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भारत में यूरोपीय आगमन

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नमस्कार दोस्तों! आज के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे भारत में यूरोपीय आगमन के बारे में। भारत के सामुद्रिक रास्तो को खोज करके 15वि शताब्दी के अंत में हुई जिसके बाद यूरोपीय का भारत मे आने का आरंभ हुआ, यधपि यूरोपीय के लोग भारत के अलावा और कई देशो में अपनी उपनिवेश बनने में स्फाल हुए पर इनमे से कई का मुख्य आकषर्ण भारत ही था। 17वि  सदी के अंत तक यूरोपीय कई एशियाई स्थानों पर अपना शासन बना चुके थे। 18 वि सदी तक तो कई जगह पर अपना अधिकार जमा लिया था।लेकिन भारत 19वि सदी के बाद ही अंग्रेजो का एकाधिकार हो पाया था।

भारत की समृद्धि को देखकर पश्चिमी देशों में भारत के साथ व्यापार करने की इच्छा बहुत पहले से थी। यूरोपीय जहाजी को  द्वारा सामुद्रिक रस्ते का पता लगाना इन्हीं आकांक्षाओ  का परिणाम था। 13वीं सदी के आसपास मुगलों का शासन  भूमध्य समुद्र और उसके पूरब के क्षेत्रों पर हो गया था, और इसी कारण यूरोपी देशों को भारतीय माल समान की आपूर्ति ठप्प पड़ गई। और उस पर भी इटली के वेनिस नगर में कर  देना युरोपिय को  रास नहीं आता था। कोलंबस भारत का पता लगाने अमरीका पहुँच गया और सन् 1487-88 में पेडरा द कोविल्हम नाम का एक पुर्तगाली नाविक पहली बार भारत के तट पर मालाबार पहुँचा। भारत पहुचने वाले लोगो में पुर्तगाली सबसे पहला था, इसके बाद डच का आगमन हुआ और डचों ने पुर्तगालियों से कई युद्ध भी किए। भारत के अलावा श्रीलंका में भी डचों ने पुर्तगालियों को हरा दिया। लेकिन डचों का मुख्य आकर्षण भारत नही बल्कि  दक्षिण पूर्व एशिया के देश थे। एवं  उन्हें अंग्रेजों ने हरा दिया जो मुख्यतः भारत पे अपना अधिकार करना चाहते थे। आरंभ में तो इन यूरोपीय देशों का मुख्य काम व्यापार ही था,लेकिन भारत की राजनैतिक स्थिति को देखकर उन्होंने यहाँ साम्राज्यवादी और औपनिवेशिक नीतियाँ अपनानी आरंभ की।

भारत में यूरोपीय आगमन

  • आपुर्तगाली का आगमन साल 1498 में हुआ था।
  • डच का आगमन इस्वी 1596 साल में हुआ था।
  • अंग्रेज का आगमन इस्वी 1608 वर्ष में हुआ था।
  • डेनिस का आगमन वर्ष 1616 में हुआ था।
  • फ्रेंच के लोगो का आगमन साल 1664 में हुआ।
  • स्वीडिश देश के लोगो का आगमन साल 1771 में हुआ था।

भारत में यूरोपीय कंपनी की स्थापना

  • पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना भारत में वर्ष 1498 में हुई थी।
  • अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना भारत में साल 1600 में की थी।
  • डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना भारत में 1602 वर्ष में हुई थी।
  • डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना साल 1620 को की गई थी।
  • फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की शरुआत भारत में साल 1664 में हुई।
  •  स्वीडिश ईस्ट इंडिया कंपनी शरुआत वर्ष 1731 में हुई।

यूरोपीय कंपनियों की भारत में पहली कोठी

  • पुर्तगाली ने  भारत के कोचीन में पहली कोठी की  स्थापना साल 1503 हुई थी।
  • अंग्रेजो ने भारत के मसूलीपट्टनम में पहली कोठी की स्थापना वर्ष 1611 मे की थी।
  • डच ने भारत के मसूलीपट्टनम में पहली कोठी की स्थापना वर्ष 1605 में कई गई थी।
  • डेनिश ने भारत के तंजौर में पहली कोठी का निर्माण साल 1616 में की गई थी।
  • फ्रेंच ने भारत के सूरत पहली कोठी की स्थापना वर्ष 1668 में की गई थी।

