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बाबर का इतिहास

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दोस्तों आज के इस आर्टिकल में आपसे बात करने वाले है की बाबर का क्या इतिहास था और बाबर का जीवन परिचय क्या था। आपको पता होगा की भारत पर कई राजा का शाशन आया और गया वेसे ही एक ऐसे राजा का शाशन आया था जिसका नाम बाबर था। भारत पर मुग़ल सल्तनत ने तक़रीबन देखा जाये तो 300 साल तक हमारे भारत देश पर राज किया था। इस दौरान देखा जाये तो सल्तनत में कई ऐसे शासक भी हुए जिन्होंने मुग़ल सल्तनक की शान को हमेशा से बना के रख दिया और आज के इस आर्टिकल में हम आपसे बात करेंगे मुग़ल शासक बाबर की जिसने अपने समय(शौर्य) के लिए इतिहास में जाने जाते है।आपको पता ही होगा की बाबर को एक शासक के साथ साथ एक योद्धा के रूप में भी हम सब उसको जानते है।  इस पोस्ट में हम आपको इस्तिहस के एक ऐसे ही खुखार शासक जिसका नाम बाबर हे उसके बारे में ही बताने जा रहे है। आपको बाबर के बारे में सब कुछ माहिती चाहिए तो इस आर्टिकल को अंत तक पढ़िए। तो चलिए बाबर के इतिहास में आगे सब जानते है।

 बाबर का इतिहास और जीवन परिचय (History and Biography of Babar)

बाबर का जन्म  : चलिए तो पहले बात करते है बाबर के जन्म स्थान की तो बाबर का जन्म उज़्बेकिस्तान (Uzbekistan) फरगना घाटी फ्न्युकड़ मेंबी हुआ था। 23 फरवरी 1483 के साल में बाबर का जन्म समय था। बाबर के पिता जी का नाम उमर शेख मिर्ज़ा था जो स्वयं  फरगना घाटी के एज शासक थे और बाबर की माता का नाम कुतलुग निगार खानम था।

बाबर का आरम्भिक जीवन : इंडिया के इतहास में मुग़ल संप्रदाय काफी ज्यादा महत्वपूर्ण शासक माना जाता है। ईसी शक्ति शाली मुग़ल संप्रदाय ने अपनी बुनियाद रख ने वाले बाबर ने भारत में करीबन 300 साल तक शासक किया था। बाबर ने अपने पिताश्री की मृत्युके बाद बाबर ने सारा करोबार संभाल लिया था।  बाबर ने अपने पिताश्री की मृत्यु के बाद उसका कारोबार अपने हाथ लिया था तब बाबर की उम्र करीबन 12 साल की ही थी। बाबर को लोग बचन से ही मह्व्ताकंक्षी मान ते थे। बाबर ने तुर्किस्तान के फरगन विस्तार को जित कर उस राज्य को अपने हाथ धर लिया था। आपको पता नही होगा की बाबर केवल एक ही बात पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित करते थे बस केवल वही था उसका लक्ष्य। बाबर स्वयं चंगेज का परिवार का ही बताते है। वेसे बाबर की माता के साइड के वंशज चंगेज खान थे।

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बाबर के लहू में दो शासक का खून था, इसकी वजह से बाबर एक महान शासक बने। ऐसा माना जाता है की बाबर को एक महान योद्धा माना जाता है। उसके पताजी की मौत से बाबर एक कम उम्र से ही भूमि में उतर गए थे और उन्होंने अपने इस बेहतरीन जीवन में कई सारे युद्ध को जीता और कई युद्ध को हारे भी है और कई युद्ध की संधि विच्छेद देखे थे।

बाबर का भारत आना (Babar Coming T0 India)

बाबर को भारत में अपना साम्राज्य स्थापित करने से पहले उसे मध्य एशिया में अपना साम्राज्य की स्थापना करनी थी परंतू मध्य एशिमा में उसे विशेष सफलता नही मिली तो वह भारत की और बढ़ने लगा और भारत आकर यह पर अपना भव्य साम्रज्य स्थापित कर लिया। बाबर ने जब पहली बार भारत में कदम रखा था तभी के समय में भारत की राजनीती उसके लिए काफी ठीक थी। बाबर जब भारत आया था उसी समय में दिल्ली के सुल्तान लड़ाइया हर रहे थे तभी बाबर को यह मौका ठीक लगा और उसने भारत पर चढ़ाई कर दी और भारत में अपना साम्राज्य करना आरम्भ किया। उस के समय में बात करे तो उतर भारत में और दिल्ली में राजपूतो का राज था और उस क्षेत्रे के आसपास के विस्तार सब खाली पड़े थे।  बाबर ने जब भारत में कदम रखा था उस समय दिल्ली का सुल्तान इब्राहीम लौदि था जो दिल्ली में शासन करने में असमर्थ था। इस बात से नाराज हुआ आलम खान ने बाबर को भारत में चढ़ाई करने का न्योता दिया था और उन्हों ने भारत बुलाया था। बाबर को भारत पे चढ़ाई करने का न्योता बहुत पसंद आया था और उसने भारत की और अभिवृति दिखाई थी। भारत में अजाने के बाद बाबर ने पहेली बार अपना साम्राज्य दिल्ली में स्थापित किया था।

