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भारत छोड़ो आंदोलन का इतिहास

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दोस्तो हम सब जानते है कि भारत पर कई सालो तक अंग्रेज़ो ने अपना शासन चलाया था। अंग्रेज़ो ने भारत के लोगों पर अत्याचार करने की कोई सीमा नहीं रखी थी। अंग्रेजों के इस अत्याचार के सामने कई सारे नेताओं ने अपने नेतृत्व में भारत की आजादी के लिए कई सारे आंदोलन किये थे। स्वतंत्रता संग्राम के इस आंदोलन में महान नेताओं ने हिंदुस्तान के लोगों को अपने हक के लिए आवाज उठाने के बारे में जानकारी देकर सभी को एक जुथ करके अंग्रेजो के खिलाफ अनेक आंदोलन किए। भारत को आजादी दिलाने में कई सारे नेता ने अपना योगदान दिया है जैसे कि महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, भगत जी, लाला लजपत राय इत्यादि ने अपने नेतृत्व में भारत की आजादी के लिए खड़े होकर अपना योगदान दिया। साथ ही कई सारी महिलाओं ने भी भारत की आजादी के लिए अपना समान रूप से योगदान दिया था जिसमें विजय लक्ष्मी पंडित, सुचेता कृपलानी, सावित्रीबाई फुले, सरोजिनी नायडू, लक्ष्मी सहगल, रानी लक्ष्मीबाई, कस्तूरबा गांधी और कमला नेहरू जैसी बहादुर महिलाएं शामिल है। इन सभी लोगों ने कई सारे स्वतंत्र संग्राम से जुड़े आंदोलन किए थे जिसमें से आज हम भारत छोड़ो आंदोलन के बारे में संपूर्ण बात करेंगे।

दोस्तो, आज के प्रकाशित किए गए लेख में हम भारत छोड़ो आंदोलन के साथ संबंधित कुछ बातें जैसे की, आंदोलन करने का मुख्य कारण क्या रहा था, यह आंदोलन करने का प्रस्ताव किसने रखा था, किस नेता के नेतृत्व में किया गया था, जैसे सभी बातों का उत्तर आपको इस लेख में मिल जाएगा। हमें उम्मीद है आप इस आर्टिकल को ध्यान से पढेंगे, ताकि भारत छोड़ो आंदोलन के बारे में सभी तरह की जानकारी मिल सके।

भारत छोड़ो आंदोलन का इतिहास (History of Quit India Movement in Hindi)

आज़ादी कभी भी मांग के नहीं मिल सकती है उसे छीनना पडता है – सुभाष चंद्र बोस। सुभाष चंद्र बोस का भारत छोड़ो आंदोलन एक ऐसा आंदोलन था जिसकी वजह से अंग्रेजों को भारत को छोड़ना पड़ा था और भारत को आजाद करना पड़ा था।

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भारत ने सालो तक अंग्रेजो की गुलामी की है। भारत के इस दौर को कभी भी भुला नहीं जा सकता। भारत देश पर अनेक भिन्न भिन्न आक्रमणकारियों के द्वारा चढ़ाई करने में आई थी इसके बावजूद भारत देश को कोई मिटा नहीं पाया।

भारत देश में महान नेताओं ने जन्म लिया था किसके नेतृत्व में हमें आजादी मिल सकती है। भारत की आजादी के लिए इन सभी महान पुरुषों, कार्यकर्ताओं तथा उन सभी लोगों को श्रेय जाता है जिन्होंने अपने प्राण की आहुति आंदोलन। के दर्मियान की थी।

भारत की आजादी के लिए हिंदुस्तान के लोगों ने कई सारे सत्याग्रह की जिनके दौरान भारत के लोगों को गिरफ्तार,लाठीचार्ज और बिना किसी कारण के उन पर अत्याचार करना जैसी चीजों का सामना करना पड़ा था। यह सब करके वह लोग स्वतंत्र संग्राम के साथ जुड़े सभी लोगो की आवाज़ दबा देना चाहते थे।