भारत में पुर्तगालियो का आगमन 

वास्को-डि-गामा

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  • 17 मै 1498  को पुर्तगाल के वास्को-डी-गामा भारत के तट पर आया और इसके बाद मार्ग तय हुआ था।
  • वास्को डी गामा की मदद गुजरती व्यापारी अब्दुल मजीद ने की थी।
  • वास्को डी गामा ने कालीकट के राजा से व्यपारी का अधिकार प्राप्त किया।
  • 1499 की साल में वस्को डी गामा स्वदेशी लौट गया और उसके वापस पहुचने के बाद ही लोगो को भारत के समुद्रकी रस्ते की जानकारी मिली।
  • वास्को डी गामा जिस माल को लेकर गई थे,60 गुना से ज्यादा दामो बिका था।
  • साल 1500 में पेड्रो अल्वारेज कब्राल के भारत आगमन तथा 1502 में वास्को डि गामा के दुबारा आने से कालीकट, कोचीन तथा कन्नानोर में व्यापारिक केन्द्रों की स्थापना हुई।
  • बाद में इनका स्थान गोवा ने लिया था।

फ्रांसिस्को-द-अलमेडा

  • पुर्तगाल भारत में सबसे पहला वायसराय बन कर आया था
  • साल 1505 ईसवी में पुर्तगालियों ने भारत देश में अपना  वायसराय फ्रांसिस्को-द-अलमेडा को बनाया जिसका कार्यकाल वर्ष 1509 ईसवी तक रहा था।
  • अपने कार्यकाल के दौरान अलमेडा सिर्फ युद्ध में व्यस्त रहा फलस्वरूप पुर्तगाल ईस्ट इंडिया कंपनी का ज्यादा विस्तार नहीं हो सका।
  • अपने कार्यकाल के दौरान उसने ‘ब्लू वाटर पॉलिसी’ शांत जल की निति के रूप में जाना जाता है,जेसी सामुद्रि निति का संचालन किया।
  • वे 1508 में चौल में युद्ध गुजरात के शासक से हार गया लेकिन 1509 में उसने महमूद बेगडा मिश्र और तुर्की के शासक समुद्री बेड़े को युद्ध में पराजित किया था।

अल्फांसों दि अल्बुकर्क

  • 1503 ई में अल्फांसों दि अल्बुकर्क सेना का कमाण्डर तथा 1509 में भारत में पुर्तगालियों का वायसराय बनाया गया। यह भारत में दूसरा पुर्तगाली वायसराय था।
  • पहला फ्रांसिस्को डि अल्मिडा था जो 1505-9 ई. तक गवर्नर रहा.
  • अल्बुकर्क ने 1510 में बीजापुर के शासक आदिलशाह से गोवा को  छीन लिया गया।
  • अल्बुकर्क ने पुर्तगालियों को भारतीय महिलाओं से विवाह करने को प्रोत्साहित किया।
  • 1511 की साल में दक्षिण पूर्व एशिया के व्यापारिक मंदी  मलक्का और कुरमुस  पर आधिपत्य स्थापित किया गया और उस समय में पुर्तगाली भारत में शक्तिशाली नौसैनिक के रूप में उभरे
  • 1515 ई. में अल्बुकर्क की मृत्यु हो गई।

नीनो-डी-कुन्हा

  • नीनो-डी-कुन्हा भी एक वायसराय था, जिसने कई महत्वपूर्ण कार्य की है। यह 1529 ईस्वी में वायसराय का कार्यभार संभाला।
  • नीनू डी कुन्हा ने गुजरात के राजा बहादुर शाह से मुलाकात के समय उनकी हत्या करदी और 1535 साल में दिव को जीता था।
  • 1559 में दमन को जीता।
  • नीनू डी कुन्हा ने कोचीन को छोडकर गोवा को अपनी राजधानी बनाई।
  • भारत से अंततः पुर्तगाली 1961 में वापस गए।