बाबर का शारीरिक जीवन (Babar Physical Life)

शारीरिक सुरक्षा करने के लिए बाबर काफी नियमित था। बाबर को योगासन करना भी बहुत पसंद था। और यह एक बात बाबर की बहुत चर्चे में थी के वह दो लोगो को अपने कंधे पे दो लोगो को बिठा कर भाग सकता था। इतना ही नहीं बाबर ने दो बार गंगा नदी को तैर कर के पार की हुई है।

बाबर का वैवाहिक जीवन (Babar Married Life)

बाबर के इतिहास को पढ़ जाए तो बाबर की 11 पत्निया थी। बाबर की उन सभी 11 पत्नी यों से 20 बच्चे भी थे।  जैनाब सुल्तान बेगम,  महम बेगम, गुलरूख बेगम, मौसम सुल्तान बेगम, दिलदार बेगम, मुबारका युरुफजई,आयशा सुल्तान बेगम और गुलनार अघाचा इत्यादि औरतों को उसकी बेगम के तौर पर जाना जाता था। बाबर ने अपने बड़े बेटे हुमायूं को बाबर ने अपना उत्तराधिकारी बनाया था। जिसने उसकी मृत्यु के बाद भारत में शासन किया था।

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बाबर की प्रजा

फारसी भाषा के मंगोल जाती की प्रजा को मुग़ल कहकर बुलाया जाता था। बाबर की प्राज में मुख्य तौर पर फारसी यानि मुग़ल प्रजा और तुर्की प्रजा शामिल थी। और कहा जाये तो बाबर की सेना में मुख्य तौर के फारसी लोग ही शामिल थे। बाबर की सेना में और तुर्की, मध्य एशियाई काबिलो की अलावा बाबर के प्रशाशन में पश्तो और बर्लाव समुदाई जाती के लोग भी शामिल थे।

बाबर का भारत पर पहला आक्रमण

दिल्ली के सुल्तान बाबर ने भारत पर पहला आक्रमण सं.ई 1526 में बाजौर शहर पर किया था और बाबर ने यह भयानक आक्रमण करके बाबर ने भेरा के किल्ले को अपने वश में किया था। इस भयानक युद्ध और इस घटना का वर्नण इतिहास के सुवर्ण अक्षरों में बाबर नामा में भी मिलता है। हम इतिहास के स्त्रोत के अनुसार देखे तो बाबर ने यह युद्ध पहली बार बारूद और तोपखाने से इस्तिमाल किया था।

बाबर का पानीपत का युद्ध 

इतिहास में देखा जाये तो बाबर ने और इब्राहीम लोही के बिच पानीपत की पहली लड़ाई हुई थी। इतिहास की यह लड़ाई अप्रैल के महीने में सं.ई 1526 में बाबर और भारत के सुल्तान इब्राहीम लोदी के बिच हुई थी। और इस युद्ध को पानीपत के मैदान में किया गया था। कई इतिहास कारो यह बात को स्वीकार करते है की इस युद्ध के दौरान बाबर ने करीबन देखा जाये तो 4 बार जांच पड़ताल करवाई थी क्युकी बाबर को इस युद्ध के दौरान जित मिल सके। बाबर ने जब युद्ध का एलान किया उससे पहले इस युद्ध के साथ मेवाड़ के राजा राणा संग्राम सिंह भी यह चाहते थे की भारत के सुल्तान इब्राहीम लोदी से बाबर युद्ध करे और इस युद्ध में बाबर को विजय प्राप्ति हो क्योकि कहा जाता था की भारत का सुल्तान इब्राहीम लोदी राणा संग्राम सिंह का दुश्मन था। आप को पता होगा की मेवाड़ के रजा राणा संग्राम ने भी अफगान से बाबर को भारत आकार इब्राहीम लोदी से युद्ध करने का आगमन दिया था। इन दोनों के बिच महाशय युद्ध के दौरान बाबर को जित मिली थी और ईसी साथ भारत के सुल्तान इब्राहीम लोदी खुद को हारता देख यह बात को संभल ना सका तो उसने खुद से ही स्वयं से मौत को गले लगा कर हार स्वीकार कर ली।

