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21वी सदी का भारत

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दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम 21वी सदी के भारत के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। यदि आपको 21वी सदी के भारत के बारे में सभी प्रकार की जानकारी चाहिए हो तो आप इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ना।

भारत में अलग-अलग सदिया हो गई है। जिसके दौरान भारत की स्थिती अलग-अलग रही है। 18वीं सदी की बात करें तो तब भारत आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में प्रगति करने में असफल रहा था। साथ ही साथ भारत में कई सारी समस्या भी फैली हुई थी। भारत का विकास रुक गया था। भारत के लोगों के साथ कई सारे अन्याय और अत्याचार हो रहे थे। इसकी वजह से 19वीं सदी में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में से कई सारे महान नेताओं ने इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी। 19वीं सदी के दौरान सुधार आंदोलन करने में आए। इस आंदोलन से भारत के समाज को आधुनिक विचार करने का दृष्टिकोण प्राप्त हुआ था। लोगों में जागृति फैल चुकी थी और भारत को आगे लाने के लिए आंदोलन शुरू हो चुके थे। हम सब जानते हैं कि 19वीं सदी को ब्रिटिश हुकूमत का समय माना जाता है। ब्रिटिश हुकूमत ने भारत पर अपने शासन से अत्याचार और शोषण किया था। अपनी आर्थिक कूट नीतियों मे भारत के लोगों को फंसा कर उसका शोषण किया था। परंतु भारत के लोगों ने एकजुट होकर उनके शासन को खत्म करने का मन बना लिया था। कई सारे सत्याग्रह और आंदोलन के फल स्वरुप 21वी सदी तक भारत संपूर्ण रूप से स्वतंत्र हो चुका था और दुनिया के देशों के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार हो चुका था।

21वी सदी में भारत ने अपने बलबूते पर स्वतंत्र रूप से तरक्की करके विकासशील देश में अपना नाम कायम किया है। इस प्रकार 21वी सदी भारत की सदी है। IBM Institute for Business Value ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत एक दुगनी तेजी से आगे बढ़ने वाला देश है और कुछ ही सालों में भारत सबसे ज्यादा तरक्की करने वाले देश में शामिल हो जाएगा। भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्था से सबसे मजबूत है। भारत एक आदर्श लोकशाही देश है जिसके साथ ही दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में दूसरे क्रमांक पर है।

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भारत ने भीन्न भीन्न क्षेत्रों में तरक्की की है। वैज्ञानिक अविष्कार से लेकर सांस्कृतिक समृद्धि, शिक्षा के क्षेत्र में, कृषि के क्षेत्र में, अंतरिक्ष के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में, खेल के क्षेत्र में और औद्योगिक क्षेत्र में तथा दूसरे कई सारे क्षेत्र में भारत आगे है।

21वी सदी का डिजिटल भारत (Digital India)

भारत में मोदी सरकार के आने के बाद से भारत की डिजिटल क्रांति तेजी से आगे बढ़ी है। डिजिटल क्रांति का संचार अधिक हो रहा है। भारत में ई-कॉमर्स आने के बाद से अनेक सरकारी सुविधा हमें घर बैठे ऑनलाइन आवेदन के द्वारा मिल रही है। साथ ही बैंकिंग क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहे हैं। आज के समय में डिजिटल बैंक भारत के लोगों के लिए उपलब्ध है। डिजिटल क्षेत्र में उन्नति की वजह से भारत में कई सारे बदलाव होने शुरू हो गए हैं और हम कह सकते हैं कि आगे का दौर भारत का होगा।