पुर्तगालियो का पतन का कारण

  • शक्तिशाली राजवंशों का उदय।
  • जेसुइट मिशनरियों की गतिविधियों से उत्पन्न राजनीतिक भय।
  • अन्य शक्तिशाली यूरोपीय शक्तियों का आगमन जैसे अंग्रेज, डच और फ्रांसीसिओं का।
  • समुद्री डकैती।
  • ईसाई धर्म को जबरन थोपना और मुसलमानों का उत्पीड़न।
  • गुत्प रूपसे व्यपार करना और लूटमार को अपनी निति का हिस्स बनाना।
  • महिलाओ के साथ वैवाहिक निति
  • भारत में जनता के प्रति धार्मिक असहिष्णुता

ब्राजील की खोज की चाह।
साल 1580 इस्वी में पुर्तगाल स्पेन के राजा के साथ जुड़ गया था, और उसके पश्चाताप  साल 1588 इस्वी में नौसेना युद्ध में अंग्रेजों ने स्पेन को करारी शिकस्त दी और स्पेन के साथ-साथ पुर्तगाली साम्राज्य भी लगभग समाप्त हो गया।

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डच का भारत में आगमन 

  • पुर्तगालियो की समुद्री देखते हुए डच भी भारत एवं श्रीलंका की और आने के लिए आकर्षित हुए थे सबसे पहले 1598 में डच का जहाज अफ्रीका और जावा के मार्ग से भारत पहुचा था। भारत पहुचने वाला पहला डच यात्री कर्नालियन हाउटमैन था।
    भारत मे से व्यपार करने के लिए डच ने 1602 वर्ष में प्रथम डच ईस्ट कपंनी की स्थापना की थी।
  • और इस समय में भारत में अंग्रेजो और फ़्रांसिसी के लोगो का आगमन हो गया था।
    डचो ने मसाले के स्थान पर भारतीय कपड़ो की नियत पर अधिक महत्व दिया था।
    डच ने पहली व्यापर की कोठी साल 1605 में मसुलिपट्टानम में और दूसरी कोठी पुलिकत में स्थापित की थी।
  • भारत के पूर्वी एवं पश्चिमी किनारे पे डचों ने  अपनी कपंनीया स्थापित करना शुरू कर दी

डच कोठी

  1. 1605 में मसूलीपट्टनम में
  2. 1610 में पुलिकट में
  3. 1616 में सूरत में
  4. 1641 में बिमिलिपट्टम में
  5. 1645 में करिकल में
  6. 1653 में चिन्सुरा में
  7. 1658 में कासिमबाजार
  8. 1658 में पटना
  9. 1658 में बालासोर व नेगापट्टम
  10. 1663 में कोचिंन
  • और इसके बाद पुर्तगालियो के व्यापारिक सत्ता को तोड़ने के लिए एक व्यापारिक संस्था वोक (VOC) बनाई और इस पुर्तगालियो की व्यापरिक सत्ता को तोड़ने में और अपनी व्यापारिक सत्ता को जोड़ने में काफी मदद मिली थी।
  • 17 वीं सदी में डच ने पुर्तगालियों के प्रभाव को लगभग समाप्त करके मसालेऔर कपड़ो के व्यापार पर अपना एकाधिकार सुनिश्चित कर लिया। और इसके अलावे अन्य व्यापारों में भी अपना प्रभुत्व स्थापित करने लगे। ऐसे में अब मुख्य रूप से इनका एक ही दुश्मन बचा और वह थे अंग्रेज। डच और अंग्रेजो के बीच युद्ध शुरू हो गया। डच और अंग्रेजो के बीच यूरोप में 3 आंग्ल-डच युद्ध हुए और अंग्रेजों की जित हुई। 1717 में अंग्रेजों को मुगलों द्वारा व्यापार करने हेतु शाही फरमान मिला था। अब अंग्रेजो की व्यापर शक्ति बढ ने लगी और डचो को व्यापर शक्ति कम होती गई।
  • 1759 की साल में बेदरा का युद्ध हुआ और इसमें अंग्रेजो की जित हुई डच बुरी तरह से हर गए इस तरह से भरत में डच की महत्वाकांक्षाओ का अंत हुआ।