भारत की आजादी के लिए स्वतंत्रता संग्राम करने की शुरुआत शहीद मंगल पांडे ने की थी। जिसकी वजह से उनको आजादी की शुरुआत करने वाले पहले नेता के रूप से जाना जाता है। मंगल पांडे ने साल 1857 मैं आंदोलन करने की शुरुआत की थी।

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भारत की आजादी से जुड़े इतिहास को देखें तो सबसे आखरी और मजबूत स्वतंत्र संग्राम का आंदोलन भारत छोड़ो आंदोलन रहा है। इस आंदोलन के दौरान सभी भारतवासी एक ही स्वर में भारत छोड़ो के नारे लगाते हुए अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे थे।

भारत के महान नेताओं, महान पुरुषों और क्रांतिकारियों के द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा स्वतंत्र संग्राम से जुड़ा आंदोलन भारत छोड़ो आंदोलन साबित हुआ है। भारत को इस आंदोलन के बाद आजादी मिल चुकी थी जिसकी वजह से इस आंदोलन को स्वतंत्रता के लिए सबसे ज्यादा श्रेय जाता है।

भारत छोड़ो आंदोलन के दरमियान साल 1942 में भारत के आधे से ज्यादा लोगो ने सड़कों पर उतर कर भारत को आजाद करने के लिए भारत छोड़ो के नारे लगाने शुरू किए। यह भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था कि एक ही समय पर,एक साथ सभी लोगो ने एक जुथ होकर देश की आज़ादी के लिए अपनी आवाज़ उठाई थी।

भारत छोड़ो आंदोलन महात्मा गांधी और कांग्रेस के कुछ बड़े नेता और क्रांतिकारी के नेतृत्व में हुआ था। यह आंदोलन के चलते ब्रिटिश हुकूमत पर किसी भी प्रकार से हिंसा ना करने की रणनीति बनाई गई थी। परंतु ब्रिटिश सरकार द्वारा इस आंदोलन के चलते, नेतृत्व करने वाले नेताओं को और क्रांतिकारी को गिरफ्तार करने में आए, तब भारत के लोगो ने खुद का ही नेतृत्व किया और सभी जगह तबाही मचा दी थी।

साल 1942 मे 8 अगस्त के दिन, काकोरी ट्रेन कांड की घटना के ठीक 17 साल बाद भारत छोड़ो आंदोलन को शरू किया गया था।

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अगस्त महीना भारतीय इतिहास के लिए बहुत जरूरी और आवश्यक महीना रहा है, क्योंकि इस दौरान अनेक और आवश्यक देशभक्ति से संबधित कार्यों किये गये है। ब्रिटिश हुकूमत के विरूद्ध चलाए गए भारत छोड़ो आंदोलन को दुसरी भाषा में अगस्त क्रांति भी कहा जाता है।

भारत छोड़ो आंदोलन का प्रमुख कारण (Main reason for Quit India Movement in Hindi)

अंग्रेज सरकार अपनी क्रूर नीतियों से भारत के लोगों को भिन्न भिन्न विभागों में विभाजित कर देना चाहते थे। भारत के लोगों पर होने वाले अत्याचार और अन्याय को जलाने की सीमा रेखा खत्म हो गई थी जिसके कारण भारत के लोगों में अत्यंत आक्रोश पैदा हो गया था। क्रांतिकारियों के द्वारा किए गए आंदोलन का मुख्य कारण भारत की आजादी हुआ करती थी।

भारत छोड़ो आंदोलन का मुख्य कारण क्रिप्स मिशन कि नाकामयाबी को माना जाता है। साल 1942 में मार्च में ब्रिटिश सरकार ने दूसरे विश्वयुद्ध के चलते भारत के लोगों का सहयोग लेने लिए क्रिप्स मिशन को भारत में भेजा था। क्रिप्स मिशन के अध्यक्ष स्टेफोर्ड क्रिप्स थे, जो इस मिशन को भारत में लाए थे।

ब्रिटिश सरकार जब द्वितीय विश्वयुद्ध तैयारी कर रही थी, तभी हिंदुस्तान का आर्थिक अर्थतंत्र बहुत खराब हो चुका था। जिसकी वजह से अंग्रेज सरकार ने भारत के लोगों पर कई सारे कर लगा दिए थे, जिसको भरना भारत के लोगो के लिए बहुत मुश्किल था।