21वी सदी के भारत के अलग-अलग क्षेत्र

21वी सदी के भारत का आर्थिक क्षेत्र

भारत आर्थिक रूप से हमारी अपेक्षा से भी ज्यादा सक्षम देश है। र्हावर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री ने बताया है कि भारत की तरक्की का दर करीबन 7% है। इस दर से भारत साल 2024 तक चाइना से भी तेज गति से विकास की ओर आगे बढ़ जाएगा। वर्तमान समय की बात करें तो आर्थिक अर्थव्यवस्था में दुनिया के सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में आने वाले देशों में भारत चीन के बाद दूसरे क्रमांक पर आता है। इसका मतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति है। वर्तमान समय के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के वित्तीय मंत्रिमंडल ने हाल में ही विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को संपूर्ण रुप से मंजूरी दे दी है। जिसकी वजह से कई सारी बाहरी कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर सकती है। जिसका सीधा फायदा भारत की अर्थव्यवस्था को होगा। इस प्रकार 21वी सदी में भारत की आर्थिक अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

21वी सदी के भारत का चिकित्सा विज्ञान क्षेत्र

आदिकाल से ही भारत चिकित्सा के क्षेत्र में दुनिया में सबसे आगे रहा है। प्राचीन काल के हमारे ऋषि-मुनी कई सारी चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल करते थे। पुरातन भारत के लोग वनस्पति के अलग-अलग भागो को चिकित्सा के लिए इस्तेमाल करते थे। हमारा आयुर्वेदिक ज्ञान और चिकित्सा पद्धति अव्वल स्थान पर रही है। परंतु समय के साथ उपकरण के अभाव से हम चिकित्सा क्षेत्र में पीछे रह गए थे। वर्तमान समय में भारत के पास सभी बीमारियों के इलाज के लिए सभी प्रकार के मशीनरी और चिकित्सा पद्धति उपलब्ध है। भारत को स्वतंत्रता मिली उसके बाद से प्रथम पंचवर्षीय योजना के मुकाबले वर्तमान समय में भारत के पास चिकित्सकों और अस्पतालों मैं पलंग की संख्या बढ़कर करीबन 2 गुनी से 6 गुनी हो चुकी है।

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मलेरिया, टी.बी और कोलेरा जेसी बीमारी से लोगों को ठीक करके बीमारी से मुक्त करने की चिकित्सा पद्धति विकसित हो गई है। जानलेवा बीमारियां जैसे कि प्ले और स्मॉल पॉक्स का मृत्यु दर भी कम हो गया है। भारत में फैली पोलियो बीमारी को भी की जड़ मूल से खत्म कर दिया है। हाल के समय में औसत आयु ज्यादा है और बीमारी की वजह से होने वाले मृत्यु का दर कम है।

नेशनल हेल्थ पॉलिसी के तहत ‘हम सभी के लिए स्वास्थ्य’ के उद्देश्य को जल्दी प्राप्त करेगे। भारत चिकित्सा विज्ञान में विकास के साथ-साथ लोगों को बीमारियों के प्रति जानकारी देकर उसे फैलने से कैसे रोक सकते हैं और बीमारी के बचाव में क्या क्या कर सकते हैं तथा क्या क्या सावधानी रखनी पड़ती है उन सभी के बारे में जानकारी देकर जागरूकता ला रहा हैं।

21वी सदी के भारत का तकनीकी क्षेत्र

भारत तकनीकी क्षेत्र में पहले से ज्यादा विकसित हो गया है। भारत को पहले मशीन और यंत्र को दूसरे देश से आयात करना पड़ता था परंतु आज के समय में भारत स्वयं इन सभी चीजों का उत्पादन करने के लिए सक्षम है। तकनीकी क्षेत्र इतना विकसित हो गया है कि बड़े कारखानों में उत्पादन के लिए मशीनों की सहायता से ही माल बनाना और संगणक से कार्य करके सरलता से उत्पादन कर रहा है।

Computerization

आज के इस आधुनिक युग में सभी क्षेत्रों में कम्प्यूटर की मदद से कार्य किया जाता है। क्योंकि इसकी मदद से सरलता से और कम समय में ज्यादा काम कर सकते हैं। इसकी मदद से आप किसी भी प्रकार की माहिती को एक जगह से दूसरी जगह आसानी से आदान प्रदान कर सकते हैं। ई-कॉमर्स का भी समावेश इसमें होता है। ई-कॉमर्स की मदद से हम घर बैठे कई सारे कार्य आसानी से कर सकते हैं, जैसे कि घर बैठे सामान खरीदना, बैंक से संबंधित कार्य करना, घर बैठे खाना मंगाना, दुनिया की सभी घटनाओं की जानकारी हासिल करना और इनके जैसे कई सारे कार्य कर सकते हैं।