डच के पतन का कारण

  • डच के अधिकारिओ और कर्मचारियों में कपंनी के प्रति निष्ठां कुशल नेतृत्व एवं उत्साह की भावना का अभाव था।
  • डच लंबे समय तक पराधीन रहा था उसके पास साधनो की कमी थी जबकि दूसरी ओर इंग्लैंड सदा स्वाधीन रहा था और उसके पास साधनों की कमी नही थी।
  • बाद के वर्षों में डच व्यापारियों ने भारत की अपेक्षा दक्षिण पूर्वी एशिया के मसालों के दीपों की ओर अपना ध्यान केंद्रित किया।
  • यूरोप में अंग्रेजों तथा फ्रांस ईश्वर से युद्ध करके अपनी स्थिति को समुद्र से अधिकार खो जाने के बाद उनकी शक्ति बहुत कम हो गई
  • अंग्रेजो के बढ़ते व्यपार की वजह से डच का व्यपार कम हो गया और दोनों में युद्ध हुआ डच का पतन हो गया।
  • अंग्रेजो ने एक के बाद सभी डच के क्षेत्र को कब्जे में कर लिया था।

  अंग्रेजो का भारत में आगमन 

  • इंग्लेंड के नाविकों को भारत का मार्ग साल 1578 तक पता नही चल पाया था।
    1578 में सर फ्रांसिस ड्रेक ने अंग्रेज नाविक लिस्बन जाने वाले एक जहाज को लुट लिया था। इस जहाज में भारत जाने वाले रस्ते का नक्शा था। 31 दिसंबर 1600 को कुछ व्यारियो ने इंग्लैंड की रानी एलिजाबेथ को ईस्ट इंडिया कपंनी की स्थापना का अधिकार पत्र दिया। महारानी ने पूरब देशो के साथ व्यपार करने की अनुमति दी।
  • साल 1599 में अंग्रेज व्यापारी मिल्डेनहाल भारत में आये और उन्हें देख कर भारत में व्यापार करने के मनोबल में अधिक वृद्धी हुई।
  • ईस्ट इंडिया कपंनी की जब स्थापना हुई जिसमे 217 सदस्य थे एवं उसके प्रथम गवर्नर टॉमस थे और इनका उदेश भारत में व्यपार करना एवं लाभ कमाना था।
  • 24 अगस्त 1608 की साल में “रेड ड्रेगन” नाम के जहाज से व्यपारी उदेश्य से अंग्रेजो का सुरत बंदरगाह में आगमन हुआ था।
  • भारत आने के बाद अंग्रेजो की सुरत में पहली कोठी की स्थापना करने का प्रयास किया गया था, लेकिन 1609 की साल में कैप्टन हाकिंस को जेम्स पहले के राजदूत के रूप में मुग़ल के बादशाह जहांगीर के दरबार में भेजा गया था। पुर्तगालियो के षडयंत्र के कारण उन्हें खली हाथ लौटना पडा और सुरत में पहली कोठी स्थापित करने का प्रयास असफल रहा।
  • अंग्रेजो ने इसके बाद मसुलिपट्टानम में अपनी पहली कोठी की स्थापना की थी।
  • 1611 इस्वी में कैप्टन मिड्डलेटन ने सूरत के पास सवाली होल में पुर्तगालियो के जहाज बैडो को पराजित किया इससे मुग़ल बादशाह जहांगीर बहुत प्रभावित हो गए और साल 1613 में सुरत अंग्रेजो को कोठी की स्थपना करने की अनुमति दी सुरत में अंग्रजो की कोठी स्थापित हो गई।
  • 1615 में जेम्स पहले का राजदूत मुग़ल बादशाह जहाँगीर के दरबार में गया और अलग अलग स्थानों में कोठी की स्थापना करने की अनुमति मांगी और मुग़ल बादशाह जहांगीर से अनुमति प्राप्त हो गई।
