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भानगढ़ किले का इतिहास

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भानगढ़ का किला भारत में भुतिया किले के रूप में जाना जाता है। और यह सबसे बड़ा अनसुलझा रहस्य है। भानगढ़ के इस सुनसान शहर में होने वाली भुतिया गतिवितिधिया का कोई पुख्त सबुत नही मिल पाया है। परन्तु भानगढ़ किले की भुतिया होने की कई सारी कहानी है। बहुत से मुसाफर अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए आते है, लेकिन उन्हें कहानियो के अलावा कुछ नही मिलता है।

भानगढ़ किले का इतिहास 

भानगढ़ का किला राजस्थान के अलवर शहर में सृस्कर राष्टीय उधान के एक किनारे पर स्थित है। यह किला बहुत प्रसिद्ध है भुतिया किले के नाम से,भानगढ़ के इस किले को आमेर के राजा भगवंत दास के छोटे बेटे थे जो मुग़ल के शाहंशाह अकबर के नवरत्नों में शामिल मानसिंह के भाई माधोसिंह ने बाद में इस अपनी रिहाश्त बना लिया मधोसिंह के तिन बेटे थे सुजानसिंह, छतरसिंह, और तीसरा तेजसिंह माधोसिंह के बाद छत्रसिंह भानगढ़ का शासक बना, उस समय किले के वैभव और खुशहाली के चरचे आस पास की सभी रियासत में थे।

राजा माधोसिंह की मृत्यु के बाद भानगढ़ किले का शासक छत्रसिंह बना उसके बाद छत्रसिंह के तीसरे बेटे हरिसिंह को 1722 इस्वी में भानगढ़ का उत्तराधिकारी घोषित किया गया वही से इस किले का पतन होने का आरंभ हुआ था। मुगलकाल के कुर शासक ओरंगजेब ने राजा हरिसिंह के दोनों पुत्रो का धर्म का परिवर्तन करवाकर उनके नाम बदल दिए गए। फिर उन दोनों को यह किला सौंपा था। जब मुगलकाल का अंत हुआ और ब्रिटिशकाल का आरम्भ होने जा रहा था, तब जयपुर के राजा सवाईसिंह ने मोहम्म्द कुलीज़ और मोहम्म्द दहलीज की हत्या कर भानगढ़ किले पर अपना हुकुम  जमा लिया था। उसके बाद भानगढ़ किले का राजपाट माधोसिंह के वंशजों को सौंप दिया गया था।

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भानगढ़ किले का भूगोल 

भानगढ़ के किले को चारदीवारी से घिरा हुआ है।  भानगढ़ के किले के अंदर प्रवेश करते है, दाई और कुछ हवेलिया के अवशेष दिखाई देते है। सामने की और बजार है, जिसमे मार्ग के दोनों तरफ कतार में बनाई गई दो मंजिली इमारते के खँडहर है। किले के आखरी किनारे पे दौहरे अहाते से घिरा तिन मंजिला इमारत का महल है जिसकी उपरी मंजिल लगभग पूरी तरह से धराशाई हो चुकी है। भानगढ़ किला चारो और पहाडियों से घेरा हुआ है। बारिश के मोसम में यहाँ का वातावरण और भी अधिक सुंदर हो जाता है। भानगढ़ के किले को दुनिया की सबसे डरावनी जगह में एक माना जाता है। आज भी इस किले में सूर्योदय होने से पहले और सूर्योदय होने के बाद यहाँ पर रुक ने की इजाजत नही है।

भानगढ़ किले के पर्यटन स्थल

यह किले को भुतिया मन जाता है लेकिन इसके अलावा भी कई घुमने लायक जगहे है भानगढ़ किले में जिसे देखने के लिए मुसाफर आते है किले के बाहरी परकोटा एक मजबूत दीवारों से बना हुआ है जो दोनों तरफ पर्वतों से मिलकर किले को और अधिक सुरक्षित बनाती है।

भानगढ़ किले  के मुख्य द्वार पर हनुमान जी का मंदिर है, इसके बाद किले के बाजार परिसर की शुरुआत होती है। उसके आगे राजमहल और मंदिर बने हुए दिखते है। किले के अंदर एक स्नाघर है जो उस समय लोगों के स्नान आदि करने में उपयोग में ली जाती होगी। किले के प्रमुख मंदिरों में भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के मंदिर है।