भारत के लोगों के पास खाने के लिए पर्याप्त खाने की चीजें नहीं हुआ करती थी। जिसका प्रमाण कई स्रोतों के द्वारा मिलता है, जिसे देखकर यह कह सकते हैं कि उन दौरान भुखमरी के कारण मरने वाले लोगों का प्रमाण बहुत ही ज्यादा रहा होगा। सैकड़ों लोग ने भुखमरी के कारण अपने प्राण गवाए होगे।

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सुभाष चंद्र बोस नेशनल कांग्रेस के ही सदस्य थे, इसके बावजूद उनकी महात्मा गांधी से नहीं बनती थी। सुभाष चंद्र बोस ने भारत की आजादी के लिए दूसरे शक्तिशाली देशों से सहायता लेने के लिए गांधीजी के सामने अपना प्रस्ताव रखा था। गांधीजी ने नेताजी के इस प्रस्ताव को नकार दिया था। इस घटना के बाद सुभाष चंद्र बोस अकेले ही ब्रिटिश सरकार की नजरो से बच निकलकर काबुल के रास्ते होते हुए दूसरे मजबूत देशों की मदद की उम्मीद थी वहां पर गए थे।

सुभाष चंद्र बोस ने भारत के लोगों को चलो दिल्ली का नारा देते हुए एक संदेश दिया था। उसी समय गांधीजी जो कि एक अहिंसा वादी विचारधारा रखने वाले नेता थे, उन्होंने भी सभी समस्याओं को मुद्दे नजर रखते हुए करो या मरो जैसे हिंसक नारे को भारत के लोगों तक पहुंचाया था

गांधी जी के द्वारा भारत के लोगों को जब यह संकेत मिला तो कई सारे वर्षों से अपने मन में आक्रोश भरे हुए भारत के लोगों ने उनका साथ देने के लिए सैकड़ों की संख्या में सड़कों पर उतर आए और भारत की आजादी के लिए उसी समय पर एक ही साथ मिलकर भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की।

भारत के लोगों पर होने वाले ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचार, अन्याय, पूर्व शर्तें और वसुल किए जाने वाले कर तथा नीतियों के कारण भारतीय लोग अब कोई भी समझौता करने के लिए तैयार नहीं थे। और इसीलिए उन्होंने एक स्वतंत्र संग्राम के आंदोलन को अंजाम दिया था।

भारत छोड़ो प्रस्ताव कब और कहां पास किया गया? (When and Where was the Quit India Resolution passed in Hindi?)

साल 1942 में 8 अगस्त के दिन शाम को की गए मुंबई की अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में भारत छोड़ो का नारा दिया गया था। गांधी जी ने ग्यालियार में स्थित टैंक मैदान जिसे अब अगस्त क्रांति मैदान कहा जाता है वहां जा कर करो या मरो का नारा दिया था।

सबसे पहले भारतीय स्वतंत्र संग्राम के एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी युसूफ मेहरली ने भारत छोड़ो का नारा दिया था। गांधी जी ने युसूफ मेहरली के द्वारा बताई गए इस नारे को लेकर संपूर्ण आंदोलन बना दिया था।

गांधी जी के द्वारा दिए गए करो या मरो के नारे को लाल बहादुर शास्त्री ने मरो नहीं मारो के नारे में बदल कर भारत के लोगों तक पहुंचाया था। लाल बहादुर शास्त्री को इस नारे में नकारात्मक भाव देखने की वजह से और लोगों में उत्साह बढ़ाने के कारण से नारे में रहे मरो को मारो में बदल देने का संकेत दिया था।

भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत के कुछ ही घंटों में ब्रिटिश सरकार के द्वारा कांग्रेस के सभी बड़े, वरिष्ठ और महान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना के लिए अपना विरोध जाहिर करते हुए भारत के लोगों ने नेता की गिरफ्तारी के विरुद्ध में अनेक हिंसक प्रदर्शन किए थे।

