General Knowledge

अल्फा, बीटा और गामा किरणों में क्या अंतर है?

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रेडियोएक्टिव किरणें रेडियोएक्टिव पदार्थ से निकलती है। इस पदार्थ में से तिन प्रकार की किरणे निकलती है। जिसे अल्फा, बीटा और गामा के नाम से जाना जाता है।  रेडियोएक्टिविटी के समय दौरान अल्फा, बीटा और गामा किरणे एटम से निकलती है। परमाणु जब एतं स्थिरता प्राप्त करता है, तब यह किरणे निकलती है। यह रेडियेशन एतं के एक न्यूक्लियर से बहार निकलते है। उन सभी किरणों का व्यवहार एक दुसरे से अलग लगा होता है। लेकिन अल्फा, बीटा और गामा यह तीनो किरणे आयनीकरण का एक कारण बनती है। यह तीनो किरणों के अन्दर प्रवेश करने की शक्ति होती है।

अल्फा किरणों के बारे में जानकारी (Information about Alpha Rays)

अल्फ़ा की किरणों में पॉजिटिवली चार्ज पार्टिकल्स होते है, यानि की अल्फ़ा किरणे सकारात्मक स्वरूप से चार्ज होने वाली कण है। अल्फ़ा में दो न्यूट्रॉन और दो प्रोटॉन होते है, यह किरणे बहुत ही सक्रिय एवं ऊर्जावान हीलियम परमाणु है। अल्फ़ा किरणों का प्रतीक α होता है। इस रेडियोधर्मी परमाणु केंद्र से कणो को छोड़ा जा सकता है। अल्फा क्षय प्रक्रिया में अल्फा कण उत्सर्जित होते है।

अल्फ़ा की किरणों के कणों में कमसे कम प्रवेश शक्ति एवं उच्च प्रकार की आयनीकरण शक्ति होती है। अल्फ़ा की शक्तिशाली किरणे जब किसी के शरीर में प्रवेश लेती है, तो उस व्यक्ति को बहुत ही गंभीर नुकसान पहुचता है। “प्रोटॉन रिच” परमाणुओं में से अल्फ़ा के कणों का उत्सर्जन होता है। अल्फ़ा के काणो को हीलियम-4 परमाणु केंद्र में पहुचाया जाता है। अल्फ़ा की यह किरणे दूर दूर तक परमाणु को आयानित करने बहुत ही सक्षम होता है।अल्फ़ा के कण एक अवेशित कण होते है, क्योकि उसमे इलेक्ट्रॉन नहीं होते है। अल्फ़ा के कण परमाणु केंद्र से उत्सर्जित होते है, और वे सबसे बड़े कण होते है। अल्फ़ा की किरण मुख्य स्वरूप से बहुत कम मात्रा में उपयोग होता है। इस कणों का उपयोग स्मोक डिटेक्टर की वास्तु में ही होता है।

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बीटा किरणों के बारे में जानकारी (Information about Beta Rays)

अल्फ़ा के कण से बिलकुल विभिन कण बीटा में होते है। बीटा में इलेक्ट्रॉन बहुत ही ऊर्जावान होता है, जो अंदर के परमाणु केंद्र से मुक्त होते है। इसी वजह से बीटा के कणों को इलेक्ट्रॉन कण कहा जाता है, यह परमाणु के केंद्र द्वारा तेज गति से उत्सर्जित होते है। बीटा के कणों में एक उच्च प्रकार की प्रवेश शक्ति होती है। यह कण  सरल रूपसे शरीर की चमड़ी के अंदर प्रवेश सकता है। न्यूट्रॉन की संख्या एक से घट जाती है, और प्रोटॉन की संख्या एक से बढती है। बीटा क्षय के समय दौरान ऐसा होता है। इस का मतलब यह होता है, की क्षय के इस संपादन में भी द्रव्यमान की संख्या एक समान रहती है।  लेकिन परमाणु की संख्या बढ़ जाती है। बीटा के कणों का उपयोग चिकित्सा के प्रयोग में किया जाता है।

गामा किरणों के बारे में जानकारी (Information about Gamma Rays)

वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के उच्च-आवृत्ति वाले छोर से उत्पन्न होने वाली तरंगें जिनका कोई द्रव्यमान नहीं होता है, गामा किरणें कहलाती हैं। गामा की किरणे में बहुत ही उच्च ऊर्जा फोर्टन होता है, जो अलग अलग मामलो के माध्यम से यात्रा करता है। अन्य समाग्रियो को भेदने की एक महान क्षमता गामा की किरणों में होती है। इस कारण से गामा की किरणे कैंसर के इलाज और चिकित्सा उपकरणों को निष्फल करने के लिए चिकित्सा अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है। सामान्य तौर पर, न तो गामा किरणें और न ही एक्स-रे में कुछ भी रेडियोधर्मी बनाने की क्षमता होती है, भले ही वे अन्य सामग्रियों को भेदने की क्षमता रखते हों।

Last Final Word

दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल में हमने आपको अल्फा, बीटा और गामा किरणों में क्या अंतर है? के बारे में बताया जैसे की अल्फ़ा किरणों के बारे में जानकारी, बीटा किरणों के बारे में जानकारी, गामा के बारे में जानकारी,  और सामान्य ज्ञान से जुडी सभी जानकारी से आप वाकिफ हो चुके होंगे।

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