21वी सदी के भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र

इस क्षेत्र में भारत अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाया। क्योंकि भारत आज भी कारों के निर्माण के लिए दूसरे देशों की तकनीकों पर आधारित रहता है। भारत केवल कुछ भागों का ही निर्माण करने के लिए समर्थ है। किंतु भारत अपना प्रयास जारी रखे हुए हैं, ताकि जल्दी ही हम इस क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त करके विकास कर सके।

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21वी सदी के भारत का कृषि उत्पादन क्षेत्र

हम सब जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत के ज्यादातर लोग कृषि करके अपना गुजारा करते हैं। इसी वजह से भारत को कृषि के क्षेत्र मे उन्नति करना अति आवश्यक है। भारत के पास कृषि के समय पर आने वाली बाढ़ और सूखे जैसी समस्याओं का सामना करने के लिए पर्याप्त साधन और तकनीक उपलब्ध है। पर्याप्त तकनीक और साधन की मदद से भारत देश का उत्पादन कई ज्यादा बढ़ गया है। भारत अपनी खाद्य पदार्थों की जरूरतों को स्वतंत्र रूप से पूरा करने के लिए सक्षम है, साथ ही दूसरे देशों की जरूरतों के लिए उत्पादन का निकास करने के लिए भी समर्थ है। भारत को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए हरित क्रांति का सबसे बड़ा योगदान रहा है। कृषि को सबसे ज्यादा खतरा फसलों का खराब हो जाना, फसल का सड़ने लगना, कीटको से होनेे वाला नुकशान इत्यादि से होता है, जिस पर नियंत्रण पाने के लिए भारत के पास पर्याप्त पद्धति उपलब्ध है। उन्नत बीज, खाद, सिंचाई के पर्याप्त और बेहतरीन तरीके, संग्रहण क्षमता इत्यादि में भी भारत में विकास किया है। आज के समय में भारत के पास कृषि करने की सही पद्धति, साधन और तकनीक उपलब्ध होने के कारण उत्पादन में बढ़ावा हुआ है।

21वी सदी के भारत का रक्षा उपकरणों का क्षेत्र

भारत के पास तीन प्रकार की सेना है: थल सेना, जल सेना और वायु सेना। तीनों सेना को एक किया जाए तो विश्व के प्रथम 7 शक्तिशाली देशों में भारत शामिल होता है। भारत के पास तीनों फौज के लिए रक्षा उपकरण भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। हाल ही में भारत को कम वजन वाला लड़ाकू विमान बनाने में सफलता मिली है। भारत ने इस विमान का नाम तेजस रखा है। इस विमान के सभी भागो और मशीनों को भारत ने ही बनाए हैं। इस विमान का सफलता से उत्पादन करना रक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ी सिद्धि है।

निजी क्षेत्रों को सुरक्षा क्षेत्र से जुड़ने के लिए संभावनाएं व्यक्त की जा रही है, जिसमें अंबानी और टाटा जैसी कंपनियों का समावेश किया गया है। हालांकि इस प्रोजेक्ट को सरकार के द्वारा मंजूरी नहीं प्राप्त हो पाई है।