यहाँ बने मंदिरों की दीवारों और खंभों पर बहुत ही अच्छी तरह से नक्काशी की गई है, जिसे देखने दूर-दूर से मुसाफर आते है। गोपीनाथ का मंदिर करीब करीब 14 मीटर की ऊँचाई पर बनवया गया है, और इस मंदिर को चमकीले पीले पत्थरों से सजाया गया है। इस मंदिर को देखने के बाद हमें राजपूतों की वास्तुकला से वाकिफ होने का मौका मिलता है।

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फ़िलहाल तो भानगढ़ किला पूरा खंडहर हो चुका है परन्तु यहाँ के सोमेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग को छोड़ कर और किसी भी मंदिर में भगवान की मूर्तियाँ नहीं है। इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना तांत्रिक सिंधु सेवड़ा के वंशज ही करते है।

इस किले में एक छोटा सा महल भी बना हुआ है जिसे पुजारी का निवास भी कहते है। इसके अलावा इसका दूसरा नाम पुरोहित जी की हवेली भी कही जाती है। इस परिसर के अंदर एक नृत्य हवेली भी है, जिसके अंदर राजा के सामने नर्तक और नर्तकी नृत्य किया करते थे।

भानगढ़ किले से सबंधित कथा

भानगढ़ किले में दो कहानिया बहुत प्रखियत है। एक बाबा बालकनाथ के श्राप की कहानी और दूसरी राजकुमारी रत्नावती से जुडी कथा।

बाबा बालकनाथ श्राप कथा

भानगढ़ के राजा भगवंतदास अपने किले का निर्माण करने के लिए जा रहे थे तब साधू बालकनाथ नेराजा को खा था की राजन तुम्हे जंहा मर्जी हो वहा अपने किले का निर्माण करो परन्तु तुम्हारे  किले की परछाई मेरे तपस्या स्थान पर नही पड़ना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो उस किले में कोई भी जीवित नही बचेगा राजा भगवंतदास ने इस बात का बहुत ही अच्छे से ध्यान रखा था। और किले का निर्माण किया था। लेकिन माधोसिंह इस किले के शासक बने तो उन्हों ने ध्यान न रखते हुए उपरी मंजिल का निरमं कार्य शरु करवा दिया और उस मंजिल की पर्ची गुरु बालकनाथ के तपस्या स्थान आगई इस बात से साधू बलुनाथ बहुत ही क्रोधित हो गए और उन्हों ने श्राप दे दिया की भानगढ़ किला कभी भी आबाद नही रहेगा उसके बाद ही भानगढ़ किली का पतन शरु हो गया था।

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रानी रत्नावती से जुड़ी कथा

राजकुमारी रत्नावती बहुत ही खुबसुरत थी की उनसे शादी करने के लिए हर राज्य के राजा लालायित रहते थे। एक दिन रानी रत्नावती अपनी दासी के साथ बाजार में घुमने निकली थी।इस समय वो एक दुकान पर रुकी थी जंहा पे उन्हें बहुत ही अच्छी सुंगध आई  उस समय वहाके रहवासी सिन्धु सेवड़ा नाम के एक तांत्रिक की नजर रानी रत्नावती पर पड़ी रानी के मन मोहक रूप को देखकर तांत्रिक मोहित हो गया और उन्होंने मन ही मन में थान लिया रानी रत्नावती को हासिल करने का उसकी शादी रानी से नही हो सकती थी इस लिए तांत्रिक ने अपनी तंत्र शक्ति से रानी रत्नावती को हासिल करना उचित समझा था।

जिस इतर की सुंगध से राजकुमारी मोहित हो गई थी उसी इतर पर सिन्धु सेवड़ा ने उस शीशी पर अपना कला जादू मंत्रित कर दिया था। और इस बात का पता रानी रत्नावती को चल गया था उन्होंने वे इतर की शीशी को महले के सामने पड़े एक बड़े से पत्थर पर फेक दी और वे इतर की शीशी  टूट गई और सिन्धु  सेवड़ा का जादू चालू हो गया वे पत्थर तेजी से उस तांत्रिक की और बढ़ने लगा और तांत्रिक अपनी मोत को सामने देख पुरे भानगढ़ किले को श्रम दिया की पुरे किले में कोई भी कोई भी जीवित नही बचेगा सभी की मृत्यु जल्दही हो जाएगी।

