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जानिए भारत मे बैंक विलय और अधिग्रहण का इतिहास

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आज के इस आर्टिकल में हम भारत मे बैंक विलय और अधिग्रहण के इतिहास बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे। आर्टिकल को अंत तक पढ़ना ताकि इस विषय से संबंधित आपके सवालों के जवाब आपको मिल सके।

भूमिका

साल 1969 में इंदिरा गांधी सरकार ने देशभर के बैंकिंग सेक्टर मैं कई सारे परिवर्तन लाए थे। पहले 14 और फिर कई सारी निजी बैंकों को सरकारी बैंक में परिवर्तित कर दिया। इस घटना के बाद देश के दूरदराज के इलाकों के लोगों तक बैक व्यवस्था पहुंची और लोगों में बचत और सरकारी राहत का एक मजबूत और भरोसेमंद तंत्र स्थापित हुआ। परंतु वर्तमान समय में यही सरकारी बैंक परेशानियों से जूझ रही है। दिसंबर 2017 तक यह सभी सरकारी बैंक के करीब 9 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का NPA हो चुका है। इसके कारण बैंक को घाटा हो रहा है।

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भारत में बैंक विलय का इतिहास

भारत में बैंक विलय और अधिग्रहण पिछले कुछ सालों से वैश्विक बाजार में संस्थानों के बीच चर्चा का विषय बनकर उभर रहा है। छोटे या घाटे में चल रहे संस्थानों का आपसी विलय की उनका बड़े संस्थानों में विलय करना दुनिया की हर अर्थव्यवस्था में पाया गया है। मुख्य रूप से बैंकिंग क्षेत्र में यह विचारधारा नया विचार नहीं है।

जर्मनी की बात करें तो डूबे हुए कर्जे के चलते घाटे में चल रही बैंकों को बड़ी बैंको में विलय कर दिया गया था। भारत में भी इस प्रकार की घटनाएं सालों से चल रही है। भारतीय बैंक संघ के आंकड़ों के अनुसार भारत में 1985 से लेकर अब तक छोटे बड़े 49 परिवर्तन हो चुके हैं। कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं।

साल 2017 को भारतीय स्टेट बैंक के सहयोगी बैंकों(State Bank of Patiala, State Bank of Travancore, State Bank of Bikaner and Jaipur, State Bank of Hyderabad, State Bank of Mysore, Mahila Bank)  का विलय एसबीआई बैंक में कर दिया गया था।

साल 2010 मैं स्टेट बैंक ऑफ इंदौर को एसबीआई बैंक में परिवर्तित कर दिया गया था।

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साल 2008 में स्टेट बैंक ऑफ़ सौराष्ट्र को परिवर्तित करके एसबीआई में विलय कर दिया था।

साल 2004 में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स एंड ग्लोबल ट्रस्ट बैंक का विलय कर दीया गया था।

साल 1993 से लेकर 1994 में पंजाब नेशनल बैंक और न्यू इंडिया बैंक का परिवर्तन किया गया था। इस विलय को दो राष्ट्रीय बैंकों का पहला विलय भी कहा जाता है।

छोटे छोटे स्तर पर भी बैंक का परिवर्तन देखने को मिला है जैसे कि हिंदुस्तान कमर्शियल बैंक का पंजाब नेशनल बैंक में परिवर्तित होना, काशीनाथ भारतीय स्टेट बैंक का एसबीआई बैंक में परिवर्तित होना, बनारस स्टेट बैंक का बैंक ऑफ बरोड़ा में परिवर्तित होना, HDFC की ओर से Centurion bank of Punjab मे अधिग्रहण हो गया।

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भारत में सार्वजनिक बैंक

  • भारत में सार्वजनिक क्षेत्रों के 21 बैंक कार्यरत है।
  • बैंकिंग सेक्टर का कुल NPA मैं इन बैंकों का हिस्सा 90% जितना है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लगभग 8.9 लाख करोड रुपए डूब चुके हैं।
  • पिछले सालों में यानी कि 2017 से लेकर 2018 के दौरान भारतीय बैंक को करीबन 12 लाख करोड़ रुपए के लोन राइट ऑफ करने पड़े थे।
  • इस समय के दौरान भारत के बड़े सबसे सार्वजनिक बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को 40196 करोड़ रुपए राइट ऑफ करने पड़े थे।

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Last Final Word

तो दोस्तों यह थी भारत के बैंक के विलय और अधीग्रहण के बारे में जानकारी। हम उम्मीद करते हैं कि हमारी जानकारी से आपको फायदा रहा होगा। अगर हमारा आर्टिकल आपको पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए।

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