भारत का शिक्षा क्षेत्र

भारत के लोगों के पास बुद्धि क्षमता और कौशल्य की कमी नहीं है। भारत शिक्षा क्षेत्र में भी विकसित है। हालांकि सिर्फ प्राथमिक शिक्षा को ही मुफ्त उपलब्ध हो पाया है। भारत में पर्याप्त मात्रा में शाला महाशाला है और विद्यालय होने की वजह से विद्यार्थी सभी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही बाहर के विद्यार्थी भी शिक्षा ग्रहण करने के लिए भारत में आते हैं। भारत में प्रौढ शिक्षा अभियान और सर्वशिक्षा अभियान चल रहे हैं, जिसकी वजह से शैक्षणिक स्तर मे सुधार आए हैं। देश के संपूर्ण विकास के लिए बिना किसी भेदभाव के लड़कियों को भी शिक्षा देने के लिए प्रयास जारी है। भारत में कल्पना चावला जो की प्रथम भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री थे, इंदिरा गांधी जो प्रथम महिला प्रधानमंत्री रह चुकी है, प्रतिभा देवी सिंह पाटिल जो प्रथम महिला राष्ट्रपति के पद पर रह चुकी है, चंदा कोच्चर जो आईसीआईसी बैंक की वर्तमान की CEO तथा D है इत्यादि जैसी महिला ने अपनी शक्ति से पुरुषों से भी आगे का स्थान प्राप्त किया है।

21वी सदी में जहां भारत एक और तरक्की कर रहा है तो दूसरी ओर नीचे बताए गए क्षेत्रों में तरक्की नहीं हो पा रही है।

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भारत की बेरोजगारी

भारत के पास सबसे ज्यादा युवा शक्ति है। दूसरे देशों के मुकाबले भारत के पास जनसंख्या भी ज्यादा है। विश्व के सबसे समृद्ध राष्ट्रों में भारत की गणना होती है, परंतु रोजगार के अभाव की वजह से भारत की युवा पीढ़ी की शक्तियां सामने नहीं आ पा रही और शक्ति का व्यय हो रहा है। रोजगार ना मिलने की वजह से युवा पीढ़ी लाचार होकर अपराध के मार्ग पर चल रही है। भारत में अगर किसी चीज की ज्यादा जरूरत है तो वह रोजगार है। अगर बेरोजगार की समस्या खत्म हो जाए तो कई सारी दूसरी समस्या भी अपने आप समाप्त हो सकती हैं। भारत के युवाओं के पास कौशल्या की कमी नहीं है परंतु उसे साबित करने के लिए उनके पास रोजगार का अभाव है। बेरोजगारी की समस्या को खत्म करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है

गरीबी

भारत की कड़वी सच्चाई यह भी है की यहां पर अमीर और अमीर तथा गरीब और गरीब बनता जा रहा है। इसी वजह से भारत पूर्ण रूप से विकसित होने से वंचित रह गया है। अभी भारत की गणना विकासशील देशों में होती है। भारत की गरीबी का कारण विदेश की बैंकों में रहा काला धन है। अगर काले धन को वापिस देश में लाया जाए तो गरीबी की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। हमने आगे देखा कि भारत के लोगों के पास सही रोजगार ना होने की वजह से उनकी आमदनी भी कम है, जिसकी वजह से गरीबी बढ़ रही है।

भारत की जनसंख्या

विश्व के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देशों में भारत दूसरे क्रमांक पर आता है। हमारे देश की जनसंख्या दिन प्रतिदिन बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। अधिक जनसंख्या के कारण कई सारे लोगों को लागू योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। भारत की आज की आबादी 125 करोड़ से ज्यादा है। इतनी ज्यादा जनसंख्या से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार के लिए सभी सुविधाओं को बांटना और उन तक पहुंचाना कितना मुश्किल रहता है। बढ़ती जनसंख्या को काबू में लाना अत्यंत आवश्यक है। ऐसा ना होने पर भारत की समस्याएं बढ़ सकती है। सरकार को अलग-अलग कार्यक्रमों के द्वारा जनसंख्या का बढ़ने से रोकने के लिए प्रयास करने पड़ेगे। ऐसा ही रहा तो कुछ वर्षों में भारत विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश में बदल जाएगा।

