय हॉकी टीम के लिए हॉकी का गोल्ड मैडल खेल का 6 गोल्ड मेडल रहा था। गर्व की बात तो यह है की भारत की तेम ने सामने वाली टीम को एक भी गोल करने अ अवसर नहीं दिया था। आखिरी मुकाबला भारत का पाकिस्तान के साथ हुआ था। भारत ने पकिस्त्तन को 1-0 पराजित कर गोल्ड मैडल अपने नाम किया था।

भारतीय हॉकी पुरुष टीम, रजत पदक, रोम में साल 1960 

ओलंपिक में भारत का स्वर्णिम काल 1960 में रोम में समाप्त हुआ। फाइनल में भारतीय टीम को पाकिस्तान के खिलाफ 1-0 से हार का सामना करना पड़ा, जिससे टीम को सिल्वर मेडल यानि रजत पदक से संतोष करना पड़ा था।

भारतीय हॉकी पुरुष टीम, स्वर्ण पदक – टोक्यो में साल 1964

भारतीय टीम पाकिस्तान टीम के साथ ओलंपिक में पराजित होने बाद 1964 की साल में टोक्यो में भारत ने गोल मैडल हासिल किया था। भारतीय टीम ने समूह में 4 मैच को जितकर सेमीफ़ाइनल में ऑस्टेलिया को पराजित किया था। भारत ने तिन बार पाकिस्तान के साथ मैच खेला और पेनल्टी स्ट्रोक गोल के कारण 1-0 के साथ जित हासिल की थी।

भारतीय हॉकी पुरुष टीम, कांस्य पदक – मेक्सिको सिटी में साल 1968

भारतीय हॉकी टीम का ओलंपिक में प्रभुत्व कम होता जा रहा था, वही दूसरी और यूरोप का हॉकी के मैच में ज्यादा प्राधन्या मिल रही थी। सेमीफाइनल में भारत ऑस्टेलिया के साथ 2-1 से पराजित हो गया था। लेकिन भारत ने मेक्सिको, स्पेन जापान को पराजित कर कांस्य पदक हासिल किया था। भारत को पहली बार सर्वोच्च का दूसरा स्थान नही मिल पाया था।

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भारतीय हॉकी पुरुष टीम, कांस्य पदक – म्यूनिख में साल 1972

भारतीय हॉकी टीम ने साल 1972 में म्यूनिख ने एक बहुत अच्छा मैच खेला भारत ने दूसरा ओलंपिक कांस्य पदक जीता था। पाकिस्तान के साथ भारत ने 4 मैच जीते थे और दो दरो गेम्स खेली थी। उस के बाद समेफाइनल में इजराइल टीम पर हमले के कारण मैच दो दिन तक बंध रही थी। फाइनल मैच में भर ने स्पेन को पराजित कर स्वर्ण पदक जीता था। यह भारत का ओलंपिक हॉकी में आखरी गोल्ड मैडल था।

लिएंडर पेस, कांस्य पदक – पुरुषों का एकल टेनिस, अटलांटा में साल 1996

भारत ने ओलंपिक में मैडल जीते 4 सीजन यानि 16 साल बीत चुके थे भारत ने आखरी बाद 1972 में मैडल जीता उसके बाद भारत ने एक भी पद नही जीता था। 1996 की साल में भारत ने अटलांटा के साथ पुरुषो की टेनिस की मैच में कांस्य पदक जीता जो भारत का 17 साल में पहला मैडल था।

कर्णम मल्लेश्वरी, कांस्य पदक – महिलाओं की 54 किग्रा वेटलिफटिंग, सिडनी में साल 2000

कर्णम मल्लेश्वरी ने 2000 की साल में ओलंपिक वेटलिफ्टिंग के खेल में 54 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जितने वाली सर्वप्रथम भारतीय महिला थी। इन्होने स्नैच वर्ग में 110 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 130 किग्रा भार उठाया था, और कुल 240 किग्रा उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।

राज्यवर्धन सिंह राठौर, रजत पदक – मेंस डबल ट्रैप शूटिंग, एथेंस में साल 2004

2004 की साल में भारत के लिए ओलंपिक में मैडल जितने वाले सर्वप्रथम निशानेबाज भारतीय सैनिक राज्यवर्धन सिंह राठौर थे। संयुक्त अरब अमीरात के शेख अहमद अलमकतूम ने अजेय बढ़त हासिल की और भारतीय सेना के कर्नल ने रजत पदक सुनिश्चित करने के लिए दोनों मिट्टी के लक्ष्यों को गिरा दिया।

अभिनव बिंद्रा, स्वर्ण पदक – पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग, बीजिंग में साल 2008