तांत्रिक की मृत्यु के कुछ दिन बाद ही अजबगढ़ और भानगढ़ के बिच बहुत ही भयंकर युद्ध हुआ और भानगढ़ के सभी लोगो की मृत्यु हो गई और साथ ही में रानी रत्नावती की भी मृत्यु हो गई थी और इसके बाद ही भानगढ़ किला खंडहर में तब्दील हो गया और लोगो के अनुसार यहा अभी भी आत्माओ  का साया है।

 भारतीय पुरातत्व विभाग की चेतावनी 

लोगो के कहे अनुसार भानगढ़ के किले में रात के समय रोने ओए चिल्लाने की आवाजे आती रहती है। फिलहाल तो यह किला भारतीय पुरातत्व के अधीन में आता है। उन्होंने इस किले में घटित रहस्यमय घटनाओ के आधार पर भानगढ़ के किलो को असामान्य और भुतिया किला घोषित किया गया है। इस किले के प्रवेश द्वार पर एक बोर्ड लगया गया है जिसमे लिखा है की सूर्यास्त के समय इस किले में प्रवेश न करे अगर कोई मुसाफर सूर्यास्त के बाद इस किले में रह जाता है तो जो घटना घटती है, उसका जिम्मेदार वे खुद होगा। स्थानीय लोगो के कहे मुताबिक इस किले में जो सूर्यास्त के बाद  गए है, वे लोग वापस नही आए है, और जो वापिस आ पाए है वे अशधारण स्थिति में है।

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भानगढ़ घुमने जाने का समय और शुल्क

भानगढ़ का किला सुबह 6 बजे खुलता है और शामको 6 बजे बंध हो जाता है और सूर्यास्त के बाद कोई भी अंदर नही जा सकता है।

  • भारतीय मुसाफर के लिए 25 रूपये
  • विदेशी मुसाफर के लिए 200 रूपये
  • वीडियो कैमरे का चार्ज अलग से 200 रूपये

भानगढ़ किले तक कैसे पहुचे?

भानगढ़ राजस्थान राज्य के अलवर जिले का एक गाँव हैं जो जयपुर और दिल्ली के बीच स्थित है। इस किले का एयरपॉट जयपुर का संतेन्दर में है, जो भानगढ़ से 56 किलोमीटर की दूरी पर है। अगर कोई मुसाफर ट्रेन की मदद से भानगढ़ किला जाने का योजना बना रहे हैं तो इसके लिए आपको यहां स्थित दौसा रेलवे स्टेशन उतरना पड़ेगा। भानगढ़ से किला 22 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा भानगढ़ मार्ग से भी देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। यहां चलने वाली सार्वजनिक बसें आपको भानगढ़ किले तक पंहुचा सकती हैं।

भानगढ़ किले से जुड़े महत्त्वपूर्ण सवाल के जबाब

भानगढ़ किले का निर्माण किसने और कब करवाया था?

भानगढ़ किले का निर्माण राजा भगवंतदास न साल 1573 में करवाया था।

भानगढ़ किले के पतन  में कौनसी कथाए शामिल है?

भानगढ़ किले के पतन में 2 कहानिया शामिल है एक रानी रत्नावती की कथा और बाबा बलुकानाथ का श्राप यह बहुत प्रचलित है।

भारतीय पुरातत्व विभाग ने भानगढ़ के किले को भुतिया कु घोषित किया है?

भानगढ़ किले में जाने वाले लुप्त होने लगी और यह रहस्य अभी तक सुल्जा नही है, और लोगो के कहे अनुसार वहा में रात के समय चिल्ला ने की और रोने की आवज आती है इस लिए इस किले को भुतिया घुषित किया है।

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भानगढ़ किले में किस समय में नही जा सकते है?

भानगढ़ में सूर्यास्त के समय और सूर्योदय से पहले नही जा सकते है

भानगढ़ किले की रानी का नाम क्या था?

भानगढ़ के किले की रानी का नाम रानी रत्नावती था।

Last Final Word:

दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल में हमने आपको भानगढ़ के किले से जुडी जानकारी दी जैसे कीभानगढ़ किले का इतिहास, भानगढ़ किले का भूगोल, भानगढ़ किले के पर्यटन स्थल, भानगढ़ किले से सबंधित कथा, बाबा बालकनाथ श्राप कथा, रानी रत्नावती से जुडी कथा, भारतीय पुरातत्व विभाग की चेतावनी, भानगढ़ किले तक कैसे पहुचे?  और भानगढ़ किले से जुड़े इतिहास से जुडी सारी जानकारी वाकिफ हो चुके होंगे।

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