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भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था? (Leader of Quit India Movement in Hindi)

महात्मा गांधी ने प्रमुख स्थान पर रह कर भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व किया था। गांधी जी के सिर्फ एक आवाज से सैकड़ों भारतीयों ने भारत छोड़ो आंदोलन में जुड़कर अपना योगदान दिया था। भारत छोड़ो आंदोलन में युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा थी जो कि अपनी पढ़ाई, लिखाई और शिक्षा को छोड़कर तथा कामकाज को भी देश की आजादी के लिए छोड़कर आगे आए थे।

इस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और जयप्रकाश नारायण जैसे नेशनल कांग्रेस के नेताओं ने भारी भीड़ को दिशा बताते हुए इस आंदोलन में अपना योगदान दिया था।

इस आंदोलन की सबसे ज्यादा असर मेदिनीपुर और सातारा जैसे शहर में हुई थी। उत्तर पूर्व के राज्य मे मुख्य तौर पर बंगाल में इस आंदोलन के कारण कई हिंसक प्रवृत्ति हुइ थी।

ब्रिटिश हुकूमत के द्वारा नेशनल कांग्रेस के नेताओं को और उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया तो भारत के लोगों के नेतृत्व करने के लिए कोई नेता नहीं बचा था। ब्रिटिश सरकार का मानना था कि जब कोई नेतृत्व करने वाला ही नहीं बचेगा तो कुछ दिनों के अंदर लोग खुद ही शांत हो जाएगे।

ब्रिटिश सरकार की यह सोच बिल्कुल गलत साबित हुई भारत के लोगों ने अपना नेतृत्व खुद किया और अंग्रेजों के लिए सर दर्द बन गए। इस दौरान लॉर्ड वोवेल भारत के वायसराय थे।

भारत छोड़ो आंदोलन के परिणाम क्या रहे? (Result of Quit India Movement in Hindi)

भारत छोड़ो आंदोलन के शुरुआत के समय में कुछ ही घंटों में कांग्रेस के सभी बड़े नेता जो इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे उन सब की गिरफ्तारी की गई, और जेल के अंदर डाल दिया गया। गांधी जी जो कि इस आंदोलन के प्रमुख नेता थे उनको पुणे के आगा खान पैलेस में नजरबंद में रखा गया था।

इस गिरफ्तारी के बाद लोगों मैं बहुत आक्रोश फैल चूका था। जिसके वजह से भारत के लोगों ने रेलवे ट्रैक, खंभे, स्टेशन,सरकारी संपत्ति और बहोत सारी अन्य वस्तुओं को तोड़ दिया था। ऐसा आक्रोश भारत के लोगों में पहले कभी नहीं देखा गया था।

ब्रिटिश हुकूमत ने इस घटना का विरोध करते हुए भयंकर रूप से लोगों की हत्या करनी शरू कर दी थी। ब्रिटिश सरकार के द्वारा इस आंदोलन को बंद करने के लिए सभी मुमकिन प्रयत्न किए जा रहे थे। लोगों की आवाज दबाने के लिए अंग्रेजों ने भीड़ पर गोलियां चलाना और लाठी चार्ज करना शुरू कर दिया था।

ब्रिटिश सरकार ने तुरंत ही नेशनल कोग्रेस के नेताओं को जेल में डालने का आदेश दे दिया था इस गिरफ्तारी मैं लाखों लोगों को जेल में डाला गया था। अंग्रेजों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठन को गैर कानूनी बता कर संपूर्ण रुप से उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। 9 अगस्त आने तक सैकड़ों लोग की लाशे सड़कों पर यहां वहां पड़ी हुई थी। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने लाखों रुपए का कर भी लगा दिया था।

Last Final Word:

दोस्तो यह थी भारत छोड़ो आंदोलन के साथ जुड़ी सभी जानकारी। उम्मीद है कि आपको हमारी दी गयी जानकारी से इस आंदोलन के बारे में जानकारी मिली होगी। अगर आपके मन में अभी भी कोई सवाल रह गया हो तो आप हमे कमेंट के माध्यम से बता सकते है।

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