इन सभी समस्याओं के बावजूद भारत को सुपर पावर कहा जाता है। जीसका कारण दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति सभी क्षेत्रों में दूसरे देशों के मुकाबले मजबूत है। आर्थिक क्षेत्र, राजनीति क्षेत्र, सैन्य बल और संस्कृति क्षेत्र मे भी भारत मजबूत है। दक्षिण एशिया की जनसंख्या में से करीबन 77% हिस्सा भारत की जनसंख्या का है। दक्षिण एशिया के जी.डी.पी में 75%, भूभाग के क्षेत्रफल में 77%, रक्षा बजट में 80% और सैन्य बल में 82% भारत का हिस्सा है। सबसे अगस्त्य की बात भारत लोकशाही अर्थव्यवस्था का देश है। भारत की वर्तमान जी.डी.पी दर 9.2% है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था मे अगत्य का स्थान है। भारत में दूसरे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले राष्ट्रों के साथ समझौते और संध्या भी की है जिसकी वजह से 21वी सदी का सुपर पावर बनने में और विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।

इन सबके अलावा 21वी सदी के भारत में सबसे अव्वल स्थान पर भ्रष्टाचार की समस्या का समावेश होता है। भ्रष्टाचार सरकारी फैला रही है तो हम दूसरों से इसकी मुक्ति दिलाने की बारे में कैसे सोच सकते हैं। भ्रष्टाचार हमारे देश के विकास में बाधा बन रहा है। भारत 21वी सदी में भ्रष्टाचार प्रधान राष्ट्र नाम से जाना जाएगा।

भारत में अपराधियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। चोरी, डकैती, मर्डर, रेप, ठगी जैसी समस्या बढ़ रही है। प्राचीन काल से ही भारत में स्त्रियों को देवी का अवतार माना गया है परंतु आज के समय में बहू बेटियां सुरक्षित नहीं मालूम पड़ रही। भारत में एक दौर ऐसा भी था घर पर ताले लगाने की जरूरत नहीं पड़ती थी, परंतु आज के समय में आधुनिक तकनीक के द्वारा बनाए गए ताले भी और को सुरक्षित नहीं रख पाते।

भारत सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था क्योंकि यहां पर दूध दही की नदिया बहती थी पर आज के जमाने में ऐसा दूर-दूर तक संभव नहीं है। 21वी सदी में एक और तरक्की हो रही है तो दूसरी ओर दुगनी तेजी से बुराइयां भी फैल रही है।

21वी सदी में भारत में जातिवाद, क्षेत्रीयता, सांप्रदायिकता और धार्मिकता भयानक रूप से फैला हुआ है। इस समस्याओं से थोड़े ही सालों में एक महान विघटनकारी तत्व के स्वरूप में 21वी सदी का भारत दुखद और विपत्ति भारत में तब्दील हो जाएगा।

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आज जो भी काम करते हैं उसका फल हमें कल मिलता ही है। वैसे ही वर्तमान में होने वाले कार्यों पर भविष्य की नींव खड़ी होती है। आने वाला कल वर्तमान से ही होकर आता है। अगर हमें भविष्य को सुधारना है तो उसके लिए वर्तमान को सही करना होगा। इस प्रकार आज का भारत कल का भारत है।

भारत की दूसरी बड़ी समस्याओं में महंगाई का समावेश होता है। 21वी सदी में महंगाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। एक और गरीबी बेरोजगारी और जनसंख्या में बढ़ावा हो रहा है दूसरी ओर महंगाई थी उतनी ही तेजी से बढ़ रही है।

इस प्रकार भारत में 21वी सदी के दौरान विकास के साथ साथ कई सारी समस्या फैली हुई है। एक सिक्के के जैसे दो पहलू होते हैं वैसे ही भारत में 21वी सदी के दौरान अच्छे और बुरे दोनों ही विकास हो रहे हैं।

Last Final Word:

दोस्तों यह थी भारत की 21वी सदी की बारे में जानकारी। उम्मीद है आपको इस आर्टिकल से जरूरी माहिती मिली होगी। अगर आपके मन में अभी भी इस आर्टिकल से संबंधित कोई भी प्रश्न रह गया हो तो हमें कमेंट के माध्यम से अवश्य बताइए।

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