साल 2008 में ओलंपिक के खेल में सर्वप्रथम भारत को अपना व्यक्तिगत गोल्ड मैडल मिला था। जी भारत के लिए बहुत ही ख़ुशी की बात थी इस मैडल को जितने वाले अभिनव बिंद्रा थे उन्होंने पुरुषो की 10 मीटर एयर राइफल में एक ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता था। भारतीय निशानेबाज ने अपने आखरी शॉट के साथ करीबन 10.8 का स्कोर हासिल किया था।

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विजेंदर सिंह, कांस्य पदक – मेंस मिडिलवेट बॉक्सिंग, बीजिंग में साल 2008

2008 बीजिंग ओलंपिक: विजेंदर सिंह इस संस्करण में अपनी मातृभूमि के लिए पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज बने। हरियाणा के मुक्केबाज ने कार्लोस गोंगोरा को 9-4 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया, एक जीत जिसने देश के लिए पदक सुनिश्चित किया। हालांकि, एमिलियो कोरिया के खिलाफ कांस्य पदक के मैच में उन्हें 5-8 से हार का सामना करना पड़ा और स्वर्ण जीतने का उनका सपना अधूरा रह गया।

सुशील कुमार, कांस्य पदक – पुरुषों की 66 किग्रा कुश्ती, बीजिंग में साल में साल 2008

सुशील कुमार ने अपने शुरुआती मुकाबले में हारने के बाद रेपेचेज दौर में 70 मिनट के भीतर तीन मुकाबले जीतकर कांस्य पदक जीता। यह 56 वर्षों में कुश्ती में भारत का पहला ओलंपिक पदक था।

गगन नारंग, कांस्य पदक – पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग, लंदन में साल 2012

काउंबैक की वजह से गगन नार्ग पिछले ओलंपिक मैच में हार गई थे। इस अआद साल 2012 में पुरिशो की 10 मीटर एयर राइफल में तीसरे स्थान के साथ सिल्वर मेडल जीता था। चीन इटली में के खिलाफ गगन नारंग ने फाइनल खेल खेला था।

सुशील कुमार, रजत पदक – पुरुषों की 66 किग्रा कुश्ती, लंदन में साल 2012

में उद्घाटन समारोह के लिए भारत के ध्वजवाहक सुशील कुमार से देश को एक बड़े पदक की आशा थी लेकिन सुशील को गंभीर चोट लगी थी उन्होंने अपनी पूरी ताकत से फाइनल में पानी जगह बना ली थी लेकिन बहुत तनाव के कारण उनका शरीर कमजोर हो गया और वे तत्सुहिरो योनेमित्सु से फाइनल मैच में पराजित हो गए थे। भारत के सर्वप्रथम व्यक्तिगत ओलंपियन सुशिल कुमार है जिन्होंने 2 बार ओलंपिक जीता है।

विजय कुमार, रजत पदक – पुरुषों की 25 मीटर रैपिड पिस्टल शूटिंग, लंदन 2012

निशानेबाजी में प्रसिद्ध विजय कुमार ने २५ मीटर रैपिड पिस्टल में रजत पदक के साथ ही अपना नाम रिकौर्ड बुक में दर्ज करवाया है, उन्होंने चीन के डिंग फेंग को हराकर फाइनल में प्रवेश किया, जो फाइनल में छठे दौर में गए थे।

मैरी कॉम, कांस्य पदक – महिलाओं की फ्लाईवेट मुक्केबाजी, लंदन में साल 2012

मेरी कौम ने 2012 की साल में फ्लाईवेट में कांस्य पदक लंडन में जीता था। मैरी कौम एक अच्छी फ्लाईवेट होने बावजूद भी सेमीफाइनल में ब्रिटिन के चैपियन निकोला एडम्स से पराजित हो गई।

योगेश्वर दत्त, कांस्य पदक – पुरुषों की 60 किग्रा कुश्ती, लंदन में साल 2012

साल 2012 लंडन में तिन ओलंपिक में भाग लेने वाले अनुभवी पहलवान योगेश्वर दत्त ने अपने बचपन का सपना पूर्ण किया उन्होंने 60 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया है। उन्हों ने आखरी पढाव में उत्तर कोरिया के ऋ जोंग म्योग को 1:02 मिनिट में पराजित किया था।

साइना नेहवाल, कांस्य पदक – वूमेंस सिंगल्स बैडमिंटन, लंदन में साल 2012

भारत के लिए बेडमिंटन के खेल में बदलाव साल 2012 में आया था। साइना नेहवाल ने ओलंपिक में मेदाल्जिता था, नेहवाल भारतीय बेडमितान के इतिहास प्रथम महिला खिलाडी थी। चीन के साम खेले खेल में नेहवाल ने ब्रॉन्ज़ मैडल जीता था।

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पीवी सिंधु, रजत पदक – वूमेंस सिंगल्स बैडमिंटन, रियो में साल 2016