  • साल 1622 में अंग्रेजो ने ओमुर्जपुर पर कब्ज़ा कर लिया और पुर्तगालियो के आक्रमण से चकित हो गए।
  • साल 1623 में अंग्रेजो ने भड़ोच और अहमदाबाद में भी अपनी कोठी स्थापित कर दी थी।
  • साल 1633 में सुरत की किलेबंदी की गई थी।
  • साल 1633 में उड़ीसा के बालासोर में कोठी की स्थापना की थी।
  • 1639 की साल में अंग्रेजो ने राजा से मद्रास लीज पर लिया और उसकी किलेबंदी कर दी।
  • 1640 के वर्ष में अंग्रेजो ने चंद्रगिरी के राजा से मद्रास चीन लिया और वहा पर “सेट जार्ज” किले की स्थपना की और कोठी खोली।
  • 1651 इस्वी में बंगाल के हुगली में अपने कारखाने के निर्माण किया।
  • साल 1658 में बंगाल, उड़ीसा और कोरोमंडल तट “सेंट जार्ज” के किले के नियंत्रण में आ गए थे।
  • 1651,1656 और 1672 के फरमानों के तहत अंग्रेजो को कई तरह की चुंगी और कर में मुक्त मिली और वे भारत के राजाओ को कुछ निश्चित राशी देने लगे।
  • 1661 ईस्वी में ब्रिटेन के राजकुमार ‘चार्ल्स द्वितीय’ का विवाह पुर्तगाली राजकुमारी ‘कैथरीन ऑफ ब्रिगेन्जा’ के साथ हुआ। इसमें पुर्तगालियों ने मुंबई को दहेज के स्वरूप में चार्ल्स द्वितीय को दिया। एवं चार्ल्स द्वितीय ने इसे ईस्ट इंडिया कंपनी को 10 पौंड वार्षिक किराए पर दे दिया।
  • अंग्रेजी शासक ‘जाॅर्ज चारनोक’ ने बंगाल के कोलकता में ‘फोर्ट विलियम’ का निर्माण किया गया।
  • 1707 की साल में ओरंगजेब की मृत्यु के बाद मुग़ल साम्राज्य बहुत ही कमजोर हो गया था और इससे अंग्रेजो को अपने शक्ति का विस्तार करने में बहुत मदद मिली।
  • 10000 सालान राशी देने के एवज में सुरत के सभी करो से अंग्रेजो को मुक्ति मिल गई
  • मुग़ल में ढले गए कपंनी के सिक्के को पुरे मुग़ल साम्राज्य में वैधता प्रदान की घोषणा कर दी गई।
  • 757 ईस्वी में रॉबर्ट क्लाइव (अंग्रेज) और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच प्लासी का युद्ध हुआ था इसमें अंग्रेज की विजयी हुई  इसके पश्चात बंगाल में अंग्रेजों का प्रभुत्व जम गया।
    1764 ईस्वी में हेक्टर मुनरो (अंग्रेज) और बंगाल के नवाब मीर कासिम, अवध के नवाब सुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के बीच बक्सर का युद्ध हुआ और इसमें नही  अंग्रेज जित गए।
Last Final Word 

दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल में हमने भारत में यूरोपीय आगमन के बारे में जानकारी दी जैसे की पुर्तगालियो का आगमन, वास्को डी गामा का भारत में आगमन, फ्रांसिस्को द अलमेडा का आगमन, पुर्तगालियो के पतन का कारण, डच का भारत में आगमन, डच के पतन का कारण  अंग्रेजो का भारत में आगमन और यूरोपीय आगमन से जुडी सारी जानकारी से वाकिफ हो चुके होंगे।

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