पानीपत युद्ध के बाद 

भारत के कई सारे हिंदू राजाओ को ऐसा लगता था की बाबर ने जो इब्राहीम लोदी से पानीपत का युद्ध किया था वह युद्ध बाबर जित कर शायद भारत से चला जाएगा परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, बाबर ने पानीपत का युद्ध जितने के बाद भारत में ही अपना साम्राज्य का प्रतिष्ठान रचने का सोच लिया और फिर यह अपनी नया साम्राज्य की बुनियाद का बिज बोया।

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खनवा की लड़ाई 

आपको पता है की जिस राणा सांग ने पहले बाबर को भारत आकार कर भारत के सुल्तान इब्राहीम लोदी से युद्ध लड़ने का निमंत्रण किया था, भारत के सुल्तान इब्राहीम लोदी से युद्ध लड़ कर और युद्ध को जितने के बाद बाबर भारत में ही रह गया और फिर यहाँ रह कर राणा सांगा को युद्ध के लिए चुनोती दे दी। इसके बाद बाबर और राणा के बिच खानवा का युद्ध हुआ। खानवा अभी के समय में राजस्थान के भरतपुर में एक छोटी सी जगह है। इतिहास में जाना गया यह युद्ध बाबर और राणा के बिच 17 मार्च 1557 को हुआ था। इतिहास कार ऐसा मानते है की बाबर के खिलाफ इस भयानक युद्ध में राजपूत बड़ी बहादुर्ता पूर्ण लडे थे और वही बाबर ने इस भयानक युद्ध में तोपखाने का इस्तमाल किया था और फिर इस युद्ध को एक सांप्रदायिक युद्ध बना दिया था। इस युद्ध में राणा सांगा खुद को हरता देख वह सदमा बर्दाश नहीं कर सका और उसने आत्मा हत्या कर ली, और ईसी तरह बाबर इस युद्ध में जित गया था।

घाघरा का युद्ध 

इब्राहीम लोदी और राणा सांगा को हराने के बाद भी बाबर के सामने चुनौतिया कम नहीं थी। बंगाल और बिहार के राजा बाबर को देश से बहार भगाना चाहते थे। इस समय में बंगाल और बिहार में अफगानी के शासक वह शासन करते थे जो बाबर को भारत देश से भगा देना चाहते थे। ईसी वजह से भारत में बाबर और अफगान के बिच घाघर के मैदान में भयंकर युद्ध हुआ था। फिर बाबर को इस युद्ध में जित मिली और फिर बाबर ने इसके बाद भारत के कई राज्यों में राज्य को लूटना चालू कर दिया, फिर इसके भविष्य में कई तरह के परिणाम आये थे।

बाबर की क्रूरता

बाबर ने घाघरा का युद्ध को जित तो लिया लेकिन उसके बाद उसने भारत में के राज्यों में लूटमार चालू कर दिया और भारत के कई राज्य को उसने बहुत बुरी तरह से लुटा। बाबर ने कई हिंदूओ का जोर जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन भी करवाया। बाबर को सब अय्याश प्रकार के आशिक मानते थे। बाबर ने भारत में पंजाब, दिल्ली और बिहार जैसे राज्यों में अपने साम्राज्य को खड़ा करदिया था। बाबर की लिखी गई किताब बाबर नामा में उसके इतिहास की कई सारी कहानिया लिखी मिलती है।

बाबर की मृत्यु

26 दिसम्बर 1530 के तहत बाबर की मृत्यु हुई थी और बाबर की मृत्यु आगरा में हुई थी। बाबर की मृत्यु के समय आगरा को मुग़ल के साम्राज्य का हिस्सा था। बाबर की मृत्यु से पहले उसके बड़े लड़के हुमायु को अपना उतराधिकारी बनाया गया था।

बाबर का जन्म कहा हुआ था? 

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  • बाबर का जन्म उज्बेकिस्तान फरगना घाटी फ्नुकड़ सं 23 फरवरी 1483 को हुआ था।

बाबर का उतराधिकारी कौन था? 

  • बाबर ने अपने मृत्यु से पहले उसके बड़े बेटे हुमायु को अपना उतराधिकारी घोषित किया था।

बाबर ने किस संप्रदाय की स्थापना की थी?

  • बाबर ने मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की थी।

बाबर ने भारत में आकार अपना पहेला युद्ध कब किया था?

  • बाबर ने भारत में पहला युद्ध पानीपत का युद्ध भारत के सुल्तान इब्राहीम लोदी के साथ किया था।

बाबर की मृत्यु कहा और कब हुई थी?

  • बाबर की मृत्यु 26 दिसम्बर 1530 को आगरा में हुई थी।

Last Final Word :

दोस्तों हमने आपको बाबर का इतिहास और बाबर का प्रारंभिक जीवन बाबर के पानीपत के युद्ध के सबंध और उनकी मृत्यु का कारण एवं उनकी कब्र पर विवाद के बारे में इस आर्टिकल के जरिये बताया हम यह आशा करते है की आपको बाबर से जुडी सारी जानकारी से वाकिफ हो चुके होंगे।

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