भारत की पीवी सिन्धु ने साल 2016 में सिल्वर मैडल जीता था। पीवी सिन्धु ने शटलर रिया ओलंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन करके कांस्य पदक हासिल किया था। सिंधु और स्पेन की कैरोलिना मारिन के बिच 83 मिनिट का फ़ाइनल मैच हुआ था जिसमे मारीं की जित हाई थी, पीवी सिन्धु हार गई थी लेकिन उन्होंने अपना नाम भारतीय बैडमिटन के इतिहास में लिखवा दिया था।

साक्षी मलिक, कांस्य पदक – वूमेंल 58 किग्रा रेसलिंग, रियो में साल 2016

भारत के ओलंपिक दल में विलंब से प्रवेश करने वाली और ओलंपिक पदक जितने वाली प्रथम भारतीय महिला पहलवान साक्षी मलिक थी। साक्षी ने 58 किग्रा में कांस्य पदक जितने के लिए किर्गिस्तान की ऐसुलु टाइनीबेकोवा की 8-5 से पराजित किया था। भारत का लगातार तिन खेलो में प्लान्पिक कुश्ती पदक जीता था।

मीराबाई चानू, रजत पदक – महिलाओं की 49 किग्रा भारोत्तोलन, टोक्यो में साल 2020

भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने के लिए कुल 202 किग्रा भार उठाकर रियो 2016 के प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया। यह पदक उनका पहला ओलंपिक पदक था। और वे भारत की दूसरी वेटलिफ्टर महिला बनी, जो भारत का पहला टोक्यो ओलंपिक पदक था।

लवलीना बोरगोहेन, कांस्य पदक – वूमेंस वेल्टरवेट (64-69 किग्रा), टोक्यो में साल 2020

अपने पहले गेम में, लवलीना बोर्गोहिन ने टोक्यो 2020 में महिलाओं के 69 किग्रा में कांस्य पदक जीता, जो सेमीफाइनल में तुर्की की शीर्ष वरीयता प्राप्त बुसेनाज़ सुरमेनेली से हार गईं। लवलीना बोर्गोहेन ने क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे की निएन-चिन चेन को हराकर पदक हासिल किया।

पीवी सिंधु, कांस्य पदक – महिलाओं का एकल बैडमिंटन, टोक्यो में साल 2020

बैडमिंटन क्वीन पीवी सिंधु सुशील कुमार के बाद दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाली प्रथम भारतीय महिला और दूसरी भारतीय एथलीट बनीं। पीवी सिंधु ने चीन की ही बिंग जिओ को 21-13, 21-15 से हराकर महिला एकल में सिल्वर मैडल हासिल किया था, जो भारत देश का तीसरा मेडल था।

रवि कुमार दहिया, रजत पदक – पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती, टोक्यो में साल 2020

रवि कुमार दाहिया ने साल 2020 में 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती के फाइनल विश्व चैपियन आरओसी से पराजित हो गए थे लेकिन उन्होंने रजत पदक हासिल किया था। यह कुश्ती के खेल में दूसरा और भारत का 9 माँ रजत पदक था।

भारतीय हॉकी टीम, कांस्य पदक – पुरुष हॉकी, टोक्यो में साल 2020

साल 1980 के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीमने 40 साल में पहली बार ओलंपिक पदक जीता था। साल 1972 के पश्चताप भारत देश का तीसरा ओलंपिक सिल्वर मैडल था और कुल मिलाकर 12 ओलंपिक मेडल था, एवं 2020 का 5 पदक था।

बजरंग पुनिया, कांस्य पदक – पुरुषों की 65 किग्रा कुश्ती, टोक्यो में साल 2020

टोक्यो 2020 में कुश्ती के खेल में कांस्य पदक जितने वाले तीसरे व्यक्ति पहलवान बजरंग पुनिया थे। उन्होंने पुरुषों की 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती प्लेऑफ में कजाकिस्तान के दौलत नियाज़बेकोव को पराजित कर,सिल्वर मेडल हासिल किया था।

नीरज चोपड़ा, गोल्ड मेडल, मेंस जेवलिन थ्रो – टोक्यो में साल 2020

नीरज चोपड़ा अभिनव बिंद्रा के बाद भारत के दूसरे व्यक्तिगत ओलंपिक गोल्ड मैडल को हासिल किया है। यह किसी भी ओलंपिक खेलों में भारत का पहला ट्रैक एंड फील्ड पदक था। नीरज चोपड़ा ने 87.58 मीटर के भाला फेंक के साथ स्वर्ण पदक जीता। यह टोक्यो 2020 में भारत का सातवां पदक था।

Last Final Word

दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल में हमने आपको जानें भारत ने 1900 से लेकर अब तक ओलंपिक में कितने पदक जीते हैं? के बारे में बताया हम उमीद करते है, की हमारा आज का यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा और सामान्य ज्ञान से जुडी सभी जानकारी से आप वाकिफ हो चुके